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शुक्रवार, 3 मई 2013

इसे शीर्षक क्या दिया जाये ?---विजय राजबली माथुर


गत वर्ष 27 अगस्त 2012  को यहाँ लखनऊ में  एक ब्लागर सम्मेलन हुआ था जिसमें शामिल होने का हमारा इरादा नहीं था। किन्तु 22 अगस्त की रात्रि लगभग 08-30 बजे फोन पर एक पत्रिका के प्रबंध संपादक महोदय ने सूचित किया कि पूना से उनके  संपादक (जिसने अपने IBN7 के कारिंदा ब्लागर से 'ज्योतिष एक मीठा जहर'लिखवा कर मेरे ज्योतिषीय विवेचन का मखौल उड़ाया था) का आगमन नहीं हो रहा है और मुझ पर अपने ही शहर मे हो रहे उनके कार्यक्रम मे भाग लेने का दबाव बनाया। 26 अगस्त को फोन पर अब डायचे वेले के योद्धा साहब ने भी ज़रूर शामिल होने का दबाव बनाया जिनके कार्यक्रम मे 27 अगस्त 2011 को भाग ले चुके थे अतः शामिल भी हुये थे और कार्यक्रम पर एक पोस्ट भी दिया था। ( लेकिन बाद में पूना प्रवासी ब्लागर के उकसावे पर उन्होने भी ज्योतिष विरोधी लेख लिख कर मुझ पर अभद्र टिप्पणियाँ कर डालीं।) कार्यक्रम के बाद उक्त पत्रिका के प्रधान संपादक पर हो रहे हमलों के दौरान हमलावर ब्लागर और उसके पूना प्रवासी आका के विरोध मे भी एक पोस्ट दिया था जिसे वापिस लेने का दबाव प्रबंध संपादक द्वारा डाला गया था।

कानपुर,बाराबंकी और लखनऊ के वकील और बैंक कर्मी फेसबुक वालों एवं ब्लागर्स ने अपने मित्र द्वारा मुझे निम्नाकित मेसेज  भिजवाया था---
  • September 14, 2012
  • Advocat Ganiou Adechi

    From Ganiou ADECHI
    03 BP 1375
    Cotonou,
    Benin Republic
    Tel: +229 99 47 94 50,
    Attention:Vijai RajBali Mathur
    Let me start by introducing myself to you, I am Ganiou ADECHI ,a Solicitor and the Personal Attorney to Late Mr. Michael Mathur, a national of your country, who used to work as the Director of Societe Nationale pour la Promotion Agricole(SONAPRA), the major national cotton production company in Benin Republic.I saw your contact during my private search in the internet and I want to believe that you will be very honest, committed and capable of assisting in this business venture.
    On the 27th of May 2007, my client, His wife and their three Children were involved in a car accident Along express-high way.Unfortunately,they all lost their lives. Since then I have made several enquiries to your Embassy to locate any of my client's extended relatives, this has also proved unsuccessful.
    After these several unsuccessful attempts, I decided to trace his relatives over the Internet to locate any member of his family but to no avail, hence, I contacted you to assist in repatriating the money and property left behind by my client before they get confiscated ordeclared unserviceable by the Bank here. These huge deposits were lodged particularly with the BANQUE ATLANTIQUE BENIN (BAB), where the Deceased had an account valued at about $9.700.000.00 (Nine Million Seven Hundred Thousand United States Dollars).
    The Bank has issued me a notice to provide the next of kin or have the account confiscated. Since I have been unsuccessful in Locating the relatives for over Three years now, I seek your consent to present you as the next of kin of the deceased since you have the same last name with him so that the proceeds of this account valued about us$9.7million dollars can be paid to you and then the sharing ratio should be 50% for me and 50% for you, I have all the necessary legal documents that can be used to back up with our claim we will make with the Bank.
    All I require is your honest cooperation to enable us seeing this Deal through and I guarantee that this will be executed under a legitimate arrangement that will protect you from any breach of the law.And the way we are going to achieve this. is as follows, I need the following information from you:
    Your Full Name...........................................................................
    Your Email Address.......................................................................
    Your Age..............................................................................
    Your Country..........................................................................
    Your Occupation........................................................................
    Your Position.........................................................................
    Your Telephone Number.................................................................
    (For Communication Purpose)
    If this proposal satisfies you, please reach me either bymail;advocatganiouadechi@yahoo.com, or phone; +229 99 47 94 50, formore clarification about how this will be done.
    I await your reply as soon as possible.
    Best Regards
    Ganiou ADECHI
इस बाबत माथुर सभा, लखनऊ के एक पदाधिकारी की यह राय मिली थी कि यह 'फ़्राड' है और इसके विरुद्ध FIR करा देनी चाहिए। पर्दे के पीछे के षड्यंत्रकारियों की पहचान होने और उनसे निबटने के अन्य मार्ग प्रशस्त होने के कारण मैंने नाहक FIR कराने और वकीलों के जाल-जंजाल मे न उलझने का निर्णय लिया ।

अब इन षड्यंत्रकारियों ने 'तांत्रिक'प्रक्रियाओं का सहारा लेकर हमारे विरुद्ध अभियान तो चला ही रखा है साथ ही साथ मेरे लेख -विश्लेषण आदि पर भी कटाक्ष कर रहे हैं। वे यह नहीं सोच रहे कि मैं उन लोगों के प्रलोभन में क्यों नहीं फंस सका?जब हमने अपने पिताजी के सहपाठी और रूम मेट रहे पूर्व विधायक  कामरेड भीखा लाल जी के समय 'दरियाबाद' में अपने कानूनी हक को प्राप्त करने का कोई प्रयास नहीं किया और  पूर्व विधायक कामरेड रामचन्द्र बख्श सिंह जी के समय भी कोई प्रयत्न नहीं किया एवं उक्त पत्रिका के प्रबंध संपादक से स्पष्ट कह दिया कि  हम जैसे हैं ठीक हैं और  जब उनके  अयाचित सहयोग देने के प्रस्ताव अस्वीकार कर दिये तब यह षड्यंत्रकारी मेसेज देकर वे सब मुझे कैसे गुमराह कर सकते थे?

एक बार फिर इस ग्रुप के लोगों ने किसी के द्वारा ई-मेल (http://krantiswar.blogspot.in/2013/04/blog-post_30.html )भिजवाकर उलझाना चाहा जिसका पर्दाफाश करने पर प्रेषक महोदय ने बिफर कर एक और निन्दात्मक ई-मेल भेज दिया है। 

पढे-लिखे समझदार लोग 'तर्क' और 'बुद्धि' का सहारा न लेकर जब ओछे हथकंडे अपनाते हैं तो लगता है कि उनका 'मस्तिष्क' वस्तुतः उनके पैर के तलवों में निवास करता है।

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शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

बात की बात कि बेबात की फिक्र ---विजय राजबली माथुर

 पिछली पोस्ट  मुझे एक ब्लागर साहब द्वारा ब्लाग से हट कर फेसबुक पर सक्रिय होने की बात पर लिखनी पड़ी थी तो यह पोस्ट भी उनके एक पोस्ट मे -नीचे लिखे इनवर्टेड कामा वाले वाक्यांश पर ही आधारित है।
" एक तो वैसे ही एक पोस्ट लिखने में घंटों ख़राब हो जाते हैं, फिर पढने वाले भी जब ज्यादा नहीं मिलते तो लो कॉस्ट बेनेफिट रेशो देखकर दम ख़म ही ख़त्म सा हो जाता है।"वाक्यांश से सिद्ध होता है कि जो लोग ब्लाग लेखन वाह-वाही बटोरने मात्र के लिए करते हैं उनके लिए फेसबुक पीड़ादायक है। ठीक भी है-'जाकी रही भावना जैसी,प्रभू तिन्ह मूरत तीन तैसी।'
फेसबुक और फेसबुक ग्रुप्स तो ब्लाग-पोस्ट पर विजिट बढ़ाने मे खासे कारगर सिद्ध हुये हैं बशर्ते कि ब्लाग पोस्ट जनहित मे हो तो।
Unlike · · Promote ·
 वाहवाही के ख़्वाहिशमंद लोग वाहवाही न मिलने पर हताश व निराश हो सकते हैं परंतु यदि उद्देश्य वाहवाही न बटोरना होकर केवल जनहित हो तो कहीं भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। स्वार्थी और चापलूस लोगों की राय पर किसी लेखक को क्यों निर्भर करना चाहिए?ब्लाग और फेसबुक की वरीयता या श्रेष्ठता का झगड़ा ही क्यों?जिस प्रकार 'चाकू-knife'एक डॉ के हाथ मे सर्जक है लेकिन एक डाकू के हाथ मे जानलेवा तो दोष 'चाकू' का नहीं उसके प्रयोग कर्ता का होगा ठीक उसी प्रकार ब्लाग/फेसबुक के उपयोगकर्ता की मानसिकता पर सदुपयोग/दुरुपयोग निर्भर है न कि किसी की श्रेष्ठता और किसी की निकृष्टता पर। लेखक की शब्दावली नहीं उसके चरित्र पर ध्यान दें।

Unlike · · · · Promote

  • Salahuddeen Ansari vijay rajbali ji, aapney bilkul theek farmaya. Upkarno ko dosh detey hein aur nirantar unka galat prayog kar sahi parinamo ki asha kartey hein.


  • Bechu Giri mathur sahab , aapne bilkul thik likha hai lisi bhi masale me dosh sadhan ka nahi sadhak ka hota hai ki vah kishke liye tatha kiski keemat par sadhan ka estemal kar raha hai.
    14 minutes ago · Unlike · 1



    दोस्तों
    मेरे वर्ड प्रेस ब्लॉग पर एक अश्लील पोस्ट मेरी नज़र मे आई है। जो मेरी I D से प्रकाशित है।

    इस ब्लोग पर अधिकतर पोस्ट्स मैं ई मेल के द्वारा प्रकाशित करता हूँ जिसका कोड मेल की कोंटेक्ट लिस्ट में भी एड है।

    वास्तव में कई दिन से मुझे इस बात का शक है कि मेरी जी मेल आई डी को हैक करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कौन लोग ऐसा कर रहे हैं या कर सकते हैं इसकी भी मुझे जानकारी होती जा रही है।

    फिलहाल वर्डप्रेस पोस्टिंग कोड और ई मेल पासवर्ड मैंने बादल लिया है पोस्ट को वर्डप्रेस को भी रिपोर्ट कर दिया है

    पाठकों को हुई असुविधा के लिए मुझे बहुत खेद है।

    यशवंत माथुर
    Unlike · · · 18 minutes ago ·

    • You, Sanjog Walter and 2 others like this.
    • Yashwant Mathur यह संभवतः ट्रायल है तभी ब्लॉग्स्पॉट पर ऐसी ओछी हरकत नहीं हुई है। सुरक्षा के मेरे उपाय जारी हैं।
    • Chandrakanta Ck ओह!अब ऐसे गंभीर मंच को भी अपनी खुराफाती गतिविधियों का अड्डा बनाने में जुट गए हैं कुछ लोग ..
      • Vijai RajBali Mathur जहां तक संभावना है इस प्रकार की बेहूदा हरकतों के पीछे पूना प्रवासी भ्रष्ट-धृष्ट ब्लागर के चमचा ब्लागर्स का हाथ हो सकता है।

        उक्त बुद्धिमान ब्लागर साहब को गुमान है कि ब्लाग लेखक फेसबुक लेखक के मुक़ाबले गंभीर और परिपक्व होते हैं उनकी जानकारी के लिए 'यशवंत' के इस फेसबुक स्टेटस को उद्धृत कर रहा हूँ कि,किस प्रकार ब्लाग लेखक निकृष्ट धृष्टता करते हैं जबकि ब्लाग पर उसे रोकने की कोई व्यवस्था भी नहीं है । इसके मुक़ाबले फेसबुक पर धृष्टता करने वाले को 'ब्लाक' किए जाने की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त जो सच्चाई है वह यह है कि,-
        Blog and Face book are  supplementary and complimentary  to each other. 

        हम ब्लाग  पोस्ट को फेसबुक और इसके विभिन्न ग्रुप्स मे लिंक देकर अधिक से अधिक लोगों की जानकारी मे पहुंचा सकते हैं जबकि केवल ब्लाग लेखन केवल ब्लाग लेखकों तक ही सीमित रह जाता है। 
        पूना प्रवासी भ्रष्ट-धृष्ट ब्लागर द्वारा मुझसे खुद चार जन्मपत्रियाँ निशुल्क प्राप्त करने के बाद 'रेखा जी' के राज्यसभा मे मनोनीत होने पर मेरा आंकलन सही सिद्ध होने पर मेरे ज्योतिष ज्ञान के  विरुद्ध अपने चमचा ब्लागरों से   
        आधारहीन ब्लाग पोस्ट लिखवाये गए हैं जिनमे ज्योतिष को मीठा जहर और 100 प्रतिशत झूठा बताया गया है। यशवंत के विरुद्ध भी सुनियोजित षड्यंत्र चलाये जा रहे हैं उपरोक्त उद्धृत वारदात भी उसी की एक कड़ी प्रतीत होती है। तो यह है ब्लाग लेखको की घृणित करतूतें जिनकी सराहना वह बुद्धिमान ब्लागर साहब करते हैं वैसे अपनी पोस्ट मे उन साहब ने पूना प्रवासी उस भ्रष्ट-धृष्ट ब्लागर की भी अपार प्रशंसा की थी।  

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गुरुवार, 27 दिसंबर 2012

मिलना जुलना कमजोरी नहीं (भाग-3)---विजय राजबली माथुर


 पिछले अंक से जारी .............

जब मैंने भोपाल या पटना के रिशतेदारों के साथ नहीं लखनऊ मे( यशवन्त की इच्छानुरूप आगरा के मकान को बेच कर)मकान ले लिया तो डॉ शोभा को जो पीड़ा हुई उसे उन्होने उजागर भी कर दिया था।मैं नहीं समझता कि मुझे अपने निर्णय छोटी बहन की इच्छानुरूप क्यों लेने चाहिए थे और पुत्र की इच्छा को क्यों ठुकराना चाहिए था?पूनावासी छोटी भांजी ने इस दरार को खाई मे बदलने मे कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। 06-10-2010 को प्रवासी ब्लागर  डॉ दिव्या श्रीवास्तव जी  ने एक पोस्ट यशवन्त के संबंध मे अपने ब्लाग मे दी थी तब मुक्ता(चंद्र प्रभा)ने पूना से फोन पर बताया था कि उसने डॉ दिव्या  का पूरा प्रोफाईल चेक किया है उसने तत्काल झांसी फोन करके शोभा को बताया था और कमलेश बाबू ने घबराहट भरे शब्दों मे विस्मय व्यक्त किया था।  ब्लागर्स प्रोफाईल  चेक करने मे उन लोगों द्वारा दी टिप्पणियों का मुक्ता ने सहारा लिया था और उसी क्रम मे पटना की मूल निवासी और विमान नगर मे उसकी पड़ौसन रही ब्लागर का भरपूर सहारा लिया। उक्त ब्लागर ने 'क्रांतिस्वर' मे प्रकाशित पूनम की एक कविता को 'वटवृक्ष' मे 19 नवंबर 2011 को प्रकाशित किया लेकिन धूर्ततापूर्वक ऊपर एक तमंचा का फोटो लगा दिया । पूनम को यह बात काफी अखरी थी लेकिन हमने तब विशेष रण-नीति के तहत विरोध नहीं जतलाया था। फिर उसके बाद 27 अप्रैल 2012 को उसी ब्लागर ने एक तीसरे ब्लाग पर मेरे ज्योतिषीय ज्ञान की खिल्ली उड़ाई और उस टिप्पणी को पिछले कई  पोस्ट मे भी  उद्धृत किया है।

 (रश्मि प्रभा...Apr 27, 2012 07:21 AM





कब मैं हिट होउंगी ... और राज्य सभा की सदस्य बनूँगी - आईला

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आप जल्दी राज्यसभा में पहुंचें,
मेरी भी शुभकामना है)


मई 2012 के 'वटवृक्ष' के पृष्ठ 28 पर (जिसकी स्कैन कापी नीचे देखें) एक परिचर्चा उक्त ब्लागर ने बतौर संपादक दी थी।


पहली चर्चा जिस सौरभ प्रसून की है उससे उक्त ब्लागर को अपनी पुत्री का विवाह करना है।इसकी भी जन्मपत्री बनाने को ईमेल आया था और एक वर्ष के अंतर के दो डिटेल भेजे गए थे।  दूसरी चर्चा जिस छात्रा शिखा श्रीवास्तव की है उसकी जन्मपत्री द्वारा  अपने पुत्र मृगाङ्क से विवाह हेतु गुण मिलाने को मुझे  ईमेल पर कहा था। यह अलग बात है कि बाद मे फेक आई डी द्वारा उक्त ब्लागर ने शिखा के विरुद्ध इन्टरनेट जगत मे भारी अनर्गल दुष्प्रचार किया था।उक्त ब्लागर ने चार जन्मपत्रियों का निशुल्क परामर्श प्राप्त करने के बाद मेरे विरुद्ध घृणित अभियान अपने IBN7 वाले चमचे तथा और एक-दो लोगों द्वारा चलवा रखा है। 


इस क्रम मे तीसरी चर्चा मे यशवन्त का नाम क्यों और किस षड्यंत्र के तहत शामिल किया गया ?इस पर मुझे भारी आपत्ति है। जहां दो चर्चाए संपादक महोदया ने अपने परिवार से सम्बद्ध होने वालों की शामिल की थीं वहीं उनके साथ मेरे पुत्र यशवन्त की चर्चा क्यों और किस हैसियत से शामिल की गई?एक ओर तो मेरे तथा मेरी पत्नी के प्रति खौफनाक दृष्टिकोण और दूसरी ओर मेरे पुत्र को अपने खेमे मे दिखाना सरासर षड्यंत्र नहीं तो और क्या है?

इस षड्यंत्र मे वटवृक्ष के प्रधान संपादक और प्रबंध संपादक भी शामिल हैं अथवा केवल संपादिका की अपनी भूमिका है ?यह प्रश्न अभी अनुत्तरित है किन्तु रहस्य छिपा हुआ नहीं है। उक्त संपादिका ने अपने IBN7 वाले चमचा ब्लागर से (जिससे 27 अप्रैल को लेख लिखवाया तथा बाद मे 'ज्योतिष एक मीठा जहर')27 अगस्त 2012 के ब्लागर सम्मेलन के बाद 'वटवृछ' के प्रधान संपादक के विरुद्ध विष-वमन करवाया था लेकिन आज भी उनके साथ बतौर 'संपादक' डटी हुई हैं। हाल ही मे उस सम्मेलन के सहयोगी आयोजक ने अपने ब्लाग पर ज्योतिष के विरुद्ध एक लेख लिखा है और उस पर मेरे द्वारा की गई टिप्पणी का अभद्र जवाब दिया है। जबकि वही महाशय पहले मेरे 'क्रांतिस्वर' की समीक्षा 'जन संदेश टाईम्स' मे  मार्च 2011 मे निकाल चुके थे और उसे उन्होने अपने ब्लाग पर भी प्रकाशित किया था।किसी दूसरे ब्लागर से रचना चोरी के इल्जाम लगने  पर तब मुझसे अपने पक्ष मे टिप्पणी लिखने का अनुरोध किया था ,27 अगस्त के ब्लागर सम्मेलन मे भाग लेने हेतु 26 को उन्होने मुझसे फोन पर अनुरोध भी किया था ('वटवृक्ष'के प्रबंध संपादक ने भी 23 तारीख को फोन करके मुझसे उस सम्मेलन मे भाग लेने का अनुरोध किया था और आश्वस्त किया था की,"रश्मि प्रभा जी लखनऊ नहीं आ रही हैं")और अब  वह सह-संयोजक उस संपादिका के जाल मे उलझ कर मेरे ज्ञान को चुनौती दे रहे हैं। उनके प्रमाण पत्र की कोई आवश्यकता या अहमियत नहीं है।

एक सोची-समझी रण -नीति के तहत उक्त 'वटवृक्ष' की संपादक ब्लागर द्वारा मेरे ज्योतिषीय ज्ञान पर प्रहार लगातार किया जा रहा है। लेकिन क्या इससे मेरे ज्ञान को कुंद किया जा सकेगा?और इस धृष्ट अभियान का लाभ किसको मिलेगा?



Saturday, November 19, 2011


कुछ तो लगता है 

http://urvija.parikalpnaa.com/2011/11/blog-post_19.html








ख़ुशी में भय
और झूठ में ख़ुशी ...
इस बदली हवा ने सारे मायने बदल दिए हैं
सब उल्टा पुल्टा ही अच्छा लगता है !!!

रश्मि प्रभा

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कुछ तो लगता है

त्योहारों से मुझे अब डर लगता है
बचपन बीता
सब कुछ सपना सा लगता है
रिश्ता एक छलावा लगता है..
छल-बल दुनिया के नियम
कौन किसका
सबको अब अपना अहम् अच्छा लगता है
ऊपर उठाना-गिराना अब यही सच्चा धर्म लगता है
खून-खराबा - अब यही धर्म सब को अच्छा लगता है
त्योहारों का मौसम है
सब को 'नमस्ते' कहना अच्छा लगता है
दुबारा न मिलने का यह संदेश अच्छा लगता है
राम-रहीम का ज़माना पुराना लगता है
बुजुर्गों का कुछ भी कहना बुरा लगता है
मारा-मारी करना अच्छा लगता है
खुदगरजी का जमाना अच्छा लगता है
नैनो से तीर चलाने का ज़माना अब पुराना लगता है
गोली-बारी चलाना अच्छा लगता है
भ्रष्टाचार और घूस कमाना अच्छा लगता है
बदलते दुनिया का नियम अच्छा लगता है
शोर-शराबा करना अच्छा लगता है
हिटलर और मुसोलिनी कहलाना अच्छा लगता है
हिरोशिमा की तरह बम बरसाना अच्छा लगता है
अब गांधी-सुभाष बनना किसी को अच्छा नही लगता है
शहीदों की कुर्बानी बेमानी लगती है
मैं ' आज़ाद हूँ
दुनिया मेरी मुट्ठी में है - कहना अच्छा लगता है
अपने को श्रेष्ठ ,दूसरे को निकृष्ट कहना अच्छा लगता है
चिल्लाना और धमकाना अच्छा लगता है
बेकसूर को कसूरवार बनाना अच्छा लगता है
न्यायालय में झूठा बयान देना अच्छा लगता है
औरों को सता कर 'ताज' पहनना अब अच्छा लगता है
झूठ को सच कहना अच्छा लगता है
दिलों को ठेस पहुंचाना अच्छा लगता है
किसी ने कहा-क्या शर्म नहीं आती
शर्म को ख़ाक करना अच्छा लगता है
अब यह सब करना ही अच्छा लगता है....





(पूनम माथुर)

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मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

मिलना जुलना कमजोरी नहीं है(भाग-2)---विजय राजबली माथुर

जारी---

बारह बरस पाईप मे सीधा रखने के बाद भी जो सीधा न रह सके कुछ उस तरह के लोग हैं ये पूना प्रवासी ब्लागर और उसके चमचे। 'जेवरी जले पर उसके बल न जले' भी एक पुरानी -प्रसिद्ध कहावत है जो इन लोगों पर हू-ब -हू लागू होती है। अपने तोड़-फोड़ अभियान के तहत उस पूना प्रवासी ने अपनी पटना स्थित शिष्य को 25 अप्रैल 2012 को हमारे घर मिलने-जुलने के नाम पर भेजा था लेकिन अब पता चला है कि उसका उद्देश्य हमारे मकान का वेल्यूएशन करना था । पू प्र का उद्देश्य यशवन्त को गुमराह कर आर्थिक क्षति पहुंचाना था जिससे कि हमे अपना यह मकान भी बेच कर उसे बचाना पड़े। इन लोगों का उद्देश्य हमे सड़क पर पहुंचाना था। यदि यह पहले आभास हो जाता तो 13-05-2012 को पटना मे सोनिया बहुखंडी गौड़ के घर न जाते और न ही 12 को उसके पति प्रदीप गौड़ से उनके आफिस मे मिलते। इस संबंध मे मेरे फोन पर जो sms आए थे उनका विवरण यह है-

"Aap kal jarur aayen.Kal aapki kitne b je ki train h?"12-05-2012 ,09-00-11 am--- प्रदीप गौड़ ने अपने आफिस मे 12 मई की साँय 05 बजे मिलने बुलाया था। ---

"Pls come around 5 pm ".12-05-2012 ,11-00-32 am ---
"Kab tak aayenge aap dono?"13-05-2012 ,08-15-08 am ---

पहले सोनिया बहुखंडी ने यशवन्त को पूना मे कोई सर्विस ज्वाइन करने को कहा था जिसे मेरे कहने पर उसने मना कर दिया था। फिर प्रदीप उसे अपने आफिस मे  रु 10000/-पर नियुक्ति दिलवा रहे थे। जिसके लिए भी मैंने टलवा दिया था। अगले दिन उनके निवास पर भी मैंने स्पष्ट कर दिया था कि यशवन्त की ख़्वाहिश पर ही हम आगरा से लखनऊ घाटे पर शिफ्ट हुये हैं अतः लखनऊ के बाहर जाब नहीं करने देंगे।

जब यशवन्त मेरठ से कानपुर 'बिग बाज़ार' मे ट्रांसफर लेकर आ गया था और हमे जल्द से जल्द लखनऊ आने को कह रहा था तब डॉ शोभा ने हमे फोन पर कहा था कि उससे कानपुर मे जाब छुड़वा दो और वह कमलेश बाबू के मित्र लिटोरिया बिल्डर के यहाँ लखनऊ मे जाब कर ले। मैंने उनके सुझाव को न मानते हुये जाब छुड़वाने के बाद घर पर ही उसे साईबर खुलवा दिया था जिसके सहारे ही हम लोग ब्लाग जगत से संपर्क स्थापित कर सके। तब डॉ शोभा की पूनावासी छोटी बिटिया( जो विमान नगर मे प्रवासी ब्लागर की पड़ौसन रही है)ने ब्लाग्स मे यशवन्त व मुझे प्राप्त टिप्पणियों के माध्यम से ढुलमुल-ढुलमुल ब्लागर्स को टटोल कर उन्हे हम लोगों के विरुद्ध उकसाया/भड़काया।
 
(रश्मि प्रभा...Apr 27, 2012 07:21 AM



कब मैं हिट होउंगी ... और राज्य सभा की सदस्य बनूँगी - आईला

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आप जल्दी राज्यसभा में पहुंचें,
मेरी भी शुभकामना है)

 27-04-2012 से मेरे ज्योतिषीय आंकलन के सही सिद्ध  होने   से बौखला कर (19 को मैंने 'रेखा राजनीति मे आने की संभावना'लेख ब्लाग मे दिया और राष्ट्रपति महोदया ने उन्हे 26 को राज्यसभा मे मनोनीत कर दिया था  ) मेरे विरुद्ध पूना प्रवासी ब्लागर द्वारा एक मुहिम चलाई गई। तब पटना मे उसकी शिष्या सोनिया बहुखंडी ने हमसे उसकी आलोचना की थी और हमे मेसेज मे भी उसके विरुद्ध लिखा था जो सब धोखा देने हेतु था।


सोनिया बहुखंडी गौड़
  • मैं अभी भी नहीं समझ पा रही की रश्मि प्रभा जी ने खिल्ली उढ़ाई होगी आपकी किन्तु मैं आपके ज्ञान की पूरी पूरी इज्जत करती हूँ। आप लोग बात करें ना करें हमेशा करती रहूँगी। सादर

    सोनिया बहुखंडी गौड़
    • नहीं चाचा जी मैं उस समय वहाँ नहीं थी प्रदीप थे और ये मुझे कोई बात शेर नहीं करते मुझे सुंनकर बहुत बुरा लग रहा है। ये सच बात है मुझे मोटी मोटी बात पता थी अगर वो इतना गलत काम आपके संग कर रही हैं तो मैं उनके साथ मित्रता कैसे रख सकती हूँ। विश्वास करिए की मैं आपको वास्तव मे दिल से अच्छे संबंध की तरह देखती हूँ। हाँ यशवंत को ठगा ये बात मुझे पता थी। आपके मैसेज से मुझे बहुत ही अच्छे रिश्ते की पहचान हूइ। मुझे आभाष हो गया था की आपने ही यश को माना किया होगा। दिल से किसी को नहीं निकाला जा सकता ये भी मैं जानती हूँ। रश्मि जी ने जब मेरे से कविता मांगी थी तो मैंने यश से पूछा था अगर आप मन से मुझे बेटी मानते तो बोलते की कोई जरूरत नहीं। देने की.... बिना पिता की बेटी हूँ आपसे स्नेह मिला तो लगा पापा फिर से मिल गए। आप यश को रोक सकते हैं आपका बेटा है। मैं तो बस दो दिन की ही बहन बन पाई दुख हुआ दिल से। अगर लगे की मैं सच कह रही हूँ तो यश से कहना की मेरे से बात करे। frown आप लोगों की मुझे जादा जरूरत है नाकी रश्मि जी की

      सोनिया बहुखंडी गौड़
      • Mujhe unse koi profit nahi. Hindi yugm k publisher ne mujhe niji msg de kar gujarish ki thi review likhne k liye. Wo review apne aap me ek kataksh tha dronacharya wala ex. Jiska uttar aap ne apne cmnt me de diya tha. Eklavya ka. Aur adhikar aapka bhi kuch bhi kahne ka ek baar phn to karte aap daante mujhe. Aap logon ne to mera phn bhi nahi pick kiya


       पूना प्रवासी ब्लागर ने पूनम के भाइयों को भी क्षेत्रवाद और जातिवाद के आधार पर हमारे विरुद्ध कर दिया था इसका कुछ-कुछ आभास प्रदीप जी के अपने आफिस मे की गई  चर्चा से हो गया था। बालाघाट वाले उनके छोटे भाई जिनको डॉ शोभा बहुत  अच्छा बताती हैं उन्हें हवाई जहाज मे बैठा कर जल्दी से जल्दी  लखनऊ रवाना करने का दबाव अपने भाई-भाभी पर बना रहे थे। अतः एक बार फिर घर मे ताला लगा कर उन्हे लेने यशवन्त और मैं पटना गए किन्तु उनके घर नहीं गए। गोलघर(पैसे वालों को जूते की ठोकर और पटना का गोलघर)आदि मे समय व्यतीत कर दिया और उनके घर के बिलकुल निकट से पूनम को साथ ले लिया। चूंकि कमलेश बाबू के भतीज दामाद कुक्कू-शरद पार्सल बाबू के कारनामों के कारण उनसे संपर्क नहीं रखा था और खुद डॉ शोभा के द्वारा  अप्रैल 2011 मे यशवन्त  को 'पूत-कपूत' कहने के बाद  से उन लोगों से भी संपर्क नहीं था अतः उन लोगों ने पूना प्रवासी ब्लागर के माध्यम से पूनम के भाइयों को भी तोड़ लिया।हालांकि आगरा मे जब विकट आर्थिक स्थिति आ गई थी और मेरे पास कुल रु 2000/- मात्र ही शेष रह गया था( और हमारी छोटी बहन  डॉ शोभा हेल्प मांग लेने का आश्वासन आगरा फोर्ट स्टेशन पर जयपुर जाते समय देकर भी फोन पर मदद मांगने पर चुप्पी साध गईं थीं तब)पूनम द्वारा अपनी भाभी जी  से ज़िक्र करने पर उन्होने तत्काल रु 5000/- का ड्राफ्टभेज दिया था। यह अलग बात है कि हमे वे रुपए खर्च नहीं करने पड़े और हमे अपने मकान के सौदे का एडवांस मिल गया था फिर भी त्वरित सहायता हेतु उनके एहसान को भुलाया नहीं जा सकता।

आगरा छोडने से पूर्व 2009 मे पूनम के आग्रह पर हम लोग पटना गए थे तब उनकी आरा वाली चाची का व्यवहार खटकने वाला था जिनकी बेटी भी पूना मे ही रहती है और पूना प्रवासी ब्लागर से संबन्धित है। उसी के माध्यम से पूनम के बड़े भाई-भाभी के दिमाग मे क्षेत्रीयता और जातीय संकीर्ता का प्रवेश करवाया गया। लखनऊ आने के बाद से पूनम का लगातार आग्रह पटना मिलने जाने  को था अतः मई 2012 मे हम लोग उनको वहाँ छोडने गए थे जब बहुखंडी ने sms भेजकर बुलाया था।



लखनऊ आकर मिलने के क्रम मे बड़े ताऊजी की बेटियों मे सबसे छोटी जो मुझसे छह माह ही छोटी हैं के घर न जा सके थे तो पूनम के पटना से लौटने के बाद 02 अक्तूबर 2012 को उनके घर भी गए थे। हाई कोर्ट मे एडवोकेट उनके पति जिनहोने 1992 मे ऋषिराज की शादी के वक्त अपने घर आने को बहुत ज़ोर दिया था अब 20 वर्ष बाद बहुत बदले हुये थे या डॉ शोभा और उमेश की लामबंदी का यह असर रहा हो सकता है। 

'' न गरज है न मजबूरी है;मेल रखना क्या ज़रूरी है?" मेरा एक सिद्धान्त है जिस पर तब अमल करता हूँ जब कोई झुकाने-दबाने का प्रयास करता है अन्यथा निस्वार्थ भाव से मैं सबकी मदद करने को सदैव तत्पर रहता हूँ। पहले तो डॉ शोभा ने मुझको कहा था कि मैं या तो उनके भोपाल मे शिफ्ट करूँ या पूनम के पटना मे । स्वतंत्र रूप से लखनऊ मेरा आना उनको नागवार लगा और क्योंकि यशवन्त की ऐसी इच्छा थी इसलिए सारा हमला उसे ही फोकस करके किया गया और पूना प्रवासी ब्लागर के माध्यम से भी उसे क्षति पहुंचाने का प्रयास हुआ। चूंकि लखनऊ आने पर कमलेश बाबू के तमाम पोल-पट्टे खुल गए अतः वह शोभा से मेरे यहाँ आने का विरोध कराते रहे। कमल दादा और शैल जीजी ने शोभा के बारे मे जांनकारीया  दी थीं उन दोनों का निधन 2011 मे हो गया  और माधुरी जीजी ने कमलेश बाबू के बारे मे  जिंनका निधन जनवरी 2012 मे हो गया। इन लोगों की सोच है यदि मेरा भी  निधन हो जाये तो वे यशवन्त को आसानी से दबोच सकते हैं। पूना प्रवासी ब्लागर के IBN7 मे कार्यरत चमचा ब्लागर ने तो पूरे परिवार को उड़ा देने की धमकी सितंबर मे दी थी।

हमे मिलना जुलना और मेल रखना तो पसंद है परंतु झुक-दब कर नहीं। इस सन्दर्भ मे पहले भी बिजौली के क्रांतिकारी जन कवि 'विजय सिंह,पथिक' जी का यह प्रेरक वचन  प्रस्तुत कर चुका हूँ फिर से दोहरा रहा हूँ---

"यश -वैभव-सुख की चाह नहीं,परवाह नहीं जीवन न रहे। ।
इच्छा है यह है-जग मे स्वेच्छाचार  औ'    दमन न 
 रहे । । "

क्रमशः ..................... 


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बुधवार, 31 अक्टूबर 2012

पहचान षड्यंत्रकारी छिपे खिलाड़ियों की



 http://krantiswar.blogspot.in/2012/04/blog-post_19.html

   प्रस्तुत लिंक पर मेरा लेख ---'


बृहस्पतिवार, 19 अप्रैल 2012


रेखा -राजनीति मे आने की सम्भावना 

 



 
और इत्तिफ़ाक से 26 अप्रैल 2012 को राष्ट्रपति महोदया प्रतिभा पाटील जी ने 'रेखा जी' को अन्य दो के साथ 'राज्यसभा' मे मनोनीत कर दिया। मेरा ज्योतिषीय विश्लेषण एक सप्ताह मे सही सिद्ध होने पर अब ज्योतिष को 'मीठा जहर'  बताने वाले कारपोरेट चेनल IBN7 के प्रतिनिधि ने अगले ही दिन 27 अप्रैल को इसकी आलोचना मे पोस्ट दी जिस पर  ये  दो टिप्पणिया उन दोनों की मनोदशा को उजागर करने हेतु पर्याप्त हैं।



कब मैं हिट होउंगी ... और राज्य सभा की सदस्य बनूँगी - आईला





  • आप जल्दी राज्यसभा में पहुंचें,
    मेरी भी शुभकामना है

     एक तीसरे ब्लाग पर पाखंड विरोधी लेख पर मेरी  टिप्पणी को ठुकराने का आग्रह इन महाशय ने पोस्ट लेखिका से किया था और मैंने इनके कुतर्क पर क्या कहा था एक नज़र उस पर भी---



     ज़ाहिर है कि कारपोरेट चेनल्स के दलाल/कारिंदे नहीं चाहते कि जनता को जागरूक किया जाये और ढोंग-पाखंड-आडंबर का पर्दाफाश करके उनको शोषण व उत्पीड़न से बचाया जाये। अतः अपने आकाओं के व्यापारिक हितों के संरक्षणार्थ ऐसे लोग सच्चाई को बर्दाश्त नहीं करते और उसका भोंडा विरोध करते हैं । IBN7 और दैनिक जागरण निरंतर जन-विरोधी समाचार देने के लिए जाने जाते हैं।

    इस कारपोरेट दलाल की मन्त्र्दाता और उसकी शिष्य द्वारा  चार-चार जन्मपत्रियाँ निशुल्क विश्लेषण करवाने के बाद जिस प्रकार इस  गैंग ने 'ज्योतिष' और मेरे ज्ञान पर प्रहार किए उसी कारण 'जनहित मे' नमक ब्लाग को सार्वजनिक रूप से प्रतिबंधित कर रखा है जिसके माध्यम से उपयोगी 'स्तुतियाँ' प्रस्तुत की थीं। यदि ब्लागर्स /फेसबुक साथी इस गैंग  की निंदा करके  उस ब्लाग से सार्वजनिक लाभ उठाना चाहेंगे तो पुनः 'सार्वजनिक' किया जा सकता है। 
    http://janhitme-vijai-mathur.blogspot.in/?zx=a15232c1af410425 

     इसी प्रकार 14-10-2012 को ज्योतिष एक मीठा जहर शीर्षक से जो लेख इन महोदय ने लिखा था उस पर दो पत्रकारों की टिप्पणिया ये हैं---

    1. मुझे लगता है कि हमे उन्ही विषयो पर लिखना या टिपण्णी करनी चाहिये जिसके बारे मे कुछ समझ रखते हो। ज्योतिष सही है या गलत इस संबंध मे आपने किसी ज्योतिषी की राय नही ली कि आखिर आधार क्या है योटिश का। बेहतर होता आप राय लेकर के उसे तर्को के सहारे कातते । रह गई ग्रह नक्षत्रो की बाद तो ज्वार भाटा के आने का कारण चंद्र्मा की स्थिति मे परिवर्तन है। इन गर्हो के मुमवेंट का असर आदमी के मन और दिमाग पर भी पडता है जिससे बहुत सारे काम और काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। क्षमा करे , परन्तु आपका यह लेख सतही है।






      1. मदन भाई साहब आप यहां आए स्वागत है।
        आप बताएं फिर तो सबसे पहले मीडिया हाउस को बंद कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि हम मेडिकल के बारे में बारे में लिखते है, मैं एमबीबीएस तो है नहीं, रेलवे की इंजीनियरिंग सिस्टम पर हम लिखते हैं हमने इंजीनियरिंग भी नहीं की है। सेना को कवर करने जाते हैं किसी ने सैन्य प्रशिक्षण तो लिया नहीं।

        खैर लेख लिखने के पहले हमने ज्योतिष के बारे में पढने के बाद ही लिखा है। अच्छा होता कि आप लेख में जहां खामियां है उस पर मेरा ध्यान केंद्रित करते।
        फिर भी आपने वक्त दिया ब्लाग पर मैं आभारी हूं..
    2. महेंद्र जी, आप सन्दर्भ बिलकुल सही है और शायद हमें इसी तरह के लेख की जरुरत आज के समय में है. लेकिन एक शिकायत जो आप के साथ साथ सभी मीडिया के साथियों से है वो यह की आप कृपया अपने लेख के शीर्षक का ध्यान रखें. ज्योतिष यानि मीठा जहर का अर्थ एक सामान्य मनुष्य को येही आएगा की आप ज्योतिष को को गलत बता रहे हैं. पर आपने इसने नाम पे जो बुराइयाँ उजागर की हैं वो अति सुन्दर है. शेष अति सुन्दर...
    3. महेंद्र जी, आप सन्दर्भ बिलकुल सही है और शायद हमें इसी तरह के लेख की जरुरत आज के समय में है. लेकिन एक शिकायत जो आप के साथ साथ सभी मीडिया के साथियों से है वो यह की आप कृपया अपने लेख के शीर्षक का ध्यान रखें. ज्योतिष यानि मीठा जहर का अर्थ एक सामान्य मनुष्य को येही आएगा की आप ज्योतिष को को गलत बता रहे हैं. पर आपने इसने नाम पे जो बुराइयाँ उजागर की हैं वो अति सुन्दर है. शेष अति सुन्दर...








      1. आप यहां तक आए, यही काफी है।
        बाकी आप मीडिया के बारे में कितना जानते हैं, मुझे नहीं पता।

        ज्योतिष को मीठा जहर बताने पर जहां चापलूसों की फौज ने उन दोनों का पुरजोर समर्थन किया वहीं 'बिहार मीडिया'के संचालक और एडवोकेट साहब ने विमत व्यक्त किया जिस पर इस गरूरी ब्लागर ने -''मदन भाई साहब आप यहां आए स्वागत है।
        आप बताएं फिर तो सबसे पहले मीडिया हाउस को बंद कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि हम मेडिकल के बारे में बारे में लिखते है, मैं एमबीबीएस तो है नहीं, रेलवे की इंजीनियरिंग सिस्टम पर हम लिखते हैं हमने इंजीनियरिंग भी नहीं की है। सेना को कवर करने जाते हैं किसी ने सैन्य प्रशिक्षण तो लिया नहीं।''
        यह लिख कर ज़ाहिर भी कर दिया विषय-विशेष के ज्ञान के बगैर उसकी आलोचना करना उनके जाब का हिस्सा है।

        दूसरे पत्रकार जो 'सहारा समय' चेनल मे कार्य कर चुकने के बाद अब रायपुर,छत्तीसगढ़ मे एक  दैनिक अखबार बतौर सम्पादक निकाल रहे हैं  और उनका समर्थन भी कर रहे हैं,सिर्फ 'शीर्षक' पर आपत्ति थी उनको ,तो इस कारपोरेट दलाल ने यह कह कर लताड़ ही दिया-''



        1. आप यहां तक आए, यही काफी है।
          बाकी आप मीडिया के बारे में कितना जानते हैं, मुझे नहीं पता।''
          कितने मज़े की बात है कि,जिसे कुछ नहीं पता होता है वह कितनी अल्हड्ता से ब्लाग सुविधा का दुरुपयोग करता है। क्यों करता है?जानें इस चित्र से ---

          IBN7के प्रतिनिधि (ज्योतिष को मीठा जहर लिखने वाले )और उनकी मन्त्र्दाता,विमान नगर,पूना मे पाँच घंटों के प्रवास मे   गुफ्तगू करते  हुये

          पर्यावरण को शुद्ध रखना और ग्रह नक्षत्रों का शमन करना ज्योतिष विज्ञान सिखाता है.हम ज्योतिष के वैज्ञानिक नियमों का पालन कर के अनूठी दुनिया  का अधिक से अधिक लुत्फ़ उठा सकते हैं.आवश्यकता है सच को सच स्वीकार करने की और अपनी इस धरती को तीन लोक से न्यारी बनाने की. 
          http://krantiswar.blogspot.in/2012/10/blog-post_27.html

          चार-चार जन्म्पत्रियों का विश्लेषण पूना के ब्लागर व उनकी पटना की शिष्य ने निशुल्क प्राप्त करने के बाद जो ज्योतिष विरोधी मुहिम चला रखी है वह कितना वाजिब है?

          इस सम्बंध मे पिछले अंक मे  विस्तृत वर्णन दिया जा चुका है---
         इस पोस्ट पर अपने विचार (टिप्पणी) देने के लिये कृपया यहाँ क्लिक करे।
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