जैसा कि, बचपन वाले चित्र से स्पष्ट है स्वभाविक रूप से मैं एकांत प्रिय रहा हूँ। यह चित्र हमारे मामाजी द्वारा मथुरानागर,दरियाबाद में लिया गया था वहाँ आने पर उन्होंने मेरी माँ से पूछा और मुझे लेने वहाँ पहुँच गए जहां हमारी सबसे बड़ी जीजी मुझे खेलने के लिए ले गईं थीं , मुझे बेर के पत्ते से अकेला खेलते देख कर पहले यह चित्र खींच कर फिर मुझे ले आए।
पढ़ाई के दौरान भी मैं सामूहिक अंताक्षरी आदि जो शिक्षक करवाते थे उसमें तो भाग लेता था लेकिन सहपाठियों के साथ न खेल कर अकेले ही रहता था। वाद - विवाद प्रतियोताओं में जरूर भाग लेता था। ७ वीं कक्षा में प्रथम पुरुस्कार और स्नातक में भाषण गोष्ठी में द्वितीय पुरुस्कार भी प्राप्त किए।
नौकरी के दौरान ट्रेड यूनियन्स के जरिए राजनीति से भी सम्बद्ध रहा ( कम्युनिस्ट पार्टी - समाजवादी पार्टी - कम्युनिस्ट पार्टी )। आई टी सी के होटल मुगल , आगरा में कार्यरत रहने के दौरान बार्डर सिक्युरिटी फोर्स के रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर अमर सिंह जी के सान्निध्य से ज्योतिष के प्रति रुझान हुआ जबकि पहले ज्योतिष - विरोधी था। ज्योतिष के क्षेत्र में पोंगा - पंडित वाद का विरोधी हूँ। आगरा कालेज जूलाजी विभाध्यक्ष डाक्टर विजय कृष्ण तिवारी, भारत पेट्रोलियम लिमिटेड के उच्चाधिकारी डाक्टर ब्रिज मोहन उपाध्याय, सपा नेता और मर्चेन्ट नेवी के पूर्व उच्चाधिकारी पंडित सुरेश पालीवाल, कांग्रेस नेता और अध्यापक- स्कूल प्रबंधक मुन्ना लाल द्विवेदी , यू पी के क्राफ्ट एंड फुटवियर इंस्टिचयूट के डिप्टी डायरेक्टर राहुल पूरी आदि ब्राह्मण लोगों ने पोंगा - पंडितों से न पूछ कर मुझसे ज्योतिषीय परामर्श लिया और मुझसे अपने - अपने निवास - स्थानों पर हवंन - यज्ञ सम्पन्न करवाए। लेकिन अपने निकटतम रिश्तेदारों ने मुझसे परामर्श लेने के बावजूद पोंगा -पंडितों के बताए उपाय ही अपनाए।
जहां विभिन्न ज्योतिषी भी ग्रहों के निदान हेतु दान - पुण्य पर जोर देते हैं वहीं मैं ' दान का निषेद्ध करता हूँ और लोगों को दान उन वस्तुओं का करने को मना करता हूँ जो - जो ग्रह उनकी जन्म - कुंडली में उच्च के या स्व -ग्रही होते हैं। सिर्फ दो उदाहरण दान देने के बाद नुकसान उठाने वालों के देना बेहद जरूरी समझता हूँ।
१) ------ हमारी अपनी छोटी बहन ने अपनी कालोनी के मंदिर हेतु रु ११०० /- दान दिया और दाताओं की सूची में उनका नाम भी अंकित हुआ उनको एक अनावश्यक मुकदमे का लगभग नौ वर्षों तक सामना करना पडा जबकि, उनकी कुंडली में ब्रहस्पति उच्च का होने के कारण किसी भी मंदिर या मंदिर के पुजारी आदि को दान नहीं देना चाहिए था लेकिन पोंगा - पंडित तो दान - पुण्य करवाते है सो कर दिया और परेशानी का सामना किया।
२ ) ------ upsidc के एक एक्ज़ीक्यूटिव इंजीनियर साहब वृंदावन में दो भूखों को भोजन कराकर तथा पुजारी को दान देकर लौटे और आगरा प्रवेश करते ही सिकंदरा के पास लूट का शिकार हो गए। उनकी घड़ी की सोने की चेन , उनकी श्रीमती जी के कानों के कुंडल,हाथों के कडे ,गले का हार सब जबरिया उतरवा लिए गए क्योंकि उनको न तो मंदिर में दान करना था न ही अन्न का लेकिन उनको तो पोंगा - पंडितों की सलाह पर दान - पुण्य करना था ,किए और लूटे गए।
मुझसे ईर्ष्या करने वाले चाहे वे रिश्तेदार हो या अन्य परिचित मुझे असफल सिद्ध करने को सदैव प्रयासरत रहते हैं उनको परमात्मा और प्रकृति की दया पर छोड़ कर उनसे दूर रहता हूँ।
मैंने अपने लिए कुछ सूत्र तय कर लिए हैं उनका ही अनुसरण करता हूँ ------
1) ------ Healthy Mind Keeps the Body Healthy.
2 ) ------ Quick & Fast Decision but Slow & Steady Actio.
3 ) ------ Decided at Once Decided for Ever & Ever.
७५ वें वर्ष में प्रवेश पर सभी शुभकामनाएं प्रेषित करने वालों और उनके परिवारीजनों के लिए असीम मंगलकांनाएं.।
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