अन्न,भूमि,गिरि,भानु,दिशाएँ,मेघ शुभंकर होवें।
शांति-स्नेह,संतोष सुहावे,कलह-कालिमा धोवे। ।
पवन,प्रकाश,चंद्र,रवि भू पर दुख संताप नसावें।
दिवस,प्रमोद-पूर्ण रजनी भी सुख-सौन्दर्य बढ़ावे। ।
(ऋग,मण्डल-7/सूक्त-35/मंत्र-3 एवं 4 )
निर्भय होकर पशु प्राणी जगती मे हर्ष मनावें।
कर्म योनि को पाकर मानव निज कर्तव्य निभावें। ।
(यजु,अध्याय-36/मंत्र-8)
समस्त संसार के समस्त प्राणियों को वर्ष 2013 शुभ एवं मंगलमय हो
शांति-स्नेह,संतोष सुहावे,कलह-कालिमा धोवे। ।
पवन,प्रकाश,चंद्र,रवि भू पर दुख संताप नसावें।
दिवस,प्रमोद-पूर्ण रजनी भी सुख-सौन्दर्य बढ़ावे। ।
(ऋग,मण्डल-7/सूक्त-35/मंत्र-3 एवं 4 )
निर्भय होकर पशु प्राणी जगती मे हर्ष मनावें।
कर्म योनि को पाकर मानव निज कर्तव्य निभावें। ।
(यजु,अध्याय-36/मंत्र-8)
समस्त संसार के समस्त प्राणियों को वर्ष 2013 शुभ एवं मंगलमय हो
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