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शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2015

मिसेज X ( रेखा की जन्मपत्री से साम्य ) व y कुंडलियों में क्या विशेष है? ---विजय राजबली माथुर


मिसेज X    (09 अक्तूबर 1954,प्रातः 04 बजे,आगरा).....................................................मिसेज Y (07 सितंबर 1979,प्रातः 07-50,आगरा)                             

03 जून 2007 को  हिंदुस्तान,आगरा के अंक मे  प्रकाशित श्रीमती शबाना आज़मी और सुश्री रेखा की जन्मपत्रियों का विश्लेषण उन्हीं को आधार मान कर किया गया था। लेकिन आज यहाँ  प्रस्तुत दोनों कुंडलियाँ मेरे द्वारा ही बनाई गई हैं और ये परस्पर माता-पुत्री की हैं। माता के लिए -मिसेज X और पुत्री के लिए मिसेज Y का प्रयोग किया जा रहा है। इस पूरे परिवार से एक ही कालोनी मे रहने  के कारण जान-पहचान थी। ग्रहों की चाल को प्रेक्टिल रूप से स्पष्ट करने हेतु इन कुंडलियों का सहारा लिया जा रहा है । मिसेज X का जन्म आगरा मे,मद्रास मे जन्मी फिल्म अभिनेत्री 'रेखा' से लगभग 31 घंटे पूर्व हुआ है। रेखा और मिसेज X की राशियाँ एक ही 'कुम्भ' हैं किन्तु लग्न अलग-अलग हैं। मिसेज X की जन्मपत्री का चयन इसी वजह से किया है कि,'रेखा' की जन्मपत्री का जो विवेचन दिया जा चुका है वह इस विश्लेषण की सहायता से आसानी से समझा जा सकता है।

मिसेज X

आगरा मे 09 अक्तूबर 1954 की प्रातः 04 बजे X का जन्म हुआ है उस आधार पर जन्म कुंडली बनी है। जन्म लग्न सिंह है,राशि कुम्भ है जो सुश्री रेखा की भी है। समस्त ग्रह रेखा और X की कुंडलियों मे एक ही राशियों मे  हैं। जन्म समय मे 31 घंटे का अंतर होने के कारण सिर्फ लग्न अलग-अलग हैं। अतः ग्रह जिन भावों मे रेखा के हैं उससे भिन्न भावों मे X के हैं।  X की जन्मपत्री के जिस भाव मे जिस राशि मे ग्रह हैं उनके अनुसार फल लिखा है और प्रेक्टिकल (वास्तविक ) जीवन मे वैसा ही चरितार्थ होता दिखा है अतएव 'रेखा'की कुंडली मे उन्हीं ग्रहों के उन्हीं राशियों मे दूसरे भावों मे होने के कारण जो फल लिखा है वह भी प्रेक्टिकल (वास्तविक )जीवन मे वैसा ही चरितार्थ होना चाहिए । यही वजह X की जन्म कुंडली उदाहरणार्थ लेने का कारण बनी हैं।

X ने अपनी जन्मपत्री बनवाने को जब कहा तो विशिष्ट रूप से यह भी निवेदन * किया कि,लिखित मे जो दें उससे अलग हट कर उन्हें ,उनके निगेटिव प्वाईंट्स व्यक्तिगत रूप से ज़रूर बता दें। अमूमन तमाम बातें ऐसी रहती हैं कि नजदीकी से नजदीकी व्यक्ति भी निगेटिव प्वाईंट्स नहीं जान पाता है परंतु ग्रहों का ज्योतिषीय विश्लेषण उन तथ्यों को उजागर कर सकता है। चूंकि X की पुत्री Y को न्यूम्रोलाजी का कुछ ज्ञान था अतः उसने अपनी माँ को उनके अपने निगेटिव प्वाईंट्स बताये थे और उन्हीं का वेरीफिकेशन वह मुझ से कराना चाहती थीं,कि क्या ग्रहों की चाल से इतना सब वाकई ज्ञात हो सकता है ?शायद अपनी पुत्री के ज्योतिषीय ज्ञान पर उन्हें भरोसा न रहा हो किन्तु उन्होने मुझे बताया कुछ नहीं सिर्फ मुझ से बताने को कहा था और बाद मे आत्म-स्वीकृति द्वारा मेरे कथन की परिपुष्टि की थी।

X के शिक्षक पति बेहद सौम्य व्यवहार वाले थे। किन्तु उनकी (x की ) कुंडली मे स्थित राशि बता रही थी कि वह काफी उग्र स्वभाव के और आक्रामक होंगे। अतः विश्लेषण लिखना शुरू करने से पूर्व X से साफ-साफ पूछा कि क्या मास्टर साहब जैसे दिखाई देते हैं उसके उलट स्वभाव उनका है ,क्या वह वास्तव मे दबंग हैं? X का जवाब प्रश्नवाचक था कि क्या उनकी कुंडली से उनके पति का यह स्वरूप सामने आया है। हाँ कहने पर उन्होने कुबूल किया कि शहर मे तो वह नम्र रहते हैं गाँव मे दबंगी दिखाते हैं कभी वांछित व्यक्ति न मिलने पर उसके घर से भैंस खोल कर अपने घर ले आए थे। समस्त बातें रफ पेपर से पढ़ कर उन्हें सुना दी जिन्हें उन्होने स्वीकार कर लिया परंतु लिखित मे वही दिया जो पॉज़िटिव था। बाद मे X ने अपने हाथ मे भी निगेटिव बातों का ज्ञान होने की बात पूछी थी उन्हें बता दिया था कि जन्मपत्री को गणना मे गलती के आधार पर आप नकार भी दें लेकिन अपनी लकीरों को छिपा या बदल नहीं सकती हैं।

X के पति भाव मे बैठा 'चंद्र' उनके पति को ऊपर से सौम्य बनाए हुये था और लग्न पर पूर्ण सप्तम दृष्टि के कारण खुद X के चेहरे को लावण्य मय रूप  प्रदान कर रखा था ,लग्न ने कमर तक उनके शरीर को आकर्षकत्व प्रदान किया था। उनकी कुंडली मे पति का कारक ग्रह ब्रहस्पति द्वादश भाव मे उच्च का है और नवम  दृष्टि से आयु के  20 वे भाव को देख रहा है जहां  'मीन' राशि स्थित है जो खुद बृहस्पति  की ही राशि है । अतः  जीवन के 20वे वर्ष मे उनका विवाह तय हो गया और 08 दिसंबर 1974 को विवाह बंधन मे बंध गईं।उस समय वह बृहस्पति  की महादशा के अंतर्गत 'चंद्र' की अंतर्दशा मे थीं जिसका प्रभाव बाधापूर्ण होता है। तृतीय भाव मे उच्च का शनि है जिसने उनके बाद भाई नहीं उत्पन्न होने दिये। उनके बाद दो बहने और हुई तब ही भाई हुये। शनि की स्थिति उन्हें निम्न -स्तर के कार्यों हेतु प्रेरित करने वाली है। सुख भाव मे मंगल की वृश्चिक राशि मे शुक्र स्थित है जो यह दर्शाता है कि विपरीत योनि के लोग उनमे आकर्षण रखते होंगे और वह उनमे ,उनके जीवन मे उनके प्रेमियों का भी हस्तक्षेप होगा। हाथ की लकीरों से रिश्ता भी स्पष्ट था और उन्हें बता दिया कि छोटे देवर व छोटे बहनोई से उनका शारीरिक संबंध होना चाहिए जिसे यह कह कर उन्होने कुबूल किया कि इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता है। पंचम संतान भाव मे 'मंगल' व 'राहू' की स्थिति से उन्होने बचपन मे अपनी पुत्री Y के अनुत्तीर्ण होने की ही बात नहीं स्वीकारी बल्कि हँसते हुये यह भी स्वीकार किया कि " 'एबार्शन' तो जान-बूझ कर करवाए -कितने बच्चे पैदा करते?" उन्होने यह भी स्वीकार किया कि पैदा करने पर पहचान का भी भय था।उनकी प्रथम संतान पुत्र है जो ग्रह योगों के अनुरूप ही पूर्ण आज्ञाकारी है।  मिसेज Y उनकी दूसरी संतान है और उससे एक वर्ष छोटी दूसरी पुत्री है। उच्च के बृहस्पति  ने धन-दौलत,मान-सम्मान,उच्च वाहन सुख सभी प्रदान किए हैं।


मिसेज Y

Y की राशि भी अपनी माँ वाली 'कुम्भ'ही है परंतु लग्न-'कन्या' है जो 'प्रेम' मे असफलता प्रदान करती है। और इस कुंडली मे लग्नेश,पंचमेश व सप्तमेश सभी 'द्वादश'भाव मे बैठे है जो 'व्यय भाव' होता है। अतः Y को प्रेम के मामले मे सावधानी की आवश्यकता थी जो बात  उसने अपनी माँ के माध्यम से पुछवाई थी। X को स्पष्ट रूप से बता दिया गया था कि यदि विवाह करना हो तो 'एरेंज्ड मेरेज' के जरिये ही हो वरना 'प्रेम-विवाह' सफल  नहीं हो सकता। यह बात Y के 2003  मे जाब पर बेंगलोर जाते समय X ने पूछी थी और 2008 मे जब Y ने अंतरजातीय प्रेम विवाह की बात उठाई तो मास्टर साहब ने बेटी और उसके प्रेमी को गोली से उड़ा देने की धमकी दी। X ने पूर्व जानकारी के आधार पर कोई नाटक खेला जिसमे उनका बी पी भी काफी लो हो गया और मास्टर साहब की पूर्व शिष्या लेडी डॉ के मुताबिक दिमाग पर भी झटके का असर था। लिहाजा अपनी शिष्या रही डॉ की सलाह पर मास्टर साहब 'एरेंज्ड मेरेज' करने को राजी हो गए। 15 दिन की तड़ापड़ी मे तैयारी करके 29 जनवरी 2008 को Y का विवाह किया गया।

X और Y की जब तुलना की जाये तो ग्रहों की चाल का असर साफ-साफ समझ आ जाएगा। इंटर पास X को सफलता और क्वालिफ़ाईड इंजीनियर Y को असफलता अपने-अपने ग्रहों के अनुरूप ही मिल रही थी। यदि पूर्व मे ज्योतिषीय ज्ञान से खतरे का आंकलन न होता तो निश्चय ही Y को अपने प्रेमी सहित मौत का सामना करना पड़ता क्योंकि कुंडली मे चंद्रमा षष्ट भाव मे राहू के साथ 'ग्रहण योग' बना रहा है। X की कुंडली मे लग्नेश सूर्य बुध की राशि मे है और बुध शुक्र की राशि मे शनि के साथ जो कि सप्तमेश है ,पंचम 'प्रेम' भाव मे शनि सरीखा राहू तो है ही पंचमेश बृहस्पति  'चंद्र' की राशि मे है और 'चंद्र' सप्तम भाव मे शनि की राशि मे। इस प्रकार लग्नेश,पंचमेश और सप्तमेश मे अच्छा तालमेल होने के कारण X विवाहोपरांत भी प्रेमियों से सफल संपर्क कायम रख सकीं जबकि Y को फजीहत और झगड़े के बाद ही X की तिकड़म और हस्तक्षेप से मन की  मुराद पूरी करानी पड़ी। X के हाथ मे विवाह रेखा के समानान्तर दो और सफल रेखाएँ स्पष्ट रूप से स्थित हैं जबकि Y के हाथ मे एक ही रेखा भी जटिल संकेत देती है।
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 *'रेखा',X और Y के विश्लेषणों द्वारा माता-पिता और संतान के अंतर सम्बन्धों का भी परिचय स्पष्ट मिलता है। इसके अतिरिक्त y की कुंडली में लग्न, पंचम व सप्तम भावों के स्वामी क्रमशः बुध,शनि व बृहस्पति में परस्पर संबंध होने के बावजूद जो कि 'प्रेम-विवाह' के योग उपस्थित तो करते हैं परंतु कुंडली के बारवें स्थान में अवस्थित होने के कारण 'मारक' योग भी प्रदान करते हैं। इसीलिए पितृ भाव में उसके स्वामी 'बुध' के शत्रु 'मंगल' की उपस्थिती ने पिता के विरोध को प्रकट किया था जबकि मातृ भाव का स्वामी 'बृहस्पति' y की माँ की कुंडली में बारवें भाव में होने के बावजूद 'उच्च' का y की माँ के लिए सहायक व शुभ था जबकि y की कुंडली में बारवें होने के कारण 'मारक'। परंतु माँ  x के सहयोग ने  पुत्री y को अपने प्रेमी को ही पति बनाने का सुअवसर विजातीय होने के बावजूद प्रदान कर दिया है।  

x की जन्मपत्री उनके हस्तरेखा के अध्यन के आधार पर बनानी पड़ी क्योंकि जन्म दिनांक,समय व वर्ष उपलब्ध नहीं था। अतः हस्तरेखाओं के आधार पर पहले यह पुष्टि की कि, विवाह 21 वें वर्ष में हुआ था फिर संतान रेखाओं के आधार पर जीवित संतानों व कराये गए 'एबारशंस' की पुष्टि जिसके बाद ही गणना करना संभव हुआ। जन्मतिथि व माह एवं वर्ष की गणना करने हेतु x का अनेकों बार हस्त-परीक्षण करना पड़ा और इस क्रम में पुष्टि हेतु अनेकों प्रश्न पूछने पड़े जिनका सही-सही उत्तर x द्वारा दिया गया कारण यह भी था कि y जो उनकी पुत्री है पहले ही अपनी माँ को उस ओर सचेत कर चुकी थी। अन्यथा किसी महिला द्वारा इतनी आसानी से नितांत गोपनीय बातों को अन्य व्यक्ति के समक्ष स्वीकारना संभव न था। 

y का विवाह 30 वें वर्ष में जिस भाव पर पति कारक ग्रह बृहस्पति की पूर्ण सप्तम दृष्टि थी सम्पन्न हुआ।  y की लग्न 'कन्या' व पंचम- संतान  भाव में स्थित राशि मकर के कारण प्रथम संतान कन्या उत्पन्न हुई। जबकि x की लग्न 'सिंह' व पंचम -संतान भाव में 'धनु' राशि स्थित होने के कारण प्रथम संतान पुत्र हुआ। x का लग्नेश 'सूर्य ' दिवतीय भाव जो वाणी का भी कारक भाव है में अपने मित्र ग्रह बुध की कन्या राशि में स्थित है जिस कारण 'x ' का व्यवहार व बोली काफी मधुर हुई जो लोगों को उनकी ओर आकर्षित करने में सहायक रही। यही कारण था कि 20 वर्ष की आयु में भी और 54 वर्ष की आयु में भी ' x ' विपरीत योनि के लोगों को आकर्षित करने में सफल रहीं। घर-परिवार-समाज में भी सफल व सम्मानित रहीं। 

ग्रह- नक्षत्रों के प्रभाव को कोई स्वीकार करे अथवा अस्वीकार उनका जीवन में अमिट प्रभाव पड़ता ही पड़ता है। 

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शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2014

'रेखा' ज्योतिष के आईने में-----विजय राजबली माथुर

जन्मदिवस (10 अक्तूबर ) पर विशेष रूप से -पुन :प्रकाशन

 


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सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री 'रेखा'
हिंदुस्तान,आगरा,03 जून 2007 मे प्रकाशित 'रेखा'की जन्म कुंडली 

सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री 'रेखा' किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। उनके पिता सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता 'जेमिनी' गनेशन ने उनकी माता सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री पुष्पावल्ली से विधिवत विवाह नहीं किया था। उन्हें पिता का सुख प्राप्त नहीं हुआ और न ही पिता का धन ही प्राप्त हुआ। कुल-खानदान से भी लाभ नहीं मिला और समाज से भी आलोचनाओ का सामना करना पड़ा। इतनी जानकारी पत्र-पत्रिकाओं मे छ्पी है। किन्तु ऐसा क्यों हुआ हम ज्योतिष के आधार पर देखेंगे।

धनु लग्न और कुम्भ राशि मे जन्मी रेखा घोर 'मंगली'हैं और उनके द्वादश भाव मे 'शुक्र'ग्रह स्थित है जिसने उन्हे परिवार व समाज से लाभ नहीं प्राप्त होने दिया है। उनके दशम भाव मे जो पिता,कर्म व राज्य का हेतु होता है -कन्या राशि का सूर्य है। इस भाव मे सूर्य की स्थिति उनकी माता और पिता के विचारों मे असमानता का द्योतक है। इसी सूर्य ने उनकी माता को उनके पिता से अलग रखा और इसी सूर्य ने उन्हें खुद को पिता,परिवार व कुल से लाभ नहीं मिलने दिया। तृतीय भाव मे चंद्र ने बैठ कर कुटुंब सुख को और कम किया तथा पति भाव-सप्तम मे बैठ कर 'केतू' ने पति-सुख से वंचित रखा। द्वादश भाव मे 'शुक्र' मंगल की वृश्चिक राशि मे स्थित है जो जीवन भर 'उपद्रव'कराने वाला है और इसी ने उन्हें व्यसनी भी बनाया।

लग्न मे बैठे 'मंगल' की दृष्टि ने वैवाहिक सुख तो नहीं मिलने दिया किन्तु कला-ज्ञान और धन की प्रचुरता उसी ने उपलब्ध कारवाई। लग्न मे ही बैठे 'राहू' ने उन्हें शारीरिक 'स्थूलता' प्रदान की थी जिसे उन्होने अपने प्रयासों से नियंत्रित कर लिया है। यही 'राहू'  उन्हें छोटी परंतु पैनी आँखें ,संकरा तथा अंदर खिचा हुआ सीना,चालाकी तथा ऐय्याशी भी प्रदान कर रहा है।

तृतीय भाव मे बैठा चंद्र 'रेखा' को अल्पभाषी,व म्रदुल व्यवहार वाला भी बना रहा है जिसके प्रभाव से वह कम से कम बोल कर अधिक से अधिक कार्य करके दिखा सकी हैं। अष्टम भाव मे उच्च का ब्रहस्पति उन्हें दीर्घायु भी प्रदान कर रहा है तथा धनवान व स्वस्थ भी रख रहा है।

राज योग 

दशम भाव मे कन्या राशि का सूर्य 'रेखा' को 'राज्य-भंग ' योग भी प्रदान कर रहा है। इसका अर्थ हुआ कि पहले उन्हें 'राज्य-सुख 'और 'राज्य से धन'प्राप्ति होगी फिर उसके बाद ही वह भंग हो सकता है। लग्न मे बैठा 'राहू' भी उन्हें राजनीति-निपुण बना रहा है। एकादश भाव मे बैठा उच्च का 'शनि' उन्हें 'कुशल प्रशासक' बनने की क्षमता प्रदान कर रहा है। नवम  भाव मे 'सिंह' राशि का होना जीवन के उत्तरार्द्ध मे सफलता का द्योतक है। अभी वह कुंडली के दशम भाव मे 58(मूल लेख 2012 का है ) वे वर्ष मे चल रही हैं और आगामी जन्मदिन के बाद एकादश भाव मे 59 वे वर्ष मे प्रवेश करेंगी। समय उनके लिए अनुकूल चल रहा है।

राज्येश'बुध' की महादशा मे 12 अगस्त 2010 से 23 फरवरी 2017 तक की अंतर्दशाये भाग्योदय कारक,अनुकूल सुखदायक और उन्नति प्रदान करने वाली हैं। 24 फरवरी 2017 से 29 जून 2017 तक बुध मे 'सूर्य' की अंतर्दशा रहेगी जो लाभदायक राज्योन्नति प्रदान करने वाली होगी।

अभी तक रेखा के किसी भी राजनीतिक रुझान की कोई जानकारी किसी भी माध्यम से प्रकाश मे नहीं आई है ,किन्तु उनकी कुंडली मे प्रबल राज्य-योग हैं। जब ग्रहों के दूसरे परिणाम चरितार्थ हुये हैं तो निश्चित रूप से इस राज्य-योग का भी लाभ मिलना ही चाहिए। हम 'रेखा' के राजनीतिक रूप से भी सफल होने की मंगलकामना करते हैं। 

Thursday, April 19, 2012

रेखा -राजनीति मे आने की सम्भावना---विजय राजबली माथुर

http://krantiswar.blogspot.in/2012/04/blog-post_19.html 
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हिंदुस्तान,लखनऊ के 27-04-2012 अंक मे प्रकाशित सूचना-



शुभ समय ने अपना असर दिखाया और 'रेखा' जी को राज्य सभा मे पहुंचाया। हम उनकी सम्पूर्ण सफलता की कामना करते है और उम्मीद करते हैं कि वह 'तामिलनाडू' की मुख्य मंत्री पद को भी ज़रूर सुशोभित करेंगी।
27 अप्रैल,2012 

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शनिवार, 4 जनवरी 2014

उमरावजान का आधुनिक सुल्तान कौन?रेखा राजनीति में कैसे??---विजय राजबली माथुर

 मिर्ज़ा हादी  रुसवा द्वारा 1905 में लिखित उर्दू उपन्यास 'उमरावजान अदा'पर आधारित -1981 में प्रदर्शित फिल्म 'उमराव जान' के माध्यम से मुजफ्फर अली साहब ने 1840 से 1857 तक के काल खंड में ब्रिटिश साम्राज्य के सहारे चल रही नवाबों/सुल्तानों की विलासिता और ईमानदारों को कर्तव्य पालन के कारण होने वाली दुश्वारीयों/हानियों तथा निर्दोषों के उत्पीड़न-शोषण की जानकारी उपलब्ध कराई थी। किन्तु शायद इस फिल्म को भी मनोरंजन के ही एक दृष्टिकोण  से लिया गया प्रतीत होता है। तभी तो आज दिग्गज चिंतक-विचारक और बड़े कम्युनिस्ट नेता भी 'आप' और केजरीवाल के दीवाने बने घूम रहे हैं।

आज 'आप'/केजरीवाल उसी भूमिका में हैं जिसमें उस वक्त के सुल्तान और नवाब थे। जनता के उत्पीड़न और शोषण से संग्रहीत धन को कारपोरेट घराने इन नए सुल्तानों पर लुटा रहे हैं और ये नए सुल्तान मनमोहनी अदाओं से आज की उमराव जान अर्थात बेगुनाह जनता को दिवा-स्वप्न या ख़्वामख़्वाह के झूठे सब्जबाग दिखा रहे हैं ,जैसे इस सुल्तान ने उमरावजान को दिखाये थे। :



एक दारोगा की कर्तव्यपालन में बरती ईमानदारी की सजा उसकी पुत्री को दर-दर भटकने और ठोकरें खाने के रूप में प्राप्त हुई थी। चाह कर भी वह एक बार फँसने के बाद दलदल से न निकल सकी थी। यहाँ तक कि 1857 की क्रांति  की तैयारियों में संलिप्त एक योद्धा ने जब उस लड़की को बचा कर निकालने का प्रयास किया तो उसको ही अपनी जान से हाथ धोना पड़ गया। क्रांति की विभीषिका में जब लखनऊ छोड़ कर बनारस जाने के फैजाबाद पड़ाव में भाग कर जब वह लड़की उमरावजान छिप कर वहीं डेरा जमा लेती है तो उसका अपना छोटा भाई जो उसके अपहरण का चश्मदीद गवाह था उसको भगा देता है और उसकी माँ भी उसकी रक्षा नहीं कर पाती है। 

बिलकुल उसी लड़की जैसी दशा इस समय देश की जनता की हो रही है। कांग्रेस/भाजपा के साम्राज्यवादी मंसूबों को पूरा करने में संभावित संदेह को देखते हुये आज के नए 'सुल्तान' के रूप में 'आप'/केजरीवाल का अवतरण किया गया है। देश की राजधानी दिल्ली की जनता को ठगने में सफल हो जाने के बाद इस सुल्तान के हौसले बुलंद हैं। सारे देश की जनता उमरावजान की भांति ठगे जाने को आतुर प्रतीत हो रही है। दुखद स्थिति यह है कि साम्राज्यवाद के विरुद्ध गर्जन/तर्जन करने वाले वामपंथी और कम्युनिस्ट भी इस नए सुल्तान पर फिदा होकर जनता को ठगे जाने की प्रक्रिया में ही शामिल होते दीख रहे हैं। छिट-पुट संघर्ष करने वालों की आवाज़ को उसी तरह दबा दिया जाएगा जिस प्रकार तब गदर के एक नायक फैज अली को उमरावजान को बचाने के प्रयास में मौत के घाट उतार दिया गया था। 
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उमरावजान की प्रधान नायिका 'रेखा'का ज्योतिषीय विश्लेषण मैंने 'क्रांतिस्वर' में 19 अप्रैल 2012 को दिया था और तत्कालीन राष्ट्रपति महोदया ने 26 अप्रैल 2012 को रेखा जी को राज्यसभा में मनोनीत करने की घोषणा कर दी थी। प्रस्तुत है वह आलेख :

Thursday, April 19, 2012


रेखा -राजनीति मे आने की सम्भावना---विजय राजबली माथुर 

सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री 'रेखा'
हिंदुस्तान,आगरा,03 जून 2007 मे प्रकाशित 'रेखा'की जन्म कुंडली 



सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री 'रेखा' किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। उनके पिता सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता 'जेमिनी' गनेशन ने उनकी माता सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री पुष्पावल्ली से विधिवत विवाह नहीं किया था। उन्हें पिता का सुख प्राप्त नहीं हुआ और न ही पिता का धन ही प्राप्त हुआ। कुल-खानदान से भी लाभ नहीं मिला और समाज से भी आलोचनाओ का सामना करना पड़ा। इतनी जानकारी पत्र-पत्रिकाओं मे छ्पी है। किन्तु ऐसा क्यों हुआ हम ज्योतिष के आधार पर देखेंगे।

धनु लग्न और कुम्भ राशि मे जन्मी रेखा घोर 'मंगली'हैं और उनके द्वादश भाव मे 'शुक्र'ग्रह स्थित है जिसने उन्हे परिवार व समाज से लाभ नहीं प्राप्त होने दिया है। उनके दशम भाव मे जो पिता,कर्म व राज्य का हेतु होता है -कन्या राशि का सूर्य है। इस भाव मे सूर्य की स्थिति उनकी माता और पिता के विचारों मे असमानता का द्योतक है। इसी सूर्य ने उनकी माता को उनके पिता से अलग रखा और इसी सूर्य ने उन्हें खुद को पिता,परिवार व कुल से लाभ नहीं मिलने दिया। तृतीय भाव मे चंद्र ने बैठ कर कुटुंब सुख को और कम किया तथा पति भाव-सप्तम मे बैठ कर 'केतू' ने पति-सुख से वंचित रखा। द्वादश भाव मे 'शुक्र' मंगल की वृश्चिक राशि मे स्थित है जो जीवन भर 'उपद्रव'कराने वाला है और इसी ने उन्हें व्यसनी भी बनाया।

लग्न मे बैठे 'मंगल' की दृष्टि ने वैवाहिक सुख तो नहीं मिलने दिया किन्तु कला-ज्ञान और धन की प्रचुरता उसी ने उपलब्ध करवाई। लग्न मे ही बैठे 'राहू' ने उन्हें शारीरिक 'स्थूलता' प्रदान की थी जिसे उन्होने अपने प्रयासों से नियंत्रित कर लिया है। यही 'राहू'  उन्हें छोटी परंतु पैनी आँखें ,संकरा तथा अंदर खिचा हुआ सीना,चालाकी तथा ऐय्याशी भी प्रदान कर रहा है।

तृतीय भाव मे बैठा चंद्र 'रेखा' को अल्पभाषी,व म्रदुल व्यवहार वाला भी बना रहा है जिसके प्रभाव से वह कम से कम बोल कर अधिक से अधिक कार्य करके दिखा सकी हैं। अष्टम भाव मे उच्च का ब्रहस्पति उन्हें दीर्घायु भी प्रदान कर रहा है तथा धनवान व स्वस्थ भी रख रहा है।

राज योग :

दशम भाव मे कन्या राशि का सूर्य 'रेखा' को 'राज्य-भंग ' योग भी प्रदान कर रहा है। इसका अर्थ हुआ कि पहले उन्हें 'राज्य-सुख 'और 'राज्य से धन'प्राप्ति होगी फिर उसके बाद ही वह भंग हो सकता है। लग्न मे बैठा 'राहू' भी उन्हें राजनीति-निपुण बना रहा है। एकादश भाव मे बैठा उच्च का 'शनि' उन्हें 'कुशल प्रशासक' बनने की क्षमता प्रदान कर रहा है। नवम  भाव मे 'सिंह' राशि का होना जीवन के उत्तरार्द्ध मे सफलता का द्योतक है। अभी वह कुंडली के दशम भाव मे 58 वे वर्ष मे चल रही हैं और आगामी जन्मदिन के बाद एकादश भाव मे 59 वे वर्ष मे प्रवेश करेंगी। समय उनके लिए अनुकूल चल रहा है।

राज्येश'बुध' की महादशा मे 12 अगस्त 2010 से 23 फरवरी 2017 तक की अंतर्दशाये भाग्योदय कारक,अनुकूल सुखदायक और उन्नति प्रदान करने वाली हैं। 24 फरवरी 2017 से 29 जून 2017 तक बुध मे 'सूर्य' की अंतर्दशा रहेगी जो लाभदायक राज्योन्नति प्रदान करने वाली होगी।

अभी तक रेखा के किसी भी राजनीतिक रुझान की कोई जानकारी किसी भी माध्यम से प्रकाश मे नहीं आई है ,किन्तु उनकी कुंडली मे प्रबल राज्य-योग हैं। जब ग्रहों के दूसरे परिणाम चरितार्थ हुये हैं तो निश्चित रूप से इस राज्य-योग का भी लाभ मिलना ही चाहिए। हम 'रेखा' के राजनीतिक रूप से भी सफल होने की मंगलकामना करते हैं। 

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हिंदुस्तान,लखनऊ के 27-04-2012 अंक मे प्रकाशित सूचना-

 एक मार्क्स वादी पिता की पुत्री होने के बावजूद रेखा जी को आज कम्युनिस्टों का समर्थन न प्राप्त होना सोचनीय विषय है जबकि उनका खुद का जीवन उत्पीड़न और संघर्षों से भरा रहा है। 'दूरदर्शिता' का यह आभाव ही भारत में साम्यवाद के सफल न होने का एक कारण है। 

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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

उदारता और पात्र की अनुकूलता(भाग-3 ) ---विजय राजबली माथुर

"डॉ साहब ऐसे लोग दूसरे लोगों को विभ्रम मे रखने हेतु अधूरा या द्वंदात्मक परिचय देते हैं क्योंकि उनके इरादे नेक नहीं होते हैं। ऐसे लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट मिलने पर आप सदृश्य प्रतिष्ठित लोगों के म्यूचुयल नाम देख कर स्वीकार तो कर लेता हूँ परंतु उनकी एक- दो पोस्ट्स पढ़ते ही भेद खुल जाता है और उनको तत्काल ब्लाक कर देता हूँ । अभी-अभी ऐसे ही एक सज्जन को ब्लाक किया है जिनके बीच आप समेत 54 लोग म्यूचुयल थे।"18 अप्रैल 2013 को एक स्टेटस पर मेरी यह टिप्पणी यों ही बेवजह नहीं है। 

इस पर उन विद्वान डाइरेक्टर  साहब ने यह जवाब दिया है-" भाई ! विचित्र मित्र ग़लती से बन जाते हैं । प्रायः उनकी वाल पढ़ लेने से ऐसी ग़लती की सम्भावना क्षीण हो जाती है । फिर भी कभी कभी फूल के साथ काँटे आ ही जाते हैं । चुभने पर उन्हें निकाल देने में कोई हर्ज भी नहीं ।"

दूसरी पार्टी के प्रादेशिक राजनेता श्रीवास्तव साहब को यदि उनकी बुजुर्गीयत के चलते और अपनी पार्टी के प्रदेश नेताओं द्वारा  उनको दिये जाने वाले सम्मान को देखते हुये मैंने भी उनको सम्मान दिया और उनके कार्यों का निशुल्क सम्पादन/निराकरण  कर दिया तो इसका अभिप्राय यह नहीं है कि मैं उनके आगे झुक या दब गया हूँ परंतु वह यही समझ रहे हैं । चाहे यह उनका गलत आंकलन हो या साजिशन वह ऐसा करते हों यह तो वही जानें। अभी 17 अप्रैल को  ही वह एक लेख पढ़ते हुये यह भी देख गए थे कि मेरी फ्रेंड लिस्ट मे कौन-कौन हैं?उसके मद्दे नज़र एक हाई कोर्ट वकील से उन्होने फ्रेंड रिक्वेस्ट भिजवाई जिसने 'एबाउट' मे अधूरा परिचय दिया हुआ था उसको स्वीकारते ही पोस्ट्स सामने आ गई जिनसे पोल खुल गई और ब्लाक कर दिया। 

यह श्रीवास्तव राजनेता साहब पूना प्रवासी-भृष्ट-धृष्ट-निकृष्ट-ठग ब्लागर की रांची स्थित हमदर्द  ब्लागर के रिश्तेदार हैं और पटना मे इनकी गहरी पैठ है। पूना प्रवासी ब्लागर ने पटना प्रवासी अपनी ब्राह्मण शिष्या (जिसने उनको 'द्रोणाचार्य'कहते हुये प्रशंसात्मक कविता लिखी थी)ब्लागर की मार्फत पहले यशवन्त को पूना मे नौकरी करने का प्रस्ताव भिजवाया था जिसे ठुकरा देने के बाद पटना प्रवासी ब्लागर ने अपने पति के आफिस मे उसको जाब का आफ़र दिलाया था। इन चालों और जालों मे न फँसने देने का परिणाम यह हुआ कि पूना प्रवासी और पटना प्रवासी ब्लागर्स ने मिल कर पटना मे पूनम के घर वालों  को तांत्रिक प्रक्रियाओं से परेशान करना प्रारम्भ कर दिया है जिसमे अब यह राजनेता श्रीवास्तव साहब भी जुड़ गए हैं।गत वर्ष हम लोग हाई कोर्ट वकील हरी मोहन माथुर  साहब(बड़े ताऊजी की बेटी बीना के पति) के यहाँ सिटी बस से जा रहे थे तब बस मे ही इन राजनेता श्रीवास्तव साहब का फोन आया कि,हम आपके घर आ रहे हैं। मजबूरन बताना पड़ा कि हम घर पर नहीं हैं,इन साहब ने आस-पास के कई वकीलों को हमारी खुफियागिरी करने के काम मे लगाया हुआ है और वह यही कनफर्म करना चाहते थे कि क्या हम वास्तव मे घर पर नहीं हैं। यह  श्रीवास्तव साहब अपनी पार्टी से बगावत इस आधार पर करना चाहते हैं कि उनकी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मुलायम सिंह जी के पक्षधर हैं। यह इस बात को भूल रहे हैं कि रांची वाले जिस ब्लागर से रिश्तेदारी के आधार पर यह  हमारे खिलाफ अभियान मे जुटे हुये हैं उसी रांची के मूल  निवासी एक श्रीवास्तव IAS महोदय ने मुलायम सिंह जी को मैनपुरी मे पिछले चुनावों मे  परेशान किया था यदि मुलायम सिंह जी अब केंद्र की सत्ता मे आ जाएँ तो उन IAS महोदय से बदला ले सकते हैं तब यह श्रीवास्तव राजनेता साहब कैसे अपनी ब्रादरी के अफसर का बचाव करा पाएंगे?

दूरदर्शिता का यही आभाव ही था जिसने भृष्ट-धृष्ट-निकृष्ट-ठग ब्लागर के उकसावे पर ज्योतिष के विरोध मे लेख लिखने व मेरे विरुद्ध टिप्पणी करने वाले लखनऊ के ब्लागर को अपने अंतर्राष्ट्रीय कंपटीशन मे मेरे समर्थन से वंचित कर दिया। 

वस्तुतः 19 अप्रैल 2012 को एक लेख-'रेखा राजनीति मे आने की संभावना' (http://krantiswar.blogspot.in/2012/04/blog-post_19.html) दिया था 
और 26 अप्रैल 2012 को तत्कालीन राष्ट्रपति महोदया ने रेखा जी को राज्यसभा मे मनोनीत करने की घोषणा कर दी थी। मेरे इस ज्योतिशियात्मक विश्लेषण से भयभीत होकर ही पूना प्रवासी-भृष्ट-धृष्ट-निकृष्ट-ठग ब्लागर ने IBN7,दिल्ली मे कार्यरत अपने चमचा सजातीय ब्लागर से 'ज्योतिष एक मीठा जहर' लेख तथा लखनऊ वाले ब्लागर से ज्योतिष की खिल्ली उड़ाने वाले लेख लिखवाये थे। 
मैंने पूर्व राज्यसभा सदस्य शबाना आज़मी जी को पुरस्कार मिलने पर भी ज्योतिशियात्मक विश्लेषण दिया था और बताए गए समय के भीतर ही उनको पुनः इस वर्ष लिमका पुरस्कार भी मिल गया है। 

पिछले अंक मे जिस FIR की कापी दी थी उन लोगों ने नाहक ही हम लोगों को सताया था उन पैसे वाले दुष्ट प्रवृति के लोगों का हम कोई बिगाड़ नही सिर्फ अपना बचाव करना चाहते थे। परमात्मा और प्रकृति की ओर से वे स्वतः ही दंडित हो गए। कमलेश बाबू के भतीज दामाद 'कुक्कू' को फ़ालिज लगा तो उसके पार्सल बाबू भाई को TB हुई। यह दूसरी बात है कि वे लोग फिर भी बदमाशियों मे लगे हुये हैं।  इसी प्रगर 'ठग' ब्लागर व उसके चमचे-चमचियों को भी कभी न कभी परमात्मा व प्रकृति की मार झेलनी ही पड़ेगी क्योंकी उनकी बदमाशियों का हमारे द्वारा जवाब न देने से वे हमे कमजोर समझ कर लगातार प्रहार किए जा रहे हैं। 

राजनेता श्रीवास्तव साहब भी अहंकार से ग्रसित होने के कारण हमारी 'उदारता' को कमजोरी मान कर चलने के कारण उतपीडनात्मक कारवाई जारी रखे हुये हैं। मुझे नहीं लगता कि ये लोग कभी भी वास्तविकता को समझ सकेंगे। हमारे बहन-बहनोई भी वैसे तो हमे परेशान कराने का दंड -नौ वर्ष तक झांसी मे एक मुकदमे का सामना करके भुगत चुके हैं परंतु वे भी समय-समय पर हमसे ज्योतिषीय मदद लेने के बावजूद ब्लागर्स,राजनेताओं और रिशतेदारों के माध्यम से अब भी हमे परेशान रखना जारी रखे हुये हैं। इन लोगों के प्रति भी उदारता बरतना काफी मंहगा पड़ गया है। इन लोगों को परमात्मा और प्रकृति द्वारा दंडित किए जाने पर भी हमे पीड़ा ही होगी। 

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बुधवार, 31 अक्टूबर 2012

पहचान षड्यंत्रकारी छिपे खिलाड़ियों की



 http://krantiswar.blogspot.in/2012/04/blog-post_19.html

   प्रस्तुत लिंक पर मेरा लेख ---'


बृहस्पतिवार, 19 अप्रैल 2012


रेखा -राजनीति मे आने की सम्भावना 

 



 
और इत्तिफ़ाक से 26 अप्रैल 2012 को राष्ट्रपति महोदया प्रतिभा पाटील जी ने 'रेखा जी' को अन्य दो के साथ 'राज्यसभा' मे मनोनीत कर दिया। मेरा ज्योतिषीय विश्लेषण एक सप्ताह मे सही सिद्ध होने पर अब ज्योतिष को 'मीठा जहर'  बताने वाले कारपोरेट चेनल IBN7 के प्रतिनिधि ने अगले ही दिन 27 अप्रैल को इसकी आलोचना मे पोस्ट दी जिस पर  ये  दो टिप्पणिया उन दोनों की मनोदशा को उजागर करने हेतु पर्याप्त हैं।



कब मैं हिट होउंगी ... और राज्य सभा की सदस्य बनूँगी - आईला





  • आप जल्दी राज्यसभा में पहुंचें,
    मेरी भी शुभकामना है

     एक तीसरे ब्लाग पर पाखंड विरोधी लेख पर मेरी  टिप्पणी को ठुकराने का आग्रह इन महाशय ने पोस्ट लेखिका से किया था और मैंने इनके कुतर्क पर क्या कहा था एक नज़र उस पर भी---



     ज़ाहिर है कि कारपोरेट चेनल्स के दलाल/कारिंदे नहीं चाहते कि जनता को जागरूक किया जाये और ढोंग-पाखंड-आडंबर का पर्दाफाश करके उनको शोषण व उत्पीड़न से बचाया जाये। अतः अपने आकाओं के व्यापारिक हितों के संरक्षणार्थ ऐसे लोग सच्चाई को बर्दाश्त नहीं करते और उसका भोंडा विरोध करते हैं । IBN7 और दैनिक जागरण निरंतर जन-विरोधी समाचार देने के लिए जाने जाते हैं।

    इस कारपोरेट दलाल की मन्त्र्दाता और उसकी शिष्य द्वारा  चार-चार जन्मपत्रियाँ निशुल्क विश्लेषण करवाने के बाद जिस प्रकार इस  गैंग ने 'ज्योतिष' और मेरे ज्ञान पर प्रहार किए उसी कारण 'जनहित मे' नमक ब्लाग को सार्वजनिक रूप से प्रतिबंधित कर रखा है जिसके माध्यम से उपयोगी 'स्तुतियाँ' प्रस्तुत की थीं। यदि ब्लागर्स /फेसबुक साथी इस गैंग  की निंदा करके  उस ब्लाग से सार्वजनिक लाभ उठाना चाहेंगे तो पुनः 'सार्वजनिक' किया जा सकता है। 
    http://janhitme-vijai-mathur.blogspot.in/?zx=a15232c1af410425 

     इसी प्रकार 14-10-2012 को ज्योतिष एक मीठा जहर शीर्षक से जो लेख इन महोदय ने लिखा था उस पर दो पत्रकारों की टिप्पणिया ये हैं---

    1. मुझे लगता है कि हमे उन्ही विषयो पर लिखना या टिपण्णी करनी चाहिये जिसके बारे मे कुछ समझ रखते हो। ज्योतिष सही है या गलत इस संबंध मे आपने किसी ज्योतिषी की राय नही ली कि आखिर आधार क्या है योटिश का। बेहतर होता आप राय लेकर के उसे तर्को के सहारे कातते । रह गई ग्रह नक्षत्रो की बाद तो ज्वार भाटा के आने का कारण चंद्र्मा की स्थिति मे परिवर्तन है। इन गर्हो के मुमवेंट का असर आदमी के मन और दिमाग पर भी पडता है जिससे बहुत सारे काम और काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। क्षमा करे , परन्तु आपका यह लेख सतही है।






      1. मदन भाई साहब आप यहां आए स्वागत है।
        आप बताएं फिर तो सबसे पहले मीडिया हाउस को बंद कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि हम मेडिकल के बारे में बारे में लिखते है, मैं एमबीबीएस तो है नहीं, रेलवे की इंजीनियरिंग सिस्टम पर हम लिखते हैं हमने इंजीनियरिंग भी नहीं की है। सेना को कवर करने जाते हैं किसी ने सैन्य प्रशिक्षण तो लिया नहीं।

        खैर लेख लिखने के पहले हमने ज्योतिष के बारे में पढने के बाद ही लिखा है। अच्छा होता कि आप लेख में जहां खामियां है उस पर मेरा ध्यान केंद्रित करते।
        फिर भी आपने वक्त दिया ब्लाग पर मैं आभारी हूं..
    2. महेंद्र जी, आप सन्दर्भ बिलकुल सही है और शायद हमें इसी तरह के लेख की जरुरत आज के समय में है. लेकिन एक शिकायत जो आप के साथ साथ सभी मीडिया के साथियों से है वो यह की आप कृपया अपने लेख के शीर्षक का ध्यान रखें. ज्योतिष यानि मीठा जहर का अर्थ एक सामान्य मनुष्य को येही आएगा की आप ज्योतिष को को गलत बता रहे हैं. पर आपने इसने नाम पे जो बुराइयाँ उजागर की हैं वो अति सुन्दर है. शेष अति सुन्दर...
    3. महेंद्र जी, आप सन्दर्भ बिलकुल सही है और शायद हमें इसी तरह के लेख की जरुरत आज के समय में है. लेकिन एक शिकायत जो आप के साथ साथ सभी मीडिया के साथियों से है वो यह की आप कृपया अपने लेख के शीर्षक का ध्यान रखें. ज्योतिष यानि मीठा जहर का अर्थ एक सामान्य मनुष्य को येही आएगा की आप ज्योतिष को को गलत बता रहे हैं. पर आपने इसने नाम पे जो बुराइयाँ उजागर की हैं वो अति सुन्दर है. शेष अति सुन्दर...








      1. आप यहां तक आए, यही काफी है।
        बाकी आप मीडिया के बारे में कितना जानते हैं, मुझे नहीं पता।

        ज्योतिष को मीठा जहर बताने पर जहां चापलूसों की फौज ने उन दोनों का पुरजोर समर्थन किया वहीं 'बिहार मीडिया'के संचालक और एडवोकेट साहब ने विमत व्यक्त किया जिस पर इस गरूरी ब्लागर ने -''मदन भाई साहब आप यहां आए स्वागत है।
        आप बताएं फिर तो सबसे पहले मीडिया हाउस को बंद कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि हम मेडिकल के बारे में बारे में लिखते है, मैं एमबीबीएस तो है नहीं, रेलवे की इंजीनियरिंग सिस्टम पर हम लिखते हैं हमने इंजीनियरिंग भी नहीं की है। सेना को कवर करने जाते हैं किसी ने सैन्य प्रशिक्षण तो लिया नहीं।''
        यह लिख कर ज़ाहिर भी कर दिया विषय-विशेष के ज्ञान के बगैर उसकी आलोचना करना उनके जाब का हिस्सा है।

        दूसरे पत्रकार जो 'सहारा समय' चेनल मे कार्य कर चुकने के बाद अब रायपुर,छत्तीसगढ़ मे एक  दैनिक अखबार बतौर सम्पादक निकाल रहे हैं  और उनका समर्थन भी कर रहे हैं,सिर्फ 'शीर्षक' पर आपत्ति थी उनको ,तो इस कारपोरेट दलाल ने यह कह कर लताड़ ही दिया-''



        1. आप यहां तक आए, यही काफी है।
          बाकी आप मीडिया के बारे में कितना जानते हैं, मुझे नहीं पता।''
          कितने मज़े की बात है कि,जिसे कुछ नहीं पता होता है वह कितनी अल्हड्ता से ब्लाग सुविधा का दुरुपयोग करता है। क्यों करता है?जानें इस चित्र से ---

          IBN7के प्रतिनिधि (ज्योतिष को मीठा जहर लिखने वाले )और उनकी मन्त्र्दाता,विमान नगर,पूना मे पाँच घंटों के प्रवास मे   गुफ्तगू करते  हुये

          पर्यावरण को शुद्ध रखना और ग्रह नक्षत्रों का शमन करना ज्योतिष विज्ञान सिखाता है.हम ज्योतिष के वैज्ञानिक नियमों का पालन कर के अनूठी दुनिया  का अधिक से अधिक लुत्फ़ उठा सकते हैं.आवश्यकता है सच को सच स्वीकार करने की और अपनी इस धरती को तीन लोक से न्यारी बनाने की. 
          http://krantiswar.blogspot.in/2012/10/blog-post_27.html

          चार-चार जन्म्पत्रियों का विश्लेषण पूना के ब्लागर व उनकी पटना की शिष्य ने निशुल्क प्राप्त करने के बाद जो ज्योतिष विरोधी मुहिम चला रखी है वह कितना वाजिब है?

          इस सम्बंध मे पिछले अंक मे  विस्तृत वर्णन दिया जा चुका है---
         इस पोस्ट पर अपने विचार (टिप्पणी) देने के लिये कृपया यहाँ क्लिक करे।
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    शनिवार, 20 अक्टूबर 2012

    मीठा जहर कौन?

    पहले कारपोरेट जगत के खिलाड़ी ब्लागर साहब की कुछ  सुर्खियां देखें---

    Saturday, 13 October 2012


    ज्योतिष यानि मीठा जहर ... 


    दरअसल कुछ तथाकथित अनाड़ियों ने इस ज्योतिष विज्ञान की ऐसी तैसी कर दी और इसे एक व्यवसाय बना डाला है।

     मेरी व्यक्तिगत राय में तो ज्योतिष और त्योतिषी दोनों मीठे जहर के समान हैं, जिसके भी जीवन में ये घुल जाते हैं, उसे कहीं का नहीं छोड़ते। ज्योतिष भय प्रधान है जो मुख्य कर्म में हमेशा बाधक बनता है। 


    यहां आपको ये भी बता दूं कि नोबेल पुरस्कार विजेता डा. वेंकटरमन रामा कृष्णन ने पूरे ज्योतिष शास्त्र को ही फर्जी बता दिया है।  

    पूजा,प्रार्थना को ज्योतिषी से जोड़कर नहीं देखना है,क्योंकि प्रार्थना यानि पूजा प्रभु के आगे याचक की तरह खड़ा होना है .... होनी,अनहोनी जो भी है-वह इश्वर के हाथ में है-जिसके लिए हम दुआ कर सकते हैं मन के सुकून के लिए,पर मूल्य के हिसाब से उसमें रद्दो बदल हास्यास्पद है . ऐसा होना होता तो गुरु वशिष्ठ राम को वन नहीं जाने देते , अपनी विद्या से रावण को छू कर देते .
    आलेख बहुत ही बढ़िया है










    1. जी बिल्कुल, इसी बात का जिक्र मैने भी करने की कोशिश की है।
      मुझे लगता है कि ईश्वर की सत्ता को चुनौती देने वाला अभी धरती पर कोई नहीं होगा। विधि का विधान बदलना संभव नहीं है।
    2. वो तो कभी नहीं होगा ....


      अब देखिये  एक फेसबुक फ्रेंड के  15-10-2012 का मेसेज और उनको जवाब  ---

      agar aap uske liye kuchh charge karte hain to i'm also ready for dat

      ---'साहब फीस के चार्ज की बात नहीं थी । रश्मी प्रभा और सोनिया बहुखंडी ने चार-चार कुंडलियाँ निशुल्क बनवाई थीं लेकिन अब वे दोनों और एक कुंडली निशुल्क  बनवाने वाले अरुण प्रकाश मिश्रा फेसबुक व ब्लाग्स मे मेरे तथा ज्योतिष के ज्ञान के खिलाफ लेख व टिप्पणियाँ लिख रहे हैं। IBN7 के महेंद्र श्रीवास्तव उनकी वकालत मे 'ज्योतिष मीठा जहर' जैसे लेख ब्लाग मे डाल रहे हैं। इसी कारण आपका व एक और शर्मा जी का काम रोक दिया था। यदि काम करवाने के बाद आप उन लोगों की तरह मेरी मुखालफत न करने का आश्वासन दें एवं उन चारों की निंदा का मेसेज दें तो उसके बाद काम शुरू कर सकता हूँ। यह झगड़ा न खड़ा हुआ होता तो अब तक आप समाधान पा चुके होते।

       Allah ko hazir wa nazir maan kar asam khata hu'n ki mai is tarah ka koi kaam nahi karunga (Ghaddaari waala)

      ab khush? Ehsan Faramoshi hamaare blood me nahi hai sir
      wink

      • mai un charo ki tarah ehsaan faramosh nahi hu na hi meri aankho me suwar ka baal hai jo mai apne shubhchintak ke hi khilaaaf zaher uglu'n ....... aap befikr rahe'n waise bhi mai blog ki duniya se door hu us din aise hi check kar lia tyha smile
      • aapka blog
      • is it ok sir? ab to hjo jayega na mera kaam?

         OK,please wait for 3 days

         ji will be waiting

        10 अक्तूबर 2012 को प्रकाशित मेरे  लेख

        संसार का मूलाधार है---त्रैतवाद 

          का प्रतिवाद है 13 अक्तूबर का कारपोरेट दलाल का  उपरोक्त वर्णित लेख ठीक उसी प्रकार जैसे कि19 अप्रैल 2012 के लेख मे मैंने 'रेखा के राजनीति मे आने की संभावना' लिखा और वह 26 अप्रैल को राज्यसभा मे मनोनीत हो गई तब 27 अप्रैल 2012 को इन महान विद्वान साहब ने अपने लेख मे उसकी खिल्ली उड़ाई। साँच को आंच कहाँ -प्रत्यक्ष देखिये---


        बावजूद इस चेतावनी के उक्त ब्लागर ने अपनी हेंकड़ी जारी रखते हुये दूसरे ब्लागो पर टिप्पणियों मे भी मेरे 'रेखा' वाले ज्योतिषीय विश्लेषण पर हमला जारी रखा जैसा कि नीचे स्पष्ट है और यशवन्त को भी ई-मेल मे 'गनीमत' शब्द लिख कर ठेस पहुंचाई जबकि वह उक्त ब्लागर का दिया टास्क अपनी भूख-प्यास छोड़ कर करता रहा है। अतः इसी 'गनीमत'पर उसने भी उक्त ब्लागर की हकीकत उजागर कर दी है। 


        (रश्मि प्रभा...Apr 27, 2012 07:21 AM

        कब मैं हिट होउंगी ... और राज्य सभा की सदस्य बनूँगी - आईला



        आप जल्दी राज्यसभा में पहुंचें,
        मेरी भी शुभकामना है)


        *=एक दूसरे ब्लाग पर उक्त ब्लागर की टिप्पणी इसलिए उद्धृत की है कि सभी को पता चल जाये कि उक्त ब्लागर मेरे विश्लेषण को किस कदर गलत साबित करने पर उतारू रहा कि विश्लेषण एक सप्ताह मे ही सही सिद्ध होने पर बौखलाहट मे अपनी तुलना 'रेखा' से करने की ज़रूरत पड़ गई। कौन सी  पार्टी आत्मघाती कदम (अपनी पार्टी को तहस-नहस करने और अपनी सरकार की छीछालेदार करवाना) उठाना चाहेगी जो उक्त ब्लागर को  राज्य-सभा सदस्य बनवाएगी ? क्योंकि उक्त ब्लागर तो अपनी ही संतानों का भी सगा नहीं है जो 'राष्ट्र और समाज' की सेवा क्या खाकर करेगा?-(आत्म-भंजक पार्टी से मै भी उक्त ब्लागर को राज्य सभा मे भिजवाने की सिफ़ारिश करता हूँ )- 


        उक्त ब्लागर की इच्छा पर गलत सलाह न देने के कारण उक्त ब्लागर ने मेरे पुत्र के साथ भी झूठ-छल का प्रयोग किया ,जिस कारण-शबाना आज़मी,रेखा और प्रस्तुत विश्लेषण सार्वजनिक रूप से देने पड़े हैं। 


        उक्त ब्लागर ने मेरे अतिरिक्त बोकारो की एक ज्योतिषी से भी निशुल्क परामर्श लिया था और उसे भी नहीं माना था।चूंकि वह सब ब्यौरा मेरे पास भी उपलब्ध है  अतः अब 'जन्मकुंडलिया गलत होती हैं' सरीखे वाक्यांश अपने पिटठू से लिखवाये हैं। क्योंकि शबाना जी ,रेखा जी एवं X-Y के दिये विश्लेषणों से स्पष्ट है कि जन्मपत्र द्वारा एक सटीक आंकलन प्रस्तुत किया जा सकता है और उन ब्लागर को भय है कि यदि उनकी पोल-पट्टी सबके सामने आ गई तो उनके छल-व्यापार -ठगी का धंधा चौपट हो जाएगा। अपनी धनाढ्यता के रौब मे मुझे दबाव डाल कर गलत विश्लेषण न प्राप्त कर पाने के कारण अपने चाटुकार से ज्योतिष-विरोधी लेख लिखवाने शुरू करवाए हैं। 



        http://krantiswar.blogspot.in/2012/10/blog-post_10.html


        आचार्य डॉ सोमदेव शास्त्री,संपादक निष्काम परिवर्तन पत्रिका


        यह लेख आर्यसमाज -कमलनगर,आगरा मे डॉ सोमदेव शास्त्री जी द्वारा दिये प्रवचनों के एक अंश का सार मात्र है । इस लेख की खास-खास बातें ये हैं---

        1- इस संसार ,इस सृष्टि का नियंता और संचालक परम पिता परमात्मा है। परमात्मा के संबंध मे हमारे देश मे अनेकों मत और धारणाये प्रचलित हैं। इनमे से प्रमुख इस प्रकार हैं---

        अद्वैतवादी- सिर्फ परमात्मा को मानते हैं और प्रकृति तथा आत्मा को उसका अंश मानते हैं जो कि गलत तथ्य है क्योंकि यदि आत्मा,परमात्मा का ही अंश होता तो बुरे कर्म नहीं करता और प्रकृति भी चेतन होती जड़ नही।

        द्वैतवादी -परमात्मा (चेतन)और प्रकृति (जड़)तो मानते हैं परंतु ये भी आत्मा को परमात्मा का ही अंश मानने की भूल करते हैं;इसलिए ये भी मनुष्य को भटका देते हैं।

        त्रैतवादी-परमात्मा,आत्मा और प्रकृति तीनों का स्वतंत्र अस्तित्व मानना यही 'त्रैतवाद 'है और 'वेदों' मे इसी का वर्णन है। अन्य किसी तथ्य का नहीं।

        2-वेद आदि ग्रंथ हैं---प्रारम्भ मे ये श्रुति व स्मृति पर आधारित थे अब ग्रंथाकार उपलब्ध हैं। अब से लगभग दो अरब वर्ष पूर्व जब हमारी यह पृथ्वी 'सूर्य' से अलग हुई तो यह भी आग का एक गोला ही थी। धीरे-धीरे करोड़ों वर्षों मे यह पृथ्वी ठंडी हुई और गैसों के मिलने के प्रभाव से यहाँ वर्षा हुई तब जाकर 'जल'(H-2 O)की उत्पत्ति हुई। पृथ्वी के उस भाग मे जो आज 'अफ्रीका' कहलाता है ,उस भाग मे भी जो 'मध्य एशिया' और 'यूरोप'के समीप है तथा तीसरे उस स्थान पर जो 'त्रिवृष्टि'(तिब्बत)कहलाता है परमात्मा ने 'युवा-पुरुष' व 'युवा-स्त्री' रूपी मनुष्यों की उत्पत्ति की और आज की यह सम्पूर्ण मानवता उन्ही तीनों  पर उत्पन्न मनुष्यों की संतति हैं।

        3- वेदों के अनुसार ---(1 )परमात्मा,(2 )आत्मा और (3 )प्रकृति इन तीन तत्वों पर आधारित इस संसार मे प्रकृति 'जड़' है और स्वयं कुछ नहीं कर सकती जो तीन तत्वों के मेल से बनी है---(1 )सत्व,(2 )रज और (3 )तम। ये तीनों जब 'सम' अवस्था मे होते हैं तो कुछ नहीं होता है और वह 'प्रलय' के बाद की अवस्था होती है। आत्मा -सत्य है और अमर है यह अनादि और अनंत है। 'परमात्मा' ='सत्य' और 'चित्त'के अतिरिक्त 'आनंदमय' भी है---सर्व शक्तिमान है,सर्वज्ञ है और अपने गुण तथा स्वभाव के कारण आत्माओं के लिए प्रकृति से 'सृष्टि' करता है ,उसका पालन करता है तथा उसका संहार कर प्रलय की स्थिति ला देता है,पुनः फिर सृष्टि करता है और आत्माओं को पुनः प्रकृति के 'संयोजन'से 'संसार' मे भेज देता है=G(जेनरेट)+O(आपरेट)+D(डेसट्राय)। ये सब कार्य वह खुद ही करता (खुदा ) है।

        4- 'सृष्टि' के नित्य ही 'संसर्ग' करने अर्थात 'गतिमान' रहने के कारण ही इसे 'संसार' कहा गया है। 'आत्मा' ,'परमात्मा' का अंश नहीं है उसका स्वतंत्र अस्तित्व है और वह भी 'प्रकृति' तथा 'परमात्मा' की भांति ही कभी भी 'नष्ट नहीं होता है'। विभिन्न कालों मे विभिन्न रूपों मे (योनियों मे )'आत्मा' आता-जाता रहता है और ऐसा उसके 'कर्मफल' के परिणामस्वरूप होता है। 'मनुष्य'=जो मनन कर सकता है उसे मनुष्य कहते हैं। 'परमात्मा' ने 'मानव जीवात्मा' को इस संसार मे 'कार्य-क्षेत्र' मे स्वतन्त्रता दी है अर्थात वह जैसे चाहे कार्य करे परंतु परिणाम परमात्मा उसके कार्यों के अनुसार ही देता है अन्य योनियों मे आत्मा 'कर्मों के फल भोगने' हेतु ही जाता है। यह उसी प्रकार है जैसे 'परीक्षार्थी' परीक्षा भवन मे कुछ भी लिखने को स्वतंत्र है परंतु परिणाम उसके लिखे अनुसार ही मिलता है जिस पर परीक्षार्थी का नियंत्रण नहीं होता। इस भौतिक शरीर के साथ आत्मा को सूक्ष्म शरीर घेरे रहता है और भौतिक शरीर की मृत्यु के बाद भी वह 'सूक्ष्म शरीर' आत्मा के साथ ही चला जाता है। मनुष्य ने अछे या बुरे जो भी 'कर्म' किए होते हैं वे सभी 'गुप्त' रूप से 'सूक्ष्म शरीर' के 'चित्त' मे अंकित रहते हैं और उन्ही के अनुरूप 'परमात्मा' आगामी फल प्रदान करता है---इसी को 'चित्रगुप्त' कहा जाता है।

        5- परमात्मा अच्छी के अच्छे व बुरे के बुरे फल प्रदान करता है। इस जन्म के बुरे कर्म देख कर परमात्मा पूर्व जन्म के अच्छे फल नहीं रोकता;परंतु इस जन्म के बुरे कर्म उस मनुष्य के आगामी जीवन का 'प्रारब्ध' निर्धारित कर देते हैं। परंतु अज्ञानी मनुष्य समझता है कि परमात्मा बुरे का साथी है ,या तो वह भी बुरे कार्यों मे लीन होकर अपना आगामी प्रारब्ध बिगाड़ लेता है या व्यर्थ ही परमात्मा को कोसता   रहता है। परंतु बुद्धिमान मनुष्य अब्दुर्रहीम खानखाना की इस उक्ति पर चलता है---

        "रहिमन चुप हुवे  बैठिए,देख दिनन के फेर। 
        जब नीके दिन आईहैं,बनात न लागि है-बेर। । "

        6- जो बुद्धिहीन मनुष्य यह समझते हैं कि अच्छा या बुरा सब परमात्मा की मर्ज़ी से होता है ,वे अपनी गलती को छिपाने हेतु ही ऐसा कहते हैं। आत्मा के साथ परमात्मा का भी वास रहता है क्योंकि वह सर्वव्यापक है। परंतु आत्मा -परमात्मा का अंश नहीं है जैसा कु भ्रम लोग फैला देते हैं। जल का परमाणु अलग करेंगे तो उसमे जल के ,अग्नि का अलग करेंगे तो उसमे अग्नि के गुण मिलेंगे। जल की एक बूंद भी शीतल होगी तथा अग्नि की एक चिंगारी भी दग्ध करने मे सक्षम होगी। यदि आत्मा,परमात्मा का ही अंश होता तो वह भी सचिदानंद अर्थात सत +चित्त +आनंद होता। जबकि आत्मा सत और चित्त तो है पर आनंद युक्त नहीं है और इस आनंद की प्राप्ति के लिए ही उसे मानव शरीर से परमात्मा का ध्यान करना होता है। जो मनुष्य संसार के इस त्रैतवादी रहस्य को समझ कर कर्म करते हैं वे इस संसार मे भी आनंद उठाते हैं और आगामी जन्मों का भी प्रारब्ध 'आनंदमय' बना लेते हैं। आनंद परमात्मा के सान्निध्य मे है ---सांसारिक सुखों मे नहीं। संसार का मूलाधार है त्रैतवाद अर्थात परमात्मा,प्रकृति और आत्मा का स्वतंत्र अस्तित्व स्वीकार करना तथा तदनुरूप कर्म-व्यवहार करना।   


      अब देखिये मूल रूप से 04-12-2010 को प्रकाशित और 21 - 09 -2012 को पुनर्प्रकिशित लेख की ये पंक्तियाँ---

    "अब सवाल उस संदेह का है जो विद्व जन व्यक्त करते हैं ,उसके लिए वे स्वंय ज़िम्मेदार हैं कि वे अज्ञानी और ठग व लुटेरों क़े पास जाते ही क्यों हैं ? क्यों नहीं वे शुद्ध -वैज्ञानिक आधार पर चलने वाले ज्योत्षी से सम्पर्क करते? याद रखें ज्योतिष -कर्मकांड नहीं है,अतः कर्मकांडी से ज्योतिष संबंधी सलाह लेते ही क्यों है ? जो स्वंय भटकते हैं ,उन्हें ज्योतिष -विज्ञान की आलोचना करने का किसी भी प्रकार हक नहीं है. ज्योतिष भाग्य पर नहीं कर्म और केवल कर्म पर ही आधारित शास्त्र है. 

    http://krantiswar.blogspot.in/2012/09/blog-post_21.html

    उक्त13-10-2012 वाले  पोस्ट लेखक और टिप्पणी दाता दोनों ही ढोंगियों,पाखंडियों,व्यापारियों,उद्योगपतियों एवं कारपोरेट घरानों के दलाल प्रतीत होते हैं उनका उद्देश्य 'वास्तविक तथ्यों' को लुप्त करके अनर्गल एवं तथ्यहीन बातों द्वारा ग्रेशम के अर्थशास्त्र के सिद्धान्त कि,"खराब मुद्रा अच्छी मुद्रा को चलन से बाहर कर देती है"के आधार पर वैज्ञानिक आधार पर ज्योतिष-विश्लेषण करने वालों को नाहक-झूठा बदनाम करके पृष्ठ-भूमि मे धकेलना है जिससे आम लोग फ़रेबियों के चंगुल मे ही फंस कर लुटते रहें। अतः वे दोनों जन-विरोधी ब्लागर्स - स्वतः  ही मीठा जहर उगलने वाले ब्लागर्स हैं।अब ये छली ब्लागर्स सुश्री ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए कार्पोरेटी कपट का सहारा लेंगे ताकि मेरे विश्लेषण को गलत सिद्ध कर सकें। 

    ममता बनर्जी के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाएं ? 

    http://krantiswar.blogspot.in/2012/10/blog-post_19.html 


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    सोमवार, 31 अक्टूबर 2011

    आगरा/1990-91(भाग-3 )

    1990-91 का काल कई अलग-अलग क्षेत्रों मे अलग-अलग किस्म की हलचलो का काल रहा। जहां नौकरी मे सेठ जी का विवादस्पद केस ससम्मान सुलझ गया। राजनीति मे अचानक नई ज़िम्मेदारी ओढनी पड़ी।'सप्तदिवा-साप्ताहिक' मे मै सहायक संपादक था और उसकी सहकारी समिति मे  शेयर होल्डर भी परंतु प्रधान संपादक जो वस्तुतः उसके मालिक ही थे ने अपने फासिस्ट फाइनेंसर के दबाव मे मेरे लेखों मे संशोधन कराने चाहे जो न करके मैंने लेख वापिस मांग लिए उन्हें अब 'क्रांतिस्वर' पर क्रमशः प्रकाशित कर रहा हूँ।  भाकपा ,आगरा के कोशाध्यक्ष डॉ राम गोपाल सिंह चौहान जो बीमारी मे घर से कार्य-निष्पादन कर रहे थे उनकी तकलीफ बढ़ गई और उन्होने जिला मंत्री रमेश मिश्रा जी के समक्ष प्रस्ताव रखा की उनका चार्ज मुझे दिला दे। हालांकि मै जिला काउंसिल का सदस्य तो था परंतु कार्यकारिणी मे नहीं था। पहले से मौजूद पुराने और तपे-तपाये नेताओं की बजाए  मेरे जैसे चार-पाँच वर्ष पुराने एक छोटे कार्यकर्ता को अचानक एक इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी देने को मिश्रा जी सहर्ष तैयार हो गए और सीधे मेरे घर आकर मुझसे चल कर चौहान साहब को रिलीव करने को कहा। जब मैंने इंकार कर दिया तो उन्होने बाबूजी की ओर मुखातिब होकर कहा आप कह दीजिये। बाबूजी ने मिश्रा जी के जवाब मे मुझ से कहा कि जब सेक्रेटरी साहब का आदेश है और वह खुद चल कर आए हैं तो' तुम अवहेलना' कैसे कर सकते हो?मेरे सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उसी वक्त मिश्रा जी की मोपेड़ पर उनके साथ डॉ चौहान के घर पहुंचे। मै वैसे उनका हाल-चाल पूछने जाता ही रहता था। परंतु मिश्रा जी और मेरे द्वारा उनका सुझाव सिरोधार्य करने पर वह बेहद खुश हो गए। उन्होने अपनी पुत्री डॉ रेखा पतसरिया से पार्टी अकाउंट्स और कैश मुझे दिलवा दिया। उन्होने यह भी आश्वासन दिया कि कभी भी उनका परामर्श मुझे चाहिए तो वह जरूर देंगे,बाकी अकाउंट्स का आदमी होने के कारण कार्य करना मेरे लिए आसान रहेगा, यह भी उन्होने जोड़ दिया। मिश्रा जी ही मुझे मेरे घर पर छोड़ गए। मैंने मिश्रा जी से शर्त कर ली थी कि कोई भी पेमेंट मै उनके(जिला मंत्री)के हस्ताक्षर के बगैर नहीं करूंगा। पहले तो मिश्रा जी ने कहा था कि उन्होने कभी किसी पेमेंट पर दस्तखत नहीं किए है सब डॉ चौहान खुद करते रहे हैं। परंतु बाद मे उन्होने मेरा अनुरोध स्वीकार कर लिया था।


    डॉ रामगोपाल सिंह चौहान जब शाहजहाँपुर मे पढ़ते थे तो का .महादेव नारायण टंडन (जो आगरा मे भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के संस्थापक माने जाते थे और उन्हीं के नाम पर अब नया पार्टी कार्यालय-का .महादेव नारायण टंडन भवन कहलाता है) उन्हें अपने साथ आगरा ले आए थे और छात्र राजनीति मे सक्रिय कर दिया था उसके बाद आगरा कालेज मे प्रो .रहते हुये वह पार्टी के जिला मंत्री फिर उस समय लंबे वक्त से कोशाध्यक्ष थे। आगरा कालेज की स्पोर्ट्स क्लब मे भी वह सक्रिय थे। आगरा कालेज का स्टाफ बंगला-6,हंटले हाउस सिर्फ डॉ चौहान का निवास ही नहीं था वरन पार्टी की बड़ी,महत्वपूर्ण बैठकें वहीं होती थी। रिटायरमेंट के बाद अपने हिन्दी विभाग मे ही कार्यरत प्रो.डॉ रेखा के नाम उस बंगले को करवा लिया था। डॉ रेखा ईपटा और चौहान साहब की दूसरी नाट्ट्य-संस्था मे भी सक्रिय थीं जिसमे उनके पति विनय पतसरिया, एडवोकेट भी सक्रिय थे।

    मैंने डॉ चौहान से प्राप्त अकाउंट्स चेक किया तो पाया कि उनका अपना लगभग रु 2500/-पार्टी पर खर्च हो चुका था क्योंकि वह अपने सेविंग्स अकाउंट के माध्यम से आपरेट कर रहे थे उनके ध्यान मे नहीं आया था। मैंने मिश्रा जी को रिपोर्ट की तो उन्होने पार्टी के आडीटर हरीश आहूजा ,एडवोकेट साहब से आडिट करवाकर चौहान साहब को कैश लौटा देने का आदेश कर दिया। जब डॉ चौहान को रु 2500/-लौटाने मै उनके घर गया तो उन्होने कैश अपनी बेटी डॉ रेखा को सौंपते हुये कहा कि इसी ईमानदारी की वजह से मैंने इसे अपना उत्तराधिकारी चुना था वरना दूसरा कामरेड भी लौटाता यह जरूरी नहीं था,पार्टी फंड की हिफाजत यही कामरेड कर सकता था । उन्हें इलाज पर उस समय खर्च को देखते हुये डूबा धन मिलने से राहत हुई।

    क्रमशः........ 

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