शनिवार, 6 अप्रैल 2013

प्रेरक व्यक्तित्व- महादेव नारायण टंडन ---विजय राजबली माथुर

06 अप्रैल पुण्य तिथि पर विशेष---
"डा राम गोपाल सिंह चौहान ने रिटायरमेंट के बाद कालेज का बंगला -6,हंटले हाउस  अपनी पुत्री (जो आगरा कालेज मे हिन्दी विभाग मे पढ़ाती थीं)के नाम करवा लिया था और उन्हीं के लान मे पार्टी की बड़ी मीटिंग्स होती थीं। वह A I P S O मे भी सक्रिय थे और उसमे भी मुझे बुलाते थे। इस 'विश्व शांति और एकजुटता संगठन' मे कम्यूनिस्टों के अतिरिक्त कांग्रेस,जनता पार्टी और सोशलिस्ट पार्टी के भी सदस्य थे। आगरा मे इसका नेतृत्व का महादेव नारायण टंडन (संस्थापक जिला मंत्री,आगरा-भाकपा)करते थे जो कम्यूनिस्ट पार्टी पर प्रतिबंध के समय A I C C मे सक्रिय थे और गोपनीय ढंग से पार्टी चला चुके थे। 1987 मे कानपुर एप्सो का एक सम्मेलन था जिसमे भाग लेने को टंडन जी ने मुझ से कहा परंतु मैंने आर्थिक आधार पर असमर्थता व्यक्त कर दी। उन्होने कहा हम तुम्हें भेजेंगे तुम टिकट की चिंता न करो। एक वृद्ध सज्जन *जो एन वक्त पर नहीं गए उनके टिकट पर मुझे भिजवा दिया और लौटने के टिकट का धन पार्टी फंड से मिश्रा जी ने दे दिया ।"(http://vidrohiswar.blogspot.in/2011/09/1986-87-2.html)

मेरे पूर्व प्रकाशित इन वाक्यांश से इतना तो पता चल ही जाता है कि टंडन जी की प्रवृत्ति नए लोगों को आगे बढ़ाने व ऊपर उठाने की थी। हालांकि उस समय टंडन जी पार्टी मे अधिक सक्रिय नहीं थे और विशेष कार्यक्रमों मे ही भाग लेते थे परंतु एक बार परिचय हो जाने पर सभी को याद रखते थे। मुझे उनके बारे मे अपने वरिष्ठ नेताओं के ज़िक्र करने के जरिये ही जानकारी हासिल हुई थी और खुद उनसे परिचित न था। फिर भी टंडन जी की मेहरबानी से मैं एप्सो के दो दिवसीय  अधिवेशन मे भाग ले सका।

सन 2007 और 2008 मे 06 अप्रैल को उनकी पुण्य तिथि पर आगरा मे  होने वाले स्मृति कार्यक्रमों मे भी भाग लेने का अवसर मिला था।एक वर्ष सुप्रसिद्ध लेखक कामरेड अनिल राजिम वाले साहब और एक वर्ष भाकपा के राष्ट्रीय सचिव मण्डल के सदस्य कामरेड अतुल अंजान साहब ने मुख्य वक्ता के रूप मे संबोधित किया था जिनके भाषणों से टंडन जी के व्यक्तित्व व कृतित्व की  अच्छी जानकारी मिली। यह भी ज्ञात हुआ कि टंडन जी मे व्यापक दूर दृष्टि थी और वह समय से पहले ही आगे की रूप रेखा तैयार कर लेते थे। उनके लेख विभिन्न अखबारों मे समय -संमय पर छपते रहते थे। अमर उजाला,आगरा मे छपा उनका लेख 'अमेरिका की आँख की किरकिरी है-निकारागुआ' मैंने भी पढ़ा था अतः इन विद्वानों द्वारा दी जानकारी अतिशयोक्ति न लगी।

आज यहाँ मैं टंडन जी के दार्शनिक सिद्धांतों की नही बल्कि  उनसे व्यक्तिगत रूप से प्राप्त  व्यवहारिक ज्ञान की चर्चा करना चाहता हूँ। टंडन जी पार्टी के बाहर भी लोकप्रिय थे और उनके व्यक्तिगत संबंध लोगों से मधुर थे। अपने पुत्र डॉ जितेंद्र टंडन की शादी  उन्होने दिन मे की थी ,भोज 'इम्पीरियल होटल'के लान मे था। मेरा उनसे व्यक्तिगत परिचय नहीं था परंतु मेरे पास भी उन्होने निमंत्रण पत्र भिजवाया था। डॉ जितेंद्र के शिक्षक रहे डॉ पी पी माथुर साहब भी वहाँ मिले थे। तमाम राजनीतिक  दलों के लोग वहाँ थे परंतु टंडन जी सभी से आत्मीयता से मिले थे।

मेरे होटल मुगल के केस के संबंध मे एक बार उन्होने पार्टी आफिस मे कहा था कि यदि मैं चाहूँ तो वह किसी के व्यक्तिगत प्रयास से हस्तक्षेप द्वारा हल कराने की कोशिश कर सकते हैं। इस सिलसिले मे मैं उनके निवास पर गया तो उन्होने पूरी जानकारी हासिल करके मुझे सतीश चंद्र गुप्ता जी के पास भेजा और उनको उनसे मिलने का संदेश देने को कहा। जो पता डेवलपमेंट ट्रस्ट का सेंट जांस कालेज चौराहे का टंडन जी ने मुझे दिया था वहाँ सतीश जी के पिताजी पूर्व मंत्री देवकी नन्दन विभवजी मिले,वयोवृद्ध होने के बावजूद अपने पुत्र से मिलने आए मेरे जैसे अज्ञात व्यक्ति को भी सम्मान देने के लिए वह खड़े हो गए।विभव जी उत्तर प्रदेश सरकार मे चार अवसरों पर मंत्री रह चुके थे फिर भी काफी विनम्र और व्यवहारशील थे।  मुझे बैठा कर उन्होने बात पूछी और यह मालूम होने पर कि मुझे टंडन जी ने भेजा है उनका हाल-चाल भी ज्ञात किया। सतीश जी के उस समय नेहरू नगर स्थित कार्यालय मे मिलने की सूचना और मेरे पहुँचने का रास्ता समझाया। चलते वक्त मुझसे कहा कि मैं टंडन जी को उनका अभिवादन भी कह दूँ।

सतीश चंद्र जी कार्यालय मे बड़े ही सौहाद्र रूप से मिले। वह IRS अधिकारी रहे थे और उस समय आगरा पूर्वी विधानसभा क्षेत्र से इन्दिरा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव कार्यालयी हेरा-फेरी से  हरा दिये गए थे जिसे उन्होने अलाहाबाद हाई कोर्ट मे चुनौती दी हुई थी और वहाँ वोटों की पुनः मतगणना चल रही थी। ( बाद मे हाई कोर्ट मे आगरा कलेक्टरेट के कर्मचारी मिस्टर कालरा जिसका संबंध RSS से था की धांधली उजागर हुई जिसने ऊपर और नीचे 'कमल'तथा बीच मे छिपा कर 'पंजे' के वोट गिन कर भाजपा के सत्यप्रकाश विकल को जीत का सर्टिफिकेट दिलवा दिया था। हाई कोर्ट ने विकल जी का निर्वाचन रद्द करके सतीश चंद्र जी को 'विधायक' निर्वाचित करके पूरे पाँच वर्ष का वेतन-भत्ता देने का आदेश जारी कर दिया हालांकि चार वर्ष काअवेद्ध वेतन-भत्ता विकल जी से नहीं वसूला गया। ) सतीश चंद्र जी ने दिन के एक बजे टंडन जी के घर पहुँचने की बात कही और नियत समय पर पहुँच भी गए। और बात-चीत के बाद टंडन जी ने मेरी समस्या उनको बताई जिस पर उन्होने सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया। यदि इन्दिरा कांग्रेस के दूसरे नेता एस बी शिरोमणी (रेलवे पार्सल बाबू शरद मोहन और कुक्कू यानि कमलेश बाबू के भतीज दामाद के रिश्तेदार)का हाथ मुझे बर्खास्त कराने मे न होता तो सतीश चंद्र जी मुझे बहाल कराने मे कामयाब हो जाते।जो भी हो  टंडन जी की सद्भावना  एवं सद्प्रयास तो  अविस्मरणीय ही हैं।

मुझे बड़े नेताओं से पता चला था कि टंडन जी ने आगरा मे भाकपा की स्थापना के बाद दूसरे शहरों से कई प्रतिभाशाली युवाओं को आगरा लाकर पार्टी को मजबूत किया था। इनमे से  दो का सान्निध्य मुझे भी मिला था। एक थे कामरेड अब्दुल हफीज साहब  जो टंडन जी की ही तरह स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे और पार्टी कार्यालय मे ही स्वास्थ्य ठीक रहने तक रहे। मजदूरों मे ही नहीं आम जनता मे भी वह  'चचे' नाम से जाने जाते थे। इनको टंडन जी झांसी से विद्यार्थी काल मे लाये थे। दूसरे डॉ राम गोपाल सिंह चौहान साहब को विद्यार्थी काल मे शाहजहाँपुर से टंडन जी लेकर आए थे। सुंदर होटल,राजा मंडी स्थित पार्टी कार्यालय भाकपा के साथ केवल इसी लिए बचा रहा क्योंकि टंडन जी चट्टान की भांति  पार्टी के साथ डटे रहे थे जबकि उनके अधिकांश साथी 1964 मे माकपा मे खिसक गए थे। इसी लिए तत्कालीन जिलामंत्री कामरेड रमेश मिश्रा जी ने जब उस कार्यालय के मूल्य से पार्टी का नया भवन मदिया कटरा मे स्थापित करवाया तो उसका नामकरण 'कामरेड महादेव नारायण टंडन भवन' रखने का प्रस्ताव किया जिसे प्रदेश नेतृत्व ने भी मान्य किया। आगरा भाकपा का कार्यालय कामरेड महादेव नारायण टंडन की स्मृति को निरंतर बनाए रखेगा और आने वाले नए साथियों को भी उनके 'त्याग' व 'बलिदान' से परिचित कराता  तथा प्रेरणा देता रहेगा। 
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*वह वृद्ध सज्जन आदरणीय कामरेड राजेन्द्र रघुवंशी जी थे।

    

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2 टिप्‍पणियां:

  1. महान व्यक्तित्व से परिचय करवाने के लिए शुक्रिया और आभार !!
    सादर !!

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  2. bahut achchhi jankari mili hai aapke is aalekh se .tandan ji ko kareeb se janne ka jo swarnim avsar aapne diya hai uske liye ham aapke aabhari hain .thanks sir.

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