गुरुवार, 24 जनवरी 2013

21 दिसंबर 12 और 23 जनवरी 13 की दास्तान---विजय राजबली माथुर

21 दिसंबर 2012 को माया केलेनडर के अनुयायी 'जियो टी वी' आदि ने 'प्रलय दिवस' के रूप मे प्रचारित कर रखा था।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ,लखनऊ के ज़िला मंत्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ साहब ने इसी दिन अपनी एक पुत्री की शादी की सायत रखी थी।   उससे एक  दिन  पूर्व रात्रि से ही मौसम मे अचानक ठंड काफी बढ़ गई थी सुबह काफी घना कोहरा था किन्तु बाद मे दिन मे धूप अच्छी हो गई थी। शाम को उनके यहाँ कार्यक्रम  मे आए कई कामरेड्स से मुलाक़ात हुई। प्रदेश के एक पदाधिकारी साहब मुझ से ज्योतिष के प्रश्न पर वार्ता करने लगे। ज्योतिष विरोधी यह कामरेड कुछ ही दिन पूर्व अपनी पुत्री के विवाह हेतु मुझसे ज्योतिषीय परामर्श ले चुके थे और उसका लाभ भी उठाया था। उनकी सफाई थी कि,एक कम्युनिस्ट होने के नाते उनका ज्योतिष पर विश्वास नहीं है परंतु लड़के वालों की इच्छानुरूप जन्मपत्री देनी होती है। 

मैंने उनको उपरोक्त संदर्भित लिंक पोस्ट का हवाला देकर बताया कि हम भी अंध-विश्वास-पाखंड और ढोंग का प्रबल विरोध करते हैं किन्तु ग्रह-नक्षत्रों के वैज्ञानिक प्रभाव को नकारना मानव अहित मे मानते हैं। तब उन्होने एक अलग कहानी बता कर उनके द्वारा ज्योतिष का विरोध करने की प्रवृत्ति को जायज ठहराया। उनका कथन था कि जब उनके बाबाजी (grand father)का देहावसान हुआ तब वह दो-ढाई वर्ष के थे और उनके पिताजी अवैतनिक छुट्टी पर रह कर लखनऊ मे उनका इलाज करा रहे थे और उस वक्त उनकी जेब मे मात्र एक रुपया ही शेष था। चूंकि उनके बाबाजी तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्र भानु गुप्त जी तथा IAS/IPS अधिकारियों के गुरु रहे थे अतः वे सब प्रतिदिन बलरामपुर अस्पताल मे उनको देखने आते रहते थे और व्यवस्था कराते रहते थे। उनकी अंतिम क्रिया की व्यवस्था भी प्रशासनिक तौर पर हुई। इस घटना के बाद उन पदाधिकारी साहब के पिताजी ने ब्राह्मण वंश मे होते हुये भी तेरहन्वी आदि कुसंस्कारों का परित्याग करके सदा के लिए 'धर्म-कर्म' को त्याग दिया था वह खुद भी उसी परंपरा का अनुसरण करते हुये ही कम्युनिस्ट बने हैं। 

चाहें कम्युनिस्ट हों या और कोई प्रगतिशील या वैज्ञानिक धर्म को अफीम कहते हैं। नतीजा यह होता है कि,'धर्म' जिसका आशय शरीर और ज्ञान को धारण करना है यथा- 'सत्य,अहिंसा (मनसा-वाचा-कर्मणा),अस्तेय,अपरिग्रह,ब्रह्मचर्य' को वे ठुकरा देते हैं और असफलता का सामना करते हैं जैसा कि 1991 मे रूस मे साम्यवादी शासन के पतन से सिद्ध हो जाता है। भारत मे भी 'स्टालिन' की सलाह की उपेक्षा करके वे रूसी लकीर के फकीर बने चले आ रहे हैं। इस सब का दुष्परिणाम यह होता है कि शोशंणकारी/उत्पीडंनकारी शक्तियाँ जनता के समक्ष 'ढोंग-पाखंड-आडंबर' को धर्म के रूप मे पेश करके उसे उल्टे उस्तरे से मूढ़ने मे सफल हो जाती हैं।  

यदि जनता को वास्तविक धर्म और वास्तविक 'भगवान'=भ (भूमि)+ग (गगन-आकाश)+व (वायु-हवा)+I(अनल-अग्नि)+न(नीर-जल) जो खुद ही बने होने के कारण ' खुदा' कहलाते हैं और उत्पत्ति,स्थिति,संहार = G(जेनरेट)+O(आपरेट)+D(डेसट्राय) की प्रवृत्ति के कारण GOD भी कहे जाते हैं के बारे मे समझाया जाये तो वह व्यापारियों/उद्योगपतियों के ढोंगवाद को धर्म के धोखे मे न पूजे। किन्तु साईंसदा/प्रगतिशील कहलाने वाले लोग ही पाखंड और ढोंग के लिए खुला मैदान छोड़े रख कर उसे पोसते हैं।

23 जनवरी 2013 को मुझे सोशलिस्ट फाउंडेशन के अध्यक्ष और फारवर्ड ब्लाक के प्रदेशाध्यक्ष महोदय ने तीन विद्यालयों मे 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस'के विषय मे अपने लेख से परिचित कराने को कहा था। 

जिस दिन मैंने उनको कार्यक्रम मे भाग लेने की सहमति दी उसी दिन रात्रि 08-30 बजे एक पुराने क्लाईंट 23 जनवरी 2013 को ही अपने मकान का गृह-प्रवेश हवन मुझसे करवाने का आग्रह लेकर आए। यह मुहूर्त उन्होने एक कांग्रेसी सांसद के पुरोहित से निकलवाया था जो उनके लिए उचित भी नहीं था किन्तु वह सबको निमंत्रण पत्र भेज चुके थे। अतः उस दिन उनके लिए शुभ समय चुन कर उनको हामी भर दी जिसके लिए 'नेताजी सुभाष' के कार्यक्रमों को छोड़ने का खूब मलाल रहा। हमेशा ढंग से नियमानुसार हवन करने वाले उन साहब ने बहुत महत्वपूर्ण हवन भी अनमनेपन से किया ,मेरे बताने के बावजूद मेरी राय की उपेक्षा करके उन्होने अपने निवास मे 'मंदिर' भी बनवा कर खुद ही वास्तु-विकार भी उत्पन्न कर रखा है। अपने कर्मों का मर्म वे ही जानें मैंने अपनी ओर से पूर्ण विधि-नियमों के अनुसार उनका हवन सम्पन्न करा दिया है। 

उनके पिताजी ने अपने जीवन की कारुणिक गाथा का ज़िक्र मुझसे निजी वार्ता मे  किया कि उनकी 06 वर्ष की आयु मे उनके पिताजी (अर्थात क्लाईंट के पितामह) का निधन हो गया था वह श्रम-मजदूरी करते थे और उनके निधन के बाद उनकी माताजी ने बड़े कष्टों से उन लोगों को पाला-पोसा और पढ़ाया। बड़े होने पर उनको खुद भी रात्रि मे मजदूरी करके दिन मे अपनी पढ़ाई जारी रखनी पड़ी। LLb करके वह न्यायिक सेवा मे आ गए तथा हाई कोर्ट ,अलाहाबाद से सेवा निवृत होने के बाद भी 72 वर्ष की आयु तक विभिन्न आयोगों के सदस्य के रूप मे अपनी सेवाएँ प्रदान करते रहे। उनके तीनो  पुत्र क्रमशः डाक्टर,एस पी,इंजीनियर हैं। पुत्रियाँ भी अच्छे खानदानों मे हैं । वह इस सब को अपने लिए परमात्मा की कृपा-प्रसाद मानते हैं। अपने बचपन मे जो कठोर श्रम और अध्यन उन्होने किया उसका प्रतिफल उनकी संतानों को भी मिल रहा है उनके अनुसार यह सब उनकी ईमानदारी का प्रतिफल है। उनके जीवन से प्रेरणा ग्रहण की जा सकती है।

Link to this post-



शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

बात की बात कि बेबात की फिक्र ---विजय राजबली माथुर

 पिछली पोस्ट  मुझे एक ब्लागर साहब द्वारा ब्लाग से हट कर फेसबुक पर सक्रिय होने की बात पर लिखनी पड़ी थी तो यह पोस्ट भी उनके एक पोस्ट मे -नीचे लिखे इनवर्टेड कामा वाले वाक्यांश पर ही आधारित है।
" एक तो वैसे ही एक पोस्ट लिखने में घंटों ख़राब हो जाते हैं, फिर पढने वाले भी जब ज्यादा नहीं मिलते तो लो कॉस्ट बेनेफिट रेशो देखकर दम ख़म ही ख़त्म सा हो जाता है।"वाक्यांश से सिद्ध होता है कि जो लोग ब्लाग लेखन वाह-वाही बटोरने मात्र के लिए करते हैं उनके लिए फेसबुक पीड़ादायक है। ठीक भी है-'जाकी रही भावना जैसी,प्रभू तिन्ह मूरत तीन तैसी।'
फेसबुक और फेसबुक ग्रुप्स तो ब्लाग-पोस्ट पर विजिट बढ़ाने मे खासे कारगर सिद्ध हुये हैं बशर्ते कि ब्लाग पोस्ट जनहित मे हो तो।
Unlike · · Promote ·
 वाहवाही के ख़्वाहिशमंद लोग वाहवाही न मिलने पर हताश व निराश हो सकते हैं परंतु यदि उद्देश्य वाहवाही न बटोरना होकर केवल जनहित हो तो कहीं भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। स्वार्थी और चापलूस लोगों की राय पर किसी लेखक को क्यों निर्भर करना चाहिए?ब्लाग और फेसबुक की वरीयता या श्रेष्ठता का झगड़ा ही क्यों?जिस प्रकार 'चाकू-knife'एक डॉ के हाथ मे सर्जक है लेकिन एक डाकू के हाथ मे जानलेवा तो दोष 'चाकू' का नहीं उसके प्रयोग कर्ता का होगा ठीक उसी प्रकार ब्लाग/फेसबुक के उपयोगकर्ता की मानसिकता पर सदुपयोग/दुरुपयोग निर्भर है न कि किसी की श्रेष्ठता और किसी की निकृष्टता पर। लेखक की शब्दावली नहीं उसके चरित्र पर ध्यान दें।

Unlike · · · · Promote

  • Salahuddeen Ansari vijay rajbali ji, aapney bilkul theek farmaya. Upkarno ko dosh detey hein aur nirantar unka galat prayog kar sahi parinamo ki asha kartey hein.


  • Bechu Giri mathur sahab , aapne bilkul thik likha hai lisi bhi masale me dosh sadhan ka nahi sadhak ka hota hai ki vah kishke liye tatha kiski keemat par sadhan ka estemal kar raha hai.
    14 minutes ago · Unlike · 1



    दोस्तों
    मेरे वर्ड प्रेस ब्लॉग पर एक अश्लील पोस्ट मेरी नज़र मे आई है। जो मेरी I D से प्रकाशित है।

    इस ब्लोग पर अधिकतर पोस्ट्स मैं ई मेल के द्वारा प्रकाशित करता हूँ जिसका कोड मेल की कोंटेक्ट लिस्ट में भी एड है।

    वास्तव में कई दिन से मुझे इस बात का शक है कि मेरी जी मेल आई डी को हैक करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कौन लोग ऐसा कर रहे हैं या कर सकते हैं इसकी भी मुझे जानकारी होती जा रही है।

    फिलहाल वर्डप्रेस पोस्टिंग कोड और ई मेल पासवर्ड मैंने बादल लिया है पोस्ट को वर्डप्रेस को भी रिपोर्ट कर दिया है

    पाठकों को हुई असुविधा के लिए मुझे बहुत खेद है।

    यशवंत माथुर
    Unlike · · · 18 minutes ago ·

    • You, Sanjog Walter and 2 others like this.
    • Yashwant Mathur यह संभवतः ट्रायल है तभी ब्लॉग्स्पॉट पर ऐसी ओछी हरकत नहीं हुई है। सुरक्षा के मेरे उपाय जारी हैं।
    • Chandrakanta Ck ओह!अब ऐसे गंभीर मंच को भी अपनी खुराफाती गतिविधियों का अड्डा बनाने में जुट गए हैं कुछ लोग ..
      • Vijai RajBali Mathur जहां तक संभावना है इस प्रकार की बेहूदा हरकतों के पीछे पूना प्रवासी भ्रष्ट-धृष्ट ब्लागर के चमचा ब्लागर्स का हाथ हो सकता है।

        उक्त बुद्धिमान ब्लागर साहब को गुमान है कि ब्लाग लेखक फेसबुक लेखक के मुक़ाबले गंभीर और परिपक्व होते हैं उनकी जानकारी के लिए 'यशवंत' के इस फेसबुक स्टेटस को उद्धृत कर रहा हूँ कि,किस प्रकार ब्लाग लेखक निकृष्ट धृष्टता करते हैं जबकि ब्लाग पर उसे रोकने की कोई व्यवस्था भी नहीं है । इसके मुक़ाबले फेसबुक पर धृष्टता करने वाले को 'ब्लाक' किए जाने की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त जो सच्चाई है वह यह है कि,-
        Blog and Face book are  supplementary and complimentary  to each other. 

        हम ब्लाग  पोस्ट को फेसबुक और इसके विभिन्न ग्रुप्स मे लिंक देकर अधिक से अधिक लोगों की जानकारी मे पहुंचा सकते हैं जबकि केवल ब्लाग लेखन केवल ब्लाग लेखकों तक ही सीमित रह जाता है। 
        पूना प्रवासी भ्रष्ट-धृष्ट ब्लागर द्वारा मुझसे खुद चार जन्मपत्रियाँ निशुल्क प्राप्त करने के बाद 'रेखा जी' के राज्यसभा मे मनोनीत होने पर मेरा आंकलन सही सिद्ध होने पर मेरे ज्योतिष ज्ञान के  विरुद्ध अपने चमचा ब्लागरों से   
        आधारहीन ब्लाग पोस्ट लिखवाये गए हैं जिनमे ज्योतिष को मीठा जहर और 100 प्रतिशत झूठा बताया गया है। यशवंत के विरुद्ध भी सुनियोजित षड्यंत्र चलाये जा रहे हैं उपरोक्त उद्धृत वारदात भी उसी की एक कड़ी प्रतीत होती है। तो यह है ब्लाग लेखको की घृणित करतूतें जिनकी सराहना वह बुद्धिमान ब्लागर साहब करते हैं वैसे अपनी पोस्ट मे उन साहब ने पूना प्रवासी उस भ्रष्ट-धृष्ट ब्लागर की भी अपार प्रशंसा की थी।  

Link to this post-



गुरुवार, 3 जनवरी 2013

डॉ दराल साः को खुला पत्र ---विजय राजबली माथुर

विगत वर्षों की भांति इस बार मैंने अन्य ब्लाग्स व ब्लागर्स के संबंध मे अपना अवलोकन नहीं दिया था और देना भी नहीं चाहता था परंतु डॉ टी एस दराल सा :  ने अपने अवलोकन के एक खंड की अंतिम पंक्तियों मे मेरा उल्लेख किया है जिसका उत्तर मैंने अपनी टिप्पणी के रूप मे उस लेख पर इस प्रकार दिया था---

================================
हम से है ज़माना : दिनांक 28-12-2012

अत्यंत गुणवान और क्रातिकारी विचार रखने वाले श्री विजय माथुर जी के विचारों को लोग कम ही समझ पाते हैं. इसलिए वे अब ब्लॉग पर कम और फेसबुक पर ज्यादा नज़र आते हैं.     
विजय राज बली माथुरJanuary 01, 2013 6:47 PM
धन्यवाद डॉ साहब। वैसे मैं ब्लाग्स ('क्रांति स्वर','विद्रोही स्व-स्वर मे','कलम और कुदाल','जनहित मे'लगातार सक्रिय हूँ और श्रीमती जी के ब्लाग 'पूनम वाणी' की टाईपिंग भी खुद ही करता हूँ। शायद विवादों से बचने के कारण ब्लाग्स पर टिप्पणियाँ देने से संकोच करता हूँ इसीलिए आपने ऐसा निष्कर्ष निकाला होगा।
सुंदर है,वाह-वाह,खूब बढ़िया जैसे लच्छेदार शब्द मेरे पास नहीं हैं और लोगों को इनकी ही ख़्वाहिश रहती है अतः टिप्पणी देने से बचने लगा हूँ। 

=========================

इसी खंड की पाँचवी पंक्ति मे डॉ साहब ने उल्लेख किया है-"रश्मि प्रभा जी की प्रभावशाली रचनाएँ अभी भी मन मोह रही हैं "
===========

मैंने ब्लाग लेखन के प्रारम्भ मे ही घोषणा की हुई है कि।मेरा लेखन-'स्वांतः सुखाय,सर्वजन हिताय' है। मैंने टिप्पणी बाक्स के ऊपर ही यह भी घोषणा की थी कि 'यह ब्लाग टिप्पणियों का मोहताज नहीं है'। अतः डॉ साहब का यह आरोप कि-"श्री विजय माथुर जी के विचारों को लोग कम ही समझ पाते हैं. इसलिए वे अब ब्लॉग पर कम और फेसबुक पर ज्यादा नज़र आते हैं. "-  मेरी समझ से बाहर है। मैंने अपने एक लेख मे खुद ही स्पष्ट लिखा था कि मैं जानता हूँ कि हमारे समकालीन लोगों को मेरे विचार अच्छे नहीं लगेंगे किन्तु मैं आने वाली पीढ़ियों के हितार्थ अपना लेखन करता हूँ और करता रहूँगा। मैं टिप्पणियों को लेन-देन  की धारणा से नहीं देखता हूँ यदि किसी के विचार अच्छे हैं तो निसंकोच अपनी समझ के अनुसार उसका उल्लेख करता हूँ अन्यथा अपना दृष्टिकोण भी बता देता हूँ किन्तु लेखक को संतुष्ट करने हेतु ख्वाम खाह की झूठी तारीफ़ों के पुल नहीं बांधता हूँ जैसा कि ब्लाग जगत का प्रचलन है। ब्लाग जगत मे कुछ लेखक खुद को खुदा और दूसरों को तुच्छ समझते हैं यही सबसे बड़ा कारण है कि मैंने टिप्पणियाँ देना बंद कर दिया है जिससे डॉ साहब ने यह निष्कर्ष निकाल लिया कि मैंने ब्लाग अध्ययन कम कर दिया है । बात जहां तक फेसबुक की है मैं उसे ब्लाग के 'पूरक'के रूप मे लेता हूँ। फेसबुक ग्रुप्स के माध्यम से काफी ज़्यादा लोगों तक ब्लाग मे व्यक्त विचारों का प्रसारण सुगमता से हो जाता है जबकि केवल ब्लाग जगत के आसरे रहने पर बात कुछ ही लोगों तक पहुँच पाती थी और फिर ब्लागर्स अपने थोथे  अहम व पूर्वाग्रहों  के कारण उसे ठुकरा देते थे। ब्लाग्स के संबंध मे अपनी पुस्तक'मीडिया समग्र' मे प्रो .डॉ जगदीश्वर चतुर्वेदी जी ने लिखा है-
"दसवां खण्ड- ब्लॉग संस्कृतिःतमाशबीनों की दुनिया"
वस्तुतः अधिकांश ब्लाग-लेखक तमाशबीन के तौर पर ही लिखते और एक-दूसरे की झूठी पीठ थपथपाते रहते हैं। मैं इस भेड़-चाल से बहुत दूर हूँ इसीलिए ब्लाग से दूर नज़र आता हूँ। फिर फेसबुक मे यह भी सुविधा है कि जिनसे हमे असुविधा है उनको हम अंफ्रेंड/ब्लाक करके छुटकारा पा सकते हैं किन्तु ब्लाग्स मे ऐसा करना शायद संभव नहीं है। 

डॉ साहब ने जिन नामों का उल्लेख किया है उनमे से डॉ दिव्या श्रीवास्तव व पी सी गोदियाल  जी की इसलिए प्रशंसा कर सकता हूँ कि वे राजनीतिक रूप से मुझसे 180 डिग्री के फासले पर होते हुये भी अभद्र व अश्लील भाषा के प्रयोग से बचे रहे हैं। अतः एक-दूसरे के लेखन पर टिप्पणियाँ न करना ठीक भी है और संतुलित भी। 

जिन राज भाटिया साहब का डॉ साहब ने उल्लेख किया है उन्होने  'हज़ारे आंदोलन' के दौरान फेसबुक पर मुझे 'नान-सेंस'तथा इंजीनियर सतीश सक्सेना साहब ने 'वाहियात' कह कर संबोधित किया था अतः उन दोनों को ब्लाक करके उनके ब्लाग्स अनफालों कर दिये थे। बाद मे सक्सेना साहब ने ईमेल के जरिये अपने बेटे व बेटी की एंगेजमेंट तथा शादियों पर उनके लिए आशीर्वाद देने को कहा था तो उन बच्चों को ईमेल के मार्फत शुभकामना व आशीर्वाद प्रेषित कर दिया था। एक और हरफन मौला ब्लागर मृत्युंजय कुमार राय की उस लेख पर टिप्पणी मौजूद है उनके व उनके बेटे माधव के ब्लाग्स भी अनफालों व उन दोनों को भी ब्लाक इसलिए करना पड़ा क्योंकि राय साहब ने मुझे 'बंगाल की खाड़ी मे डुबो देने' का ऐलान किया था।

ब्लाग जगत के केवल ये ही नमूने नहीं हैं। डॉ साहब का कहना है-"रश्मि प्रभा जी की प्रभावशाली रचनाएँ अभी भी मन मोह रही हैं "

(रश्मि प्रभा...Apr 27, 2012 07:21 AM कब मैं हिट होउंगी ... और राज्य सभा की सदस्य बनूँगी - आईला

Replies
महेन्द्र श्रीवास्तवApr 27, 2012 11:00 AM
आप जल्दी राज्यसभा में पहुंचें, मेरी भी शुभकामना है)"
प्रस्तुत टिप्पणी के माध्यम  से  'रश्मि प्रभा जी  ने ' ब्लाग जगत मे अपने चमचा ब्लागर्स के जरिये मेरे विरुद्ध अनर्गल और अबाध अभियान चलाया था जो अभी भी गतिमान है वह भी तब जबकि रश्मि प्रभा जी ने चार जन्म पत्रियों  का निशुल्क विश्लेषण मुझसे प्राप्त किया है और उनकी शिष्या ने भी चार जन्म पत्रियों का निशुल्क ही विश्लेषण प्राप्त किया है। 'हवन','ज्योतिष' आदि को निशाना बना कर लेख व टिप्पणियाँ खुले आम लिखे गए हैं। दूसरे ब्लागर्स की पोस्ट तक इन लोगों ने डिलीट कराई हैं अपने चमचों के द्वारा मुझे सपरिवार नष्ट करने की धमकियाँ दिलवाई हैं और वह खुद तांत्रिक प्रक्रियाओं से मेरे विरुद्ध षड्यंत्र चला रही हैं । जिन रश्मि प्रभा जी ने अपने  प्रबल चमचा ब्लागर से ब्लागर सम्मेलन के संयोजक ब्लागर रवीन्द्र प्रभात जी की कड़ी निंदा करवाई थी उनही के अगले आयोजन की अब निर्णायक बन गई हैं । उनके सह-संयोजक डॉ ज़ाकिर अली रजनीश जी से ज्योतिष को 100 प्रतिशत झूठा सिद्ध करवाया है। 

 ऐसे ब्लागजगत के लोगों से यदि 'टिप्पणियात्मक संबंध' मैंने सीमित कर दिया है तो गलत क्या किया है?यदि डॉ साहब को लगता है कि मैं ब्लाग जगत को कम समय दे रहा हूँ तो उसका कारण मेरे द्वारा टिप्पणियाँ न लिखना ही है।

.

Link to this post-



मंगलवार, 1 जनवरी 2013

शासन,धन,ऐश्वर्य,बुद्धि मे शुद्ध-भाव फैलावे---विजय राजबली माथुर

अन्न,भूमि,गिरि,भानु,दिशाएँ,मेघ शुभंकर होवें। 

शांति-स्नेह,संतोष सुहावे,कलह-कालिमा धोवे। । 


पवन,प्रकाश,चंद्र,रवि भू पर दुख संताप नसावें। 

दिवस,प्रमोद-पूर्ण रजनी भी सुख-सौन्दर्य बढ़ावे। । 


(ऋग,मण्डल-7/सूक्त-35/मंत्र-3 एवं 4 )


निर्भय होकर पशु प्राणी जगती मे हर्ष मनावें। 

कर्म योनि को पाकर मानव निज कर्तव्य निभावें। ।


(यजु,अध्याय-36/मंत्र-8)


समस्त संसार के समस्त प्राणियों को वर्ष 2013 शुभ एवं मंगलमय हो

Link to this post-



गुरुवार, 27 दिसंबर 2012

मिलना जुलना कमजोरी नहीं (भाग-3)---विजय राजबली माथुर


 पिछले अंक से जारी .............

जब मैंने भोपाल या पटना के रिशतेदारों के साथ नहीं लखनऊ मे( यशवन्त की इच्छानुरूप आगरा के मकान को बेच कर)मकान ले लिया तो डॉ शोभा को जो पीड़ा हुई उसे उन्होने उजागर भी कर दिया था।मैं नहीं समझता कि मुझे अपने निर्णय छोटी बहन की इच्छानुरूप क्यों लेने चाहिए थे और पुत्र की इच्छा को क्यों ठुकराना चाहिए था?पूनावासी छोटी भांजी ने इस दरार को खाई मे बदलने मे कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। 06-10-2010 को प्रवासी ब्लागर  डॉ दिव्या श्रीवास्तव जी  ने एक पोस्ट यशवन्त के संबंध मे अपने ब्लाग मे दी थी तब मुक्ता(चंद्र प्रभा)ने पूना से फोन पर बताया था कि उसने डॉ दिव्या  का पूरा प्रोफाईल चेक किया है उसने तत्काल झांसी फोन करके शोभा को बताया था और कमलेश बाबू ने घबराहट भरे शब्दों मे विस्मय व्यक्त किया था।  ब्लागर्स प्रोफाईल  चेक करने मे उन लोगों द्वारा दी टिप्पणियों का मुक्ता ने सहारा लिया था और उसी क्रम मे पटना की मूल निवासी और विमान नगर मे उसकी पड़ौसन रही ब्लागर का भरपूर सहारा लिया। उक्त ब्लागर ने 'क्रांतिस्वर' मे प्रकाशित पूनम की एक कविता को 'वटवृक्ष' मे 19 नवंबर 2011 को प्रकाशित किया लेकिन धूर्ततापूर्वक ऊपर एक तमंचा का फोटो लगा दिया । पूनम को यह बात काफी अखरी थी लेकिन हमने तब विशेष रण-नीति के तहत विरोध नहीं जतलाया था। फिर उसके बाद 27 अप्रैल 2012 को उसी ब्लागर ने एक तीसरे ब्लाग पर मेरे ज्योतिषीय ज्ञान की खिल्ली उड़ाई और उस टिप्पणी को पिछले कई  पोस्ट मे भी  उद्धृत किया है।

 (रश्मि प्रभा...Apr 27, 2012 07:21 AM





कब मैं हिट होउंगी ... और राज्य सभा की सदस्य बनूँगी - आईला

Replies



आप जल्दी राज्यसभा में पहुंचें,
मेरी भी शुभकामना है)


मई 2012 के 'वटवृक्ष' के पृष्ठ 28 पर (जिसकी स्कैन कापी नीचे देखें) एक परिचर्चा उक्त ब्लागर ने बतौर संपादक दी थी।


पहली चर्चा जिस सौरभ प्रसून की है उससे उक्त ब्लागर को अपनी पुत्री का विवाह करना है।इसकी भी जन्मपत्री बनाने को ईमेल आया था और एक वर्ष के अंतर के दो डिटेल भेजे गए थे।  दूसरी चर्चा जिस छात्रा शिखा श्रीवास्तव की है उसकी जन्मपत्री द्वारा  अपने पुत्र मृगाङ्क से विवाह हेतु गुण मिलाने को मुझे  ईमेल पर कहा था। यह अलग बात है कि बाद मे फेक आई डी द्वारा उक्त ब्लागर ने शिखा के विरुद्ध इन्टरनेट जगत मे भारी अनर्गल दुष्प्रचार किया था।उक्त ब्लागर ने चार जन्मपत्रियों का निशुल्क परामर्श प्राप्त करने के बाद मेरे विरुद्ध घृणित अभियान अपने IBN7 वाले चमचे तथा और एक-दो लोगों द्वारा चलवा रखा है। 


इस क्रम मे तीसरी चर्चा मे यशवन्त का नाम क्यों और किस षड्यंत्र के तहत शामिल किया गया ?इस पर मुझे भारी आपत्ति है। जहां दो चर्चाए संपादक महोदया ने अपने परिवार से सम्बद्ध होने वालों की शामिल की थीं वहीं उनके साथ मेरे पुत्र यशवन्त की चर्चा क्यों और किस हैसियत से शामिल की गई?एक ओर तो मेरे तथा मेरी पत्नी के प्रति खौफनाक दृष्टिकोण और दूसरी ओर मेरे पुत्र को अपने खेमे मे दिखाना सरासर षड्यंत्र नहीं तो और क्या है?

इस षड्यंत्र मे वटवृक्ष के प्रधान संपादक और प्रबंध संपादक भी शामिल हैं अथवा केवल संपादिका की अपनी भूमिका है ?यह प्रश्न अभी अनुत्तरित है किन्तु रहस्य छिपा हुआ नहीं है। उक्त संपादिका ने अपने IBN7 वाले चमचा ब्लागर से (जिससे 27 अप्रैल को लेख लिखवाया तथा बाद मे 'ज्योतिष एक मीठा जहर')27 अगस्त 2012 के ब्लागर सम्मेलन के बाद 'वटवृछ' के प्रधान संपादक के विरुद्ध विष-वमन करवाया था लेकिन आज भी उनके साथ बतौर 'संपादक' डटी हुई हैं। हाल ही मे उस सम्मेलन के सहयोगी आयोजक ने अपने ब्लाग पर ज्योतिष के विरुद्ध एक लेख लिखा है और उस पर मेरे द्वारा की गई टिप्पणी का अभद्र जवाब दिया है। जबकि वही महाशय पहले मेरे 'क्रांतिस्वर' की समीक्षा 'जन संदेश टाईम्स' मे  मार्च 2011 मे निकाल चुके थे और उसे उन्होने अपने ब्लाग पर भी प्रकाशित किया था।किसी दूसरे ब्लागर से रचना चोरी के इल्जाम लगने  पर तब मुझसे अपने पक्ष मे टिप्पणी लिखने का अनुरोध किया था ,27 अगस्त के ब्लागर सम्मेलन मे भाग लेने हेतु 26 को उन्होने मुझसे फोन पर अनुरोध भी किया था ('वटवृक्ष'के प्रबंध संपादक ने भी 23 तारीख को फोन करके मुझसे उस सम्मेलन मे भाग लेने का अनुरोध किया था और आश्वस्त किया था की,"रश्मि प्रभा जी लखनऊ नहीं आ रही हैं")और अब  वह सह-संयोजक उस संपादिका के जाल मे उलझ कर मेरे ज्ञान को चुनौती दे रहे हैं। उनके प्रमाण पत्र की कोई आवश्यकता या अहमियत नहीं है।

एक सोची-समझी रण -नीति के तहत उक्त 'वटवृक्ष' की संपादक ब्लागर द्वारा मेरे ज्योतिषीय ज्ञान पर प्रहार लगातार किया जा रहा है। लेकिन क्या इससे मेरे ज्ञान को कुंद किया जा सकेगा?और इस धृष्ट अभियान का लाभ किसको मिलेगा?



Saturday, November 19, 2011


कुछ तो लगता है 

http://urvija.parikalpnaa.com/2011/11/blog-post_19.html








ख़ुशी में भय
और झूठ में ख़ुशी ...
इस बदली हवा ने सारे मायने बदल दिए हैं
सब उल्टा पुल्टा ही अच्छा लगता है !!!

रश्मि प्रभा

==========================================================
कुछ तो लगता है

त्योहारों से मुझे अब डर लगता है
बचपन बीता
सब कुछ सपना सा लगता है
रिश्ता एक छलावा लगता है..
छल-बल दुनिया के नियम
कौन किसका
सबको अब अपना अहम् अच्छा लगता है
ऊपर उठाना-गिराना अब यही सच्चा धर्म लगता है
खून-खराबा - अब यही धर्म सब को अच्छा लगता है
त्योहारों का मौसम है
सब को 'नमस्ते' कहना अच्छा लगता है
दुबारा न मिलने का यह संदेश अच्छा लगता है
राम-रहीम का ज़माना पुराना लगता है
बुजुर्गों का कुछ भी कहना बुरा लगता है
मारा-मारी करना अच्छा लगता है
खुदगरजी का जमाना अच्छा लगता है
नैनो से तीर चलाने का ज़माना अब पुराना लगता है
गोली-बारी चलाना अच्छा लगता है
भ्रष्टाचार और घूस कमाना अच्छा लगता है
बदलते दुनिया का नियम अच्छा लगता है
शोर-शराबा करना अच्छा लगता है
हिटलर और मुसोलिनी कहलाना अच्छा लगता है
हिरोशिमा की तरह बम बरसाना अच्छा लगता है
अब गांधी-सुभाष बनना किसी को अच्छा नही लगता है
शहीदों की कुर्बानी बेमानी लगती है
मैं ' आज़ाद हूँ
दुनिया मेरी मुट्ठी में है - कहना अच्छा लगता है
अपने को श्रेष्ठ ,दूसरे को निकृष्ट कहना अच्छा लगता है
चिल्लाना और धमकाना अच्छा लगता है
बेकसूर को कसूरवार बनाना अच्छा लगता है
न्यायालय में झूठा बयान देना अच्छा लगता है
औरों को सता कर 'ताज' पहनना अब अच्छा लगता है
झूठ को सच कहना अच्छा लगता है
दिलों को ठेस पहुंचाना अच्छा लगता है
किसी ने कहा-क्या शर्म नहीं आती
शर्म को ख़ाक करना अच्छा लगता है
अब यह सब करना ही अच्छा लगता है....





(पूनम माथुर)

Link to this post-



मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

मिलना जुलना कमजोरी नहीं है(भाग-2)---विजय राजबली माथुर

जारी---

बारह बरस पाईप मे सीधा रखने के बाद भी जो सीधा न रह सके कुछ उस तरह के लोग हैं ये पूना प्रवासी ब्लागर और उसके चमचे। 'जेवरी जले पर उसके बल न जले' भी एक पुरानी -प्रसिद्ध कहावत है जो इन लोगों पर हू-ब -हू लागू होती है। अपने तोड़-फोड़ अभियान के तहत उस पूना प्रवासी ने अपनी पटना स्थित शिष्य को 25 अप्रैल 2012 को हमारे घर मिलने-जुलने के नाम पर भेजा था लेकिन अब पता चला है कि उसका उद्देश्य हमारे मकान का वेल्यूएशन करना था । पू प्र का उद्देश्य यशवन्त को गुमराह कर आर्थिक क्षति पहुंचाना था जिससे कि हमे अपना यह मकान भी बेच कर उसे बचाना पड़े। इन लोगों का उद्देश्य हमे सड़क पर पहुंचाना था। यदि यह पहले आभास हो जाता तो 13-05-2012 को पटना मे सोनिया बहुखंडी गौड़ के घर न जाते और न ही 12 को उसके पति प्रदीप गौड़ से उनके आफिस मे मिलते। इस संबंध मे मेरे फोन पर जो sms आए थे उनका विवरण यह है-

"Aap kal jarur aayen.Kal aapki kitne b je ki train h?"12-05-2012 ,09-00-11 am--- प्रदीप गौड़ ने अपने आफिस मे 12 मई की साँय 05 बजे मिलने बुलाया था। ---

"Pls come around 5 pm ".12-05-2012 ,11-00-32 am ---
"Kab tak aayenge aap dono?"13-05-2012 ,08-15-08 am ---

पहले सोनिया बहुखंडी ने यशवन्त को पूना मे कोई सर्विस ज्वाइन करने को कहा था जिसे मेरे कहने पर उसने मना कर दिया था। फिर प्रदीप उसे अपने आफिस मे  रु 10000/-पर नियुक्ति दिलवा रहे थे। जिसके लिए भी मैंने टलवा दिया था। अगले दिन उनके निवास पर भी मैंने स्पष्ट कर दिया था कि यशवन्त की ख़्वाहिश पर ही हम आगरा से लखनऊ घाटे पर शिफ्ट हुये हैं अतः लखनऊ के बाहर जाब नहीं करने देंगे।

जब यशवन्त मेरठ से कानपुर 'बिग बाज़ार' मे ट्रांसफर लेकर आ गया था और हमे जल्द से जल्द लखनऊ आने को कह रहा था तब डॉ शोभा ने हमे फोन पर कहा था कि उससे कानपुर मे जाब छुड़वा दो और वह कमलेश बाबू के मित्र लिटोरिया बिल्डर के यहाँ लखनऊ मे जाब कर ले। मैंने उनके सुझाव को न मानते हुये जाब छुड़वाने के बाद घर पर ही उसे साईबर खुलवा दिया था जिसके सहारे ही हम लोग ब्लाग जगत से संपर्क स्थापित कर सके। तब डॉ शोभा की पूनावासी छोटी बिटिया( जो विमान नगर मे प्रवासी ब्लागर की पड़ौसन रही है)ने ब्लाग्स मे यशवन्त व मुझे प्राप्त टिप्पणियों के माध्यम से ढुलमुल-ढुलमुल ब्लागर्स को टटोल कर उन्हे हम लोगों के विरुद्ध उकसाया/भड़काया।
 
(रश्मि प्रभा...Apr 27, 2012 07:21 AM



कब मैं हिट होउंगी ... और राज्य सभा की सदस्य बनूँगी - आईला

Replies



आप जल्दी राज्यसभा में पहुंचें,
मेरी भी शुभकामना है)

 27-04-2012 से मेरे ज्योतिषीय आंकलन के सही सिद्ध  होने   से बौखला कर (19 को मैंने 'रेखा राजनीति मे आने की संभावना'लेख ब्लाग मे दिया और राष्ट्रपति महोदया ने उन्हे 26 को राज्यसभा मे मनोनीत कर दिया था  ) मेरे विरुद्ध पूना प्रवासी ब्लागर द्वारा एक मुहिम चलाई गई। तब पटना मे उसकी शिष्या सोनिया बहुखंडी ने हमसे उसकी आलोचना की थी और हमे मेसेज मे भी उसके विरुद्ध लिखा था जो सब धोखा देने हेतु था।


सोनिया बहुखंडी गौड़
  • मैं अभी भी नहीं समझ पा रही की रश्मि प्रभा जी ने खिल्ली उढ़ाई होगी आपकी किन्तु मैं आपके ज्ञान की पूरी पूरी इज्जत करती हूँ। आप लोग बात करें ना करें हमेशा करती रहूँगी। सादर

    सोनिया बहुखंडी गौड़
    • नहीं चाचा जी मैं उस समय वहाँ नहीं थी प्रदीप थे और ये मुझे कोई बात शेर नहीं करते मुझे सुंनकर बहुत बुरा लग रहा है। ये सच बात है मुझे मोटी मोटी बात पता थी अगर वो इतना गलत काम आपके संग कर रही हैं तो मैं उनके साथ मित्रता कैसे रख सकती हूँ। विश्वास करिए की मैं आपको वास्तव मे दिल से अच्छे संबंध की तरह देखती हूँ। हाँ यशवंत को ठगा ये बात मुझे पता थी। आपके मैसेज से मुझे बहुत ही अच्छे रिश्ते की पहचान हूइ। मुझे आभाष हो गया था की आपने ही यश को माना किया होगा। दिल से किसी को नहीं निकाला जा सकता ये भी मैं जानती हूँ। रश्मि जी ने जब मेरे से कविता मांगी थी तो मैंने यश से पूछा था अगर आप मन से मुझे बेटी मानते तो बोलते की कोई जरूरत नहीं। देने की.... बिना पिता की बेटी हूँ आपसे स्नेह मिला तो लगा पापा फिर से मिल गए। आप यश को रोक सकते हैं आपका बेटा है। मैं तो बस दो दिन की ही बहन बन पाई दुख हुआ दिल से। अगर लगे की मैं सच कह रही हूँ तो यश से कहना की मेरे से बात करे। frown आप लोगों की मुझे जादा जरूरत है नाकी रश्मि जी की

      सोनिया बहुखंडी गौड़
      • Mujhe unse koi profit nahi. Hindi yugm k publisher ne mujhe niji msg de kar gujarish ki thi review likhne k liye. Wo review apne aap me ek kataksh tha dronacharya wala ex. Jiska uttar aap ne apne cmnt me de diya tha. Eklavya ka. Aur adhikar aapka bhi kuch bhi kahne ka ek baar phn to karte aap daante mujhe. Aap logon ne to mera phn bhi nahi pick kiya


       पूना प्रवासी ब्लागर ने पूनम के भाइयों को भी क्षेत्रवाद और जातिवाद के आधार पर हमारे विरुद्ध कर दिया था इसका कुछ-कुछ आभास प्रदीप जी के अपने आफिस मे की गई  चर्चा से हो गया था। बालाघाट वाले उनके छोटे भाई जिनको डॉ शोभा बहुत  अच्छा बताती हैं उन्हें हवाई जहाज मे बैठा कर जल्दी से जल्दी  लखनऊ रवाना करने का दबाव अपने भाई-भाभी पर बना रहे थे। अतः एक बार फिर घर मे ताला लगा कर उन्हे लेने यशवन्त और मैं पटना गए किन्तु उनके घर नहीं गए। गोलघर(पैसे वालों को जूते की ठोकर और पटना का गोलघर)आदि मे समय व्यतीत कर दिया और उनके घर के बिलकुल निकट से पूनम को साथ ले लिया। चूंकि कमलेश बाबू के भतीज दामाद कुक्कू-शरद पार्सल बाबू के कारनामों के कारण उनसे संपर्क नहीं रखा था और खुद डॉ शोभा के द्वारा  अप्रैल 2011 मे यशवन्त  को 'पूत-कपूत' कहने के बाद  से उन लोगों से भी संपर्क नहीं था अतः उन लोगों ने पूना प्रवासी ब्लागर के माध्यम से पूनम के भाइयों को भी तोड़ लिया।हालांकि आगरा मे जब विकट आर्थिक स्थिति आ गई थी और मेरे पास कुल रु 2000/- मात्र ही शेष रह गया था( और हमारी छोटी बहन  डॉ शोभा हेल्प मांग लेने का आश्वासन आगरा फोर्ट स्टेशन पर जयपुर जाते समय देकर भी फोन पर मदद मांगने पर चुप्पी साध गईं थीं तब)पूनम द्वारा अपनी भाभी जी  से ज़िक्र करने पर उन्होने तत्काल रु 5000/- का ड्राफ्टभेज दिया था। यह अलग बात है कि हमे वे रुपए खर्च नहीं करने पड़े और हमे अपने मकान के सौदे का एडवांस मिल गया था फिर भी त्वरित सहायता हेतु उनके एहसान को भुलाया नहीं जा सकता।

आगरा छोडने से पूर्व 2009 मे पूनम के आग्रह पर हम लोग पटना गए थे तब उनकी आरा वाली चाची का व्यवहार खटकने वाला था जिनकी बेटी भी पूना मे ही रहती है और पूना प्रवासी ब्लागर से संबन्धित है। उसी के माध्यम से पूनम के बड़े भाई-भाभी के दिमाग मे क्षेत्रीयता और जातीय संकीर्ता का प्रवेश करवाया गया। लखनऊ आने के बाद से पूनम का लगातार आग्रह पटना मिलने जाने  को था अतः मई 2012 मे हम लोग उनको वहाँ छोडने गए थे जब बहुखंडी ने sms भेजकर बुलाया था।



लखनऊ आकर मिलने के क्रम मे बड़े ताऊजी की बेटियों मे सबसे छोटी जो मुझसे छह माह ही छोटी हैं के घर न जा सके थे तो पूनम के पटना से लौटने के बाद 02 अक्तूबर 2012 को उनके घर भी गए थे। हाई कोर्ट मे एडवोकेट उनके पति जिनहोने 1992 मे ऋषिराज की शादी के वक्त अपने घर आने को बहुत ज़ोर दिया था अब 20 वर्ष बाद बहुत बदले हुये थे या डॉ शोभा और उमेश की लामबंदी का यह असर रहा हो सकता है। 

'' न गरज है न मजबूरी है;मेल रखना क्या ज़रूरी है?" मेरा एक सिद्धान्त है जिस पर तब अमल करता हूँ जब कोई झुकाने-दबाने का प्रयास करता है अन्यथा निस्वार्थ भाव से मैं सबकी मदद करने को सदैव तत्पर रहता हूँ। पहले तो डॉ शोभा ने मुझको कहा था कि मैं या तो उनके भोपाल मे शिफ्ट करूँ या पूनम के पटना मे । स्वतंत्र रूप से लखनऊ मेरा आना उनको नागवार लगा और क्योंकि यशवन्त की ऐसी इच्छा थी इसलिए सारा हमला उसे ही फोकस करके किया गया और पूना प्रवासी ब्लागर के माध्यम से भी उसे क्षति पहुंचाने का प्रयास हुआ। चूंकि लखनऊ आने पर कमलेश बाबू के तमाम पोल-पट्टे खुल गए अतः वह शोभा से मेरे यहाँ आने का विरोध कराते रहे। कमल दादा और शैल जीजी ने शोभा के बारे मे जांनकारीया  दी थीं उन दोनों का निधन 2011 मे हो गया  और माधुरी जीजी ने कमलेश बाबू के बारे मे  जिंनका निधन जनवरी 2012 मे हो गया। इन लोगों की सोच है यदि मेरा भी  निधन हो जाये तो वे यशवन्त को आसानी से दबोच सकते हैं। पूना प्रवासी ब्लागर के IBN7 मे कार्यरत चमचा ब्लागर ने तो पूरे परिवार को उड़ा देने की धमकी सितंबर मे दी थी।

हमे मिलना जुलना और मेल रखना तो पसंद है परंतु झुक-दब कर नहीं। इस सन्दर्भ मे पहले भी बिजौली के क्रांतिकारी जन कवि 'विजय सिंह,पथिक' जी का यह प्रेरक वचन  प्रस्तुत कर चुका हूँ फिर से दोहरा रहा हूँ---

"यश -वैभव-सुख की चाह नहीं,परवाह नहीं जीवन न रहे। ।
इच्छा है यह है-जग मे स्वेच्छाचार  औ'    दमन न 
 रहे । । "

क्रमशः ..................... 


Link to this post-



मंगलवार, 11 दिसंबर 2012

मिलना-जुलना कमजोरी नहीं है ---विजय राज बली माथुर

मौलिक रूप से मुझे मेल-जोल और आना-जाना पसंद है। परंतु साथ-साथ मैं यह भी ध्यान रखता हूँ कि,यदि किसी को मेरा आना-जाना या मेल-जोल रखना पसंद नहीं है या इसे वह मेरी कोई कमजोरी समझ रहा है तो मैं फिर उसके यहाँ आना-जाना और उससे मेल-मुलाक़ात बंद कर देता हूँ।तीन वर्ष पूर्व  लखनऊ आने के बाद छोटों-बड़ों सभी के यहाँ मैं अपनी पहल पर गया था। सबसे पहले एक भांजी जो खानदान की सबसे बड़ी बहन की पुत्री हैं और जिंनका निवास मेरे निवास से कोई डेढ़ किलोमीटर दूर ही होगा ,गया था। फिर उनकी माता अर्थात माधुरी जीजी के यहाँ 18 km दूर गया परंतु भांजी को और जीजी के घर भांजे को शायद हमारा आर्थिक स्तर अपने अनुकूल न लगा। भांजी के घर दोबारा भांजा दामाद साहब की जन्मपत्री का विश्लेषण देने दो दिन बाद ही  गया था  और जीजी के निधन पर उनके शांति हवन मे भाग लेने इस वर्ष जनवरी मे। 

जीजी के घर से जनवरी 2011 मे उनके सबसे छोटे भाई उमेश के घर अशरफाबाद भी गया था। मैंने पाया कि उमेश को शायद अच्छा नहीं लगा था। वह अपनी भांजी के पास हमारी कालोनी मे आते रहते हैं परंतु हमारे घर आना उनको तौहीन लगता है । उनसे दोबारा मुलाक़ात अप्रैल 2011 मे इंदिरानगर मे छोटी बहन के देवर की बेटी की शादी मे हुई थी। उनको कमलेश बाबू ने मुझे चौराहे से विवाह स्थल तक ले आने को भेजा था। डॉ शोभा और कमलेश बाबू से उमेश,उनसे बड़े नरेश और उनसे बड़े ऋषिराज सभी मधुर संबंध रखे हैं। एक तो वह BHEL से फोरमेन के रूप मे रिटायर्ड  हैं दूसरे अब प्राईवेट कंपनी मे इंजीनियर। जो सबसे बड़ी बात है वह यह कि पूनावासी शोभा की छोटी बिटिया की सुसराल से उमेश और ऋषिराज के भी सुसराली रिश्ते हैं। इन तीनों की सुसराल का रिश्ता सीधा-सीधा कुक्कू (कमलेश बाबू के भतीज दामाद जो दिवंगत शालिनी के भाई भी हैं) से है। कुक्कू के पार्सल बाबू भाई हमारे आगरा के मकान पर आँखें गड़ाए हुये थे और आर्थिक व सामाजिक रूप से हमे वहाँ क्षती पहुंचाते रहे थे। 

उमेश के अशरफाबाद से संबन्धित एक विकलांग बैक अधिकारी ने उनके इशारे पर यहाँ कालोनी मे हमारे विरुद्ध लामबंदी करके मेरे तथा यशवन्त के आर्थिक लाभ को अवरुद्ध कर रखा है। कमलेश बाबू ने अपने एक  मित्र  बिल्डर/ ठेकेदार  लिटोरिया के माध्यम से भी हमारे विरुद्ध वातावरण बना रखा है। चूंकि हम लोग अपने निजी आर्थिक हितों की परवाह किए बगैर सार्वजनिक हितों को सम्पन्न कराते रहते हैं इसलिए विपरीत परिस्थितियों मे भी स्वाभिमान से टिके रहते हैं। ब्लाग जगत मे भी यशवन्त लोगों को निशुल्क सहायता करता रहता है और मैं ब्लाग तथा फेसबुक के साथियों को निशुल्क ज्योतिषीय परामर्श देता रहता हूँ। डॉ शोभा/कमलेश बाबू की छोटी बेटी चंद्रप्रभा उर्फ मुकतामणि ने विमान नगर ,पूना मे अपनी पड़ौसन रही मूल रूप से पटनावासी श्रीवास्तव ब्लागर को उकसा/गुमराह करके ब्लाग जगत मे भी  यशवन्त और मेरे विरुद्ध  वातावरण तैयार किया है। इस पूना प्रवासी ब्लागर के दिल्ली वास कर रहे दो  सहयोगियों ने तो निम्नत्तम  स्तर पर जाकर मेरे ज्योतिषीय आंकलनों को गलत करार देने का असफल कुप्रयास भी किया है। जब कि  पूना प्र्वासी ब्लागर खुद मुझसे चार-चार जन्म्पत्रियों के निशुल्क विश्लेषण प्राप्त कर चुका है। खुद को ज़रूरत से ज़्यादा काबिल समझने वाले ये श्रीवास्तव ब्लागर्स यह नहीं समझ रहे हैं कि डॉ शोभा और उनकी बेटी जो श्रीवास्तव लोगों के घोर विरोधी और आलोचक हैं ने किस तिकड़म से उनको उलझाया है। क्योंकि मेरी यह पत्नी पूनम जो पटना के श्रीवास्तव परिवार से हैं उनको नागवार लगती हैं और कांटे से कांटा उखाड़ने के प्रयोग मे  मेरी उन बहन व भांजी ने पटना से ही संबन्धित श्रीवास्तव ब्लागर को मेरे विरुद्ध भिड़ाया है। 

शत्रु सिर्फ शत्रु होता है और उससे कोई रिश्ता-नाता नहीं होता है। जिनकी बुद्धि पैर के तलवे मे होती है उन्हे कोई समझा भी नहीं सकता है। ब्लाग जगत के इस झगड़े ने फेसबुक तथा ब्लाग जगत मे मेरे ज्योतिषीय विश्लेषणों को अच्छी मान्यता प्रदान कर दी है। अब तक ज्योतिष की आलोचना करने वाले साम्यवादी ब्लागर्स और नेता गण भी मुझसे ज्योतिषीय विश्लेषण इस झगड़े के बाद ले चुके हैं जो संख्या मे 11 हैं। इससे पूर्व एक तथाकथित साम्यवादी फेसबुकिया जो कानपुर से हैं झगड़ालू गुट मे मिल गए थे और मेरे विरुद्ध खूब लामबंदी कर चुके थे जो निष्प्रभावी रही। पूना प्रवासी श्रीवास्तव ब्लागर चाहे जितनी एहसान फरामोशी दिखाये और लामबंदी कर ले दूसरे लोगों को लाभ उठाने से तो वंचित कर सकता है परंतु मेरे ज्ञान को नष्ट नहीं कर सकता। कनाडा प्रवासी एक ब्लागर जो मुझसे ज्योतिषीय विश्लेषण निशुल्क प्राप्त कर चुका था इस पूना प्रवासी के भंवर जाल मे फंस गया तो वही प्रवास कर रहे एक दूसरे ब्लागर ने उसकी परवाह न करते हुये  मेरी सलाह पर चलते हुये भारत मे रोजगार प्राप्त करने मे सफलता प्राप्त कर ली। एहसान फरामोशों की इस दुनिया मे वह ब्लागर एहसानमंद निकला है। अपने विवाह का आमंत्रण जब उस ब्लागर ने दिया और आकांक्षा प्रकट की कि उनके वैवाहिक जीवन की सफलता हेतु मैं आशीर्वाद दूँ तो लगा कि धरा अभी अच्छे लोगों से विहीन नहीं हो गई है। IBN7 वाला चमचा हो या दूसरे ब्लागरों को मेरे विरुद्ध धमकाने वाला दूसरा चमचा पूना प्रवासी ब्लागर को उन लोगों की सहायता से मेरे परिवार को नष्ट करने मे सफलता नहीं मिल सकेगी।

Link to this post-



+Get Now!