रविवार, 14 जुलाई 2013

एच के मेरठिया और पी टी सीतापुरिया में क्या अंतर है?

1972 में सारू स्मेल्टिंग,मेरठ में मुझे एकाउंट्स विभाग में जाब तो मिल गया था लेकिन न मेरे पास अनुभव था न ही मैं कामर्स पढ़ा था।  क्योंकि तब एकाउंट्स में हंस कुमार जैन साहब  क्लर्क और रिटायर्ड बैंक मैनेजर लेखराज प्रूथी साहब मैनेजर एकाउंट्स के पद पर कार्यरत थे और उन दोनों में बनती नहीं थी। जैनियों की फर्म होने के कारण क्लर्क साहब  मैनेजर साहब पर हावी थे। हंस कुमार जी खलल पड़ने से तिकड़म चलने लगे। वह मेरे द्वारा पेंसिल से किए गए लेजर के  टोटल्स में हेरा-फेरी करके मैनेजर साहब को कहते थे इनको टोटल लगाना ही नहीं आता है यह क्या काम करेंगे?मैनेजर साहब ने मुझे खाली बैठे रहने को कहा,मैंने उनसे पुरानी फाइलें अध्यन हेतु मांग लीं उन्होने पढ़ने को दे दीं;दो दिन बाद मैंने उनसे निवेदन किया कि कुछ वाउचर बनाने को मुझे भी दे दिया करें। उन्होने मुझसे वाउचर बनवाए और दो दिन सफलता पूर्वक मेरे किए काम को देख कर हंस कुमार जी बोले अब सारे वाउचर यही बनाएँगे और वह चेक करेंगे फिर उसके बाद ही मैनेजर साहब पास करें। प्रूथी  साहब ने स्वीकार कर लिया  और मुझ पर काम का काफी बोझ आ गया। हंस कुमार जैन ने चतुरतापूर्वक मेरे प्रति मृदु व्यवहार अपना लिया।

2013 में 23 मई को  एक सार्वजनिक पत्रिका के संपादक महोदय ने मुझे कार्यकारी संपादक को मदद करने को कहा जिसे मैंने संपादक महोदय के प्रति सम्मान एवं आदर भाव के कारण सहर्ष स्वीकार कर लिया। 30 मई को संपादक महोदय के टूर पर होने के कारण कार्यकारी संपादक अपने छात्र जीवन में दूसरे छात्र नेता को पीटने ,उनके पिता श्री द्वारा किसी को उठा कर फेंक देने के किस्से सुनाने लगे। उनका आशय मुझे धमकाना था कि वह मुझे भी फेंक देंगे। मैंने संपादक महोदय को उनके किस्से बता दिये थे।  पी टी सीतापुरिया साहब कंप्यूटर में सी डी अटका कर जाने लगे जिससे संचालन में दिक्कत आए इसकी भी प्रत्यक्ष जानकारी संपादक महोदय एवं उनके अन्य सहयोगी को दे दी थी। यहाँ तक तो उनका कृत्य एच के मेरठिया से मिलता-जुलता रहा किन्तु हंस कुमार जी द्वारा बाद में व्यवहार परिवर्तन की प्रक्रिया पी टी सीतापुरिया नहीं अपना सकते थे क्योंकि उनका उद्देश्य सिर्फ मुझे ही नहीं मेरे परिवारीजनों को भी परेशान करना था जिससे मैं कार्यालय तक पहुँच ही न सकूँ। ऐसा कई बार हुआ था लेकिन 12 जूलाई को फिर जब संपादक महोदय अपने साथी के साथ फिर टूर पर थे पी टी सीतापुरिया ने अपनी तांत्रिक प्रक्रिया से मेरे परिवार के बाकी सदस्यों को रुग्ण कर दिया जिससे मैं संपादक महोदय की अनुपस्थिति में कार्यालय न पहुँच सका। यह तो क्रमशः चल ही रहा था किन्तु इस बार पी टी सीतापुरिया ने खुद संपादक महोदय पर भी निशाना साध दिया। जीप के लखनऊ की सीमा में रहते ही अपनी तांत्रिक प्रक्रिया से पी टी सीतापुरिया ने सामने के विंड स्क्रीन में ब्लास्ट करा दिया जिसके काँच संपादक महोदय के शरीर के विभिन्न हिस्सों में प्रविष्ट कर गए। बिना सामने के शीशे की गाड़ी से वह गंतव्य तक पहुंचे क्योंकि उनको एक जनसभा की विशेष रिपोर्टिंग करनी थी।

पी टी सीतापुरिया के बहकावे में आकर एक राजनीतिक दल के प्रदेशाध्यक्ष महोदय भी मुझे सपरिवार परेशान करने के उपक्रम में शामिल रहे थे। उनको अब उनकी पार्टी ने पदच्युत कर दिया है,पी टी सीतापुरिया की बुरी सोहबत का परिणाम उनको मिल गया है। पी टी सीतापुरिया पूरी तरह आर के बाही के नक्शे कदम चल रहे हैं जिनकी कभी अपनी पार्टी में खूब तूती बोलती थी उन्होने ने भी अपने वरिष्ठ की बुद्धि तांत्रिक प्रक्रियाओं से जाम कर रखी थी। चंद्रास्वामी जैसे दिग्गज तांत्रिक जब धूल चाट सकते हैं तो आर के बाही की बिसात ही क्या थी। अंततः उनके उन वरिष्ठ नेता ने ही उनको पार्टी से निष्कासित करा दिया। आर के बाही की सारी की सारी तांत्रिक प्रक्रियाएँ धरी की धरी ही रह गईं। देखते हैं कि वक्त कब करवट लेता है और पी टी  सीतापुरिया को कब तक उसके कुकर्मों की सजा मिल पाती है?

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3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सशक्त पोस्ट
    सादर .......

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  2. http://www.youtube.com/watch?v=zZP_fKDxD20

    कामरेड ए के हंगल,शबाना आज़मी,राजेश खन्ना और शत्रुहन सिन्हा की प्रमुख भूमिकाओं वाली'आज का एम एल ए राम अवतार' के अवलोकन का अवसर मिला और उससे प्रदीप घोटालू ,पी टी सीतापुरिया आदि के षडयंत्रों का मुक़ाबला करने की सीख प्राप्त हुई।

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