शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

आगरा/1994 -95 /भाग-13 (माईंजी के आने पर )

.... पिछले अंक से जारी ....

रात को माईंजी ने फिर कई बार PCO पर मुझे भेज कर विष्णू को फोन करने को कहा। जो नंबर उन्होने दिया उस पर कोई और उठाता था और विष्णू को जानने से इंकार करता था। दिन का तो भुगतान माईंजी ने सब कर दिया था,इस वक्त मेरे रुपए बर्बाद हो रहे थे। यशवन्त हर बार मेरे साथ जाता रहा। इस प्रकार अजय,उनकी श्रीमती जी और माईंजी को एकान्त गुफ्तगू का पर्याप्त समय मिलता रहा क्योंकि वह नंबर पहले तो मिलता ही बड़ी मुश्किल से था। अंततः माईंजी खुद PCO जाकर खुद विष्णू से बात करके आईं ,कहा तो यही कि उसी नंबर पर विष्णू ने उठाया परंतु मुझे शक है कि उन्होने मुझे गलत नंबर देकर ही हर बार भेजा था जो कोई दूसरा आदमी उठाता था।

माईंजी ने सोते समय मुझे बताया कि वह अगले दिन सुबह 05 बजे की बस पकड़ेंगी और मुझे बिजली घर बस स्टेंड पर मोपेड़ द्वारा उन्हें छोडने जाना था। सुबह चार बजे जाग कर अजय की श्रीमती जी ने भिंडी की सब्जी और पूरियाँ सेंक दी और यशवन्त के एक पुराने टिफिन बाक्स मे रख कर माईंजी को भोजन दे दिया। यशवन्त तो उतने तड़के सो ही रहा था,मै माईंजी को 05 बजे वाली बस पर बैठा आया और पहुँचने की सूचना देने का पत्र भेजने का अनुरोध किया। परंतु माईंजी ने फिर मुझसे कोई सम्पर्क नहीं रखा। 09 बजे अजय ने अपना फैसला सुनाया कि वह भी शाम को फरीदाबाद लौट रहे हैं। मैंने कहा परसों तो तुमने नरेंद्र मोहन जी (उनके साले )के कहने पर कार से जाने से भी इंकार कर दिया था अभी भी कमजोरी है,अचानक फैसला कैसे किया?वैसे वह फैसला अचानक नहीं था एक दिन पूर्व मुझे PCO पर अटका कर माईंजी द्वारा उनसे किए गए वार्तालाप का परिणाम था। अजय जिद्द पर अड़ गए कि वह आज ही जाएँगे। अपने साथ शाम का खाना भी न ले गए। उस दिन के बाद से आज तक कोई सम्पर्क भी नहीं रखा है। यही वजह है कि लखनऊ मे माईंजी के भी कहीं होने की सूचना पर मैंने 09 अक्तूबर 2009 को लखनऊ आने के बाद भी उनसे सम्पर्क करने का कोई प्रयास नहीं किया है। उनके  द्वारा मुझसे सम्पर्क करने का प्रश्न कहाँ है ?जबकि अजय का ही मुझसे सम्पर्क तुड़वा रखा है। उनके पुत्र विष्णू डॉ शोभा की छोटी और खोटी बेटी (जिसने फेक आई डी के जरिये कई ब्लागर्स को मेरे व यशवन्त के विरुद्ध गुमराह कर रखा है जिनमे वर्तमान  मे उसी के शहर पूना स्थित एक ब्लागर प्रमुख हैं)के विवाह मे कानपुर मे जूलाई 2006 मे मिले थे और एक ही बार बोले थे फिर दूर-दूर रहे।

अजय और उनकी श्रीमती जी ने पटना के सहाय साहब के पत्र का ज़िक्र माईंजी से किया होगा। माईंजी के इच्छा व्यक्त करने पर वह पत्र माईंजी को दिखा दिया था और मैंने क्या जवाब भेजा वह भी बता दिया था। उस पर माईंजी की प्रतिक्रिया थी कि इतनी पढ़ी-लिखी लड़की से शादी न करो। किसी गरीब और नीडी लड़की से शादी करो जो ज्यादा से ज्यादा हाई स्कूल पास हो। शायद अजय और कमलेश बाबू द्वारा उत्तर देने से मेरे द्वारा रोके जाने की यह प्रतिक्रिया थी।मैंने उनको स्पष्ट किया कि मै खुद पुनः विवाह के ही पक्ष मे न था। यशवन्त ने बाबूजी से एक पोस्ट कार्ड डलवा दिया था जिसके जवाब मे यह पत्र आया है और यदि यहाँ  बात नहीं बनती है तो मै विवाह नहीं करने जा रहा हूँ। चूंकि बात यहाँ बाबूजी चला गए हैं एवं बउआ -बाबूजी दोनों ने समर्थन किया था इसलिए उनके प्रति सम्मान भाव के कारण मैंने उत्तर भेज दिया था। माईंजी को समझ आ गया था कि उनकी दाल नहीं गलेगी । इसलिए खुद भी और अजय को  भी मुझसे  सम्पर्क न रखने का निर्णय किया होगा। 

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1 टिप्पणी:

  1. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से शुभकामनाएँ।

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