'गंगा'/'जमुना' के रूप में बाल-कलाकार बेबी सोनिया नाम से नीतू सिंह की भूमिकाएँ और उनका प्रस्तुतिकरण सराहनीय व प्रशंसनीय हैं। किरण के रूप में माला सिन्हा की भूमिकाएँ ठीक रही हैं जबकि निगार सुलताना को उनकी माँ के रूप में विकृत चेहरा प्रस्तुत करना पड़ा है। उनके समकक्ष शबनम की माँ मधुमती के रूप में मनोरमा को भी अनैतिकता का सहारा लेते दिखाया गया है। सुजाता के रूप में सुजाता की भूमिका भी आदर्श प्रस्तुतीकरण है।शेखर के रूप में बिस्वजीत किरण की माँ के व्यवहार की प्रतिक्रिया वश मधुमती के प्रपंच व जाल में फँसते दिखाये गए हैं।
गंगा जब वेश बदल कर जमुना के रूप में ननसाल में माँ के साथ रहती है तो उसकी मार्मिक भूमिका में बालिका नीतू सिंह का कमाल इस गीत के माध्यम से देखिये-
किरण के पिता के रूप में ओमप्रकाश व शेखर के मित्र के रूप में महमूद अली की भूमिकाएँ भी कम सराहनीय नहीं हैं। समाज में फैले भ्रष्टाचार, कर-चोरी, जनता के शोषण-उत्पीड़न पर हास्य प्रस्तुति के रूप में महमूद के कृत्य का कायल हुये बगैर नहीं रहा जा सकता है-
खुले दिल और दिमाग से देखें और पाखंड को त्याज्य दें तो आज की परिस्थितियों में भी फिल्म 'दो कलियाँ' एक आदर्श मनोरंजक फिल्म सिद्ध होती है।
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