मंगलवार, 30 अगस्त 2011

आगरा/1984-85 (भाग-5)/मुगल पर केस

श्री हरीश छाबड़ा के ही माध्यम से एक बिजली की दुकान मे जिनकी होटल मुगल मे ही सप्लाई थी 2 घंटे का पार्ट टाईम जाब भी मिल गया। इनसे रु 200/- मासिक मिला और काम सेल्स टैक्स का ही करने को मिला। सुबह साढ़े नौ पर निकलना तथा रात्रि साढ़े नौ तक वापिस आना होता था,तब तक यशवंत सो चुकता था। वकील विनय जी ने मुझे सुझाव दिया कि, सेठ से वक्त कम करवा लो और उसी 2 घंटे के वक्त मे पार्ट टाईम करो जिससे घर जल्दी पहुँचोगे और बच्चा जागता हुआ मिल जाएगा। काम को देखते हुये सेठ जी सहर्ष 2 घंटे का वक्त कम करने पर राजी हो गए। उन्होने ही यह भी सुझाव दिया कि होटल मुगल पर केस दायर कर दो ।

होटल मुगल पर केस 

होटल मुगल पर केस दायर करने से पहले  वहीं के साथियों से विचार-विमर्श करना मुझे उचित लगा। तमाम ऐसे लोग जो कभी न कभी किसी कार्यस्थल पर यूनियन से संबन्धित रहे उनसे तो संपर्क किया ही जो परसोनल विभाग मे कार्यरत रहे उनसे भी मन्त्र्णा की। श्री पद्मा शंकर पांडे परसोनल विभाग मे झा साहब के जमाने मे रहे थे। उन्हीं के मित्र थे पुष्पेंद्र बहादुर सिंह जिनहे भल्ला साहब के स्थान पर मेने यूनियन प्रेसिडेंट चुनवाया था। पांडे जी के श्वसुर साहब हाई कोर्ट के न्याधीश थे। हालांकि पांडे जी आगरा से चले गए थे। उनसे भी संपर्क साधा।

पद्मा शंकर पांडे 

पद्मा शंकर पांडे जब मुगल आगरा आए तो डी एम आवास मे रहते थे। जिलाधिकारी श्री विनोद दीक्षित उनके बड़े भाई के साले साहब थे। श्री दीक्षित एमेर्जेंसी के समय गृह मंत्री रहे श्री उमा शंकर दीक्षित के पुत्र थे। पांडे जी से मिलने उनकी पत्नी श्रीमती शीला दीक्षित (अब दिल्ली की मुख्यमंत्री) अक्सर होटल मुगल आती रहती थी। वैसे महिला कार्यक्रमों और कांग्रेस के कार्यक्रमों मे भी आने पर वह पांडे जी से भेंट अवश्य करती थी। I A S से रिजायींन  करके वह कांग्रेस मे सक्रिय थी। एक बार पांडे जी के इन्तजार मे वह होटल की बाउंड्री दीवार पर बैठ गईं थी जिसे उनकी सादगी माना गया था।  जब दीक्षित जी बाराबंकी स्थानांतरित हो गए तो उन्होने वहा की सोमैया आर्गेनिक क मे लाइजन आफ़ीसर के पद पर पांडे जी की नियुक्ति करा दी। पांडे जी का इंटरव्यू लेने अधिकारी होटल मुगल आया था। जब जनता सरकार मे दीक्षित जी गोरखपुर स्थानांतरित हो गए तो पांडे जी को हटा दिया गया था।

जब सांसद संदीप दीक्षित (दिल्ली की मुख्य मंत्री के पुत्र) 10 वर्ष के थे अपने बाबाजी उमाशंकर दीक्षित के साथ उसी रेल से यात्रा कर रहे थे जिसमे उनके पिता विनोद दीक्षित सरकारी यात्रा पर थे। बाबा-पोता घर पहुँच गए और विनोद दीक्षित का कोई अता-पता नहीं चला तो पूर्व गृह मंत्री अपने पुत्र को खोजने पुनः स्टेशन पहुंचे जहां पता चला कि विनोद दीक्षित बंद  टाइलेट मे मृत पाये गए।

उमाशंकर दीक्षित जी की मृत्यु के बाद से शीला दीक्षित ज्यादा सक्रिय हो गईं और अब तीसरी बार दिल्ली की मुख्यमंत्री है एवं कामन वेल्थ खेलों मे उन पर कीचड़ उछला है जिसे उनके सांसद पुत्र संदीप ने अन्ना -आंदोलन मे मध्यस्थता करके अन्ना-जल से धो डाला है। कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति मे संदीप दीक्षित,शीला दीक्षित और मनमोहन सिंह जी उस तरफ हैं जो सोनिया जी की अनुपस्थिति मे बनी 4 सदस्यीय कमेटी को नीचा दिखाना चाहते हैं। इनही लोगों ने किरण बेदी,अरविंद केजरीवाल के माध्यम से अन्ना साहब को भूख हड़ताल करने को प्रेरित किया था जिससे घपले-घोटालों ,मंहगाई (पेट्रोल,डीजल,गैस की मूल्य वृद्धि से जो तब बढ़ायी गई जब बंगाल से बामपंथी शासन समाप्त हो गया),शोषण-उत्पीड़न,बेरोजगारी,किसानों की आत्म-हत्याओं ,पासको को उड़ीसा की उपजाऊ भूमी 50 वर्ष के लिए देने के गैर कानूनी कृत्य आदि से जनता का ध्यान हटाने मे इस गुट को भारी सफलता मिली जिसके लिए अमेरिका की कार निर्माता क के फोर्ड फाउंडेशन ने खजाना खोल रखा था। कारपोरेट घरानों और साम्राज्यवादी हितों के संरक्षण मे अन्ना आंदोलन ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। 


बेहद दुखद बात है कि साम्राज्यवादी और कारपोरेट हित-साधन को आम जनता की जीत बताया जा रहा है। आम जनता जो गरीब एवं मेहनतकश है मजदूरी करके गुजारा करती है उसे अन्ना आंदोलन से कोई राहत नहीं मिल सकती। जब तक धर्मों और जातियों के नाम पर समाज मे वर्गीकरण रहेगा और साधन-सम्पन्न लोग गरीबों का शोषण-उत्पीड़न जारी रखेंगे भ्रष्टाचार को खत्म कैसे माना जाये और अन्ना की थीम मे इसका कोई जिक्र नहीं है। अन्ना आंदोलन ने राष्ट्रीय स्वाधीनता दिवस पर ब्लैक आउट रखवाया,राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया,संविधान और संसद को चुनौती दी,किन्तु प्रधानमंत्री के वरद-हस्त के कारण इन राष्ट्र-द्रोहीयों के विरुद्ध कोई कारवाई नहीं हुयी। 

बहरहाल तमाम खोजबीन के बाद भी ईमानदार वकील की खोज पूरी नहीं हो पायी और फिलहाल इस वर्ष होटल मुगल पर केस नहीं दायर कर सके। लेकिन............


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1 टिप्पणी:

  1. गुरूजी प्रणाम - यही वजह है की आज प्रधान मंत्री जी , अन्ना को फूलो का गुलदस्ता भेजा है !

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